2021 विधानसभा चुनावः 5 नवंबर को पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे पर जाएंगे अमित शाह
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 की तैयारियों के मद्देनजर गृह मंत्री अमित शाह आगामी 5 नंवबर को प्रदेश के दो दिवासीय दौरे पर जा रहे हैं। शाह बंगाल में भाजपा के संगठनात्मक मामलों का जायजा लेने के लिए राज्य का दौरा करेंगे। 2019 लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगााल के 42 लोकसभा सीटों में से 18 सीटें जीतने वाली बीजेपी इस बार विधानसभा चुनाव में टीएमसी के 10 वर्षों के शासन को उखाड़कर बंगाल में पहली बार बीजेपी का परचम लहराने की कोशिश में हैं।


जेपी नड्डा की 6 जनवरी से बंगाल दौरे की निर्धारित यात्रा रद्द कर दी गई है
पश्चिम बंगाल भाजपा महासचिव सायंतन बसु के मुताबिक भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा की प्रस्तावित 6 जनवरी से प. बंगाल की निर्धारित यात्रा रद्द कर दी गई है। उन्होंने बताया कि जे पी नड्डा जी की यात्रा अब रद्द हो गई है। यह तय किया गया है कि पूर्व बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष शाह आगामी 5 नवंबर से दो दिवसीय यात्रा पर पश्चिम बंगाल में रहेंगे। शाह के 5 नवंबर को मेदिनीपुर संगठनात्मक जिले का दौरा करने की संभावना है और उसके अगले दिन वह बंगाल में पार्टी नेताओं से मिलेंगे। हालांकि बसु ने बताया कि अभी तक गृह मंत्री के शेड्यूल को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है

लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में भाजपा की बढ़त के पीछे थे शाह
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि राज्य में भाजपा के संगठन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके अमित शाह ने दो दिवसीय दौर के दौरान संगठन के विभिन्न पहलुओं पर गौर करेंगे और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की रणनीति पर चर्चा करेंगे। उन्होंने बताया दो दिवसीय दौरे में शाह पार्टी की अंदरूनी कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। हालांकि संभावना जताई गई है कि शाह कोलकाता में एक प्रेस कांफ्रेस को संबोधित कर सकते हैं।

वरिष्ठ नेताओं के साथ बूथ और जिला स्तर के नेताओं से मिलेंगे शाह
सूत्रों ने बताया कि दो दिवसीय पश्चिम बंगाल यात्रा के दौरान अमित शाह, कैलाश विजयवर्गीय, उपाध्यक्ष मुकुल रॉय और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ बूथ और जिला स्तर के नेताओं से मिलेंगे और उनके साथ बातचीत करेंगे। हालांकि इस साल की शुरुआत में शाह ने पश्चिम बंगाल के लिए एक वर्चुअल रैली को संबोधित किया था, लेकिन कोरोनोवायरस-प्रेरित लॉकडाउन के बाद यह राज्य की उनकी पहली यात्रा होगी।

पिछली बार 1 मार्च को शाह ने CAA के विरोध में बंगाल का दौरा किया था
गौरतलब है गृह मंत्री ने पिछली बार 1 मार्च को विवादास्पद नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध में पश्चिम बंगाल का दौरा किया था। तब वाम मोर्चा और कांग्रेस के सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने काले झंडे दिखाए थे। शाह की पिछली यात्रा के दौरान नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के गेट नंबर 1 के बाहर प्रदर्शनकारियों ने एंटी-सीएए पोस्टर लगाकर प्रदर्शन किया। यही नहीं, जादवपुर विश्वविद्यालय के छात्रों और एसएफआई के सदस्यों ने अमित शाह की रैली स्थल के बाहर प्रदर्शन किया था और इलाके में राज्य पुलिस और छात्र प्रदर्शनकारियों के बीच हाथापाई भी हुई थी।

बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने दिल्ली में शाह से मुलाकात की
अगले हफ्ते शुरू होने जा रहा अमित शाह का दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था की कड़ी आलोचना की है, जबकि पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता राज्य में कानून के शासन के टूटने का हवाला देते हुए राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग कर रहे हैं। धनखड़ ने गुरुवार को नई दिल्ली में शाह से मुलाकात की और राज्य के मामलों और मामलों की स्थिति पर बारीकी से चर्चा की। बैठक को दुर्गा पूजा और पश्चिम बंगाल में कोरोनोवायरस मामलों में वृद्धि को देखते हुए महत्वपूर्ण समझा जा रहा है।

राज्य में बड़े संगठनात्मक परिवर्तन के बाद शुरू हो रही है शाह की यात्रा
संगठनात्मक मोर्चे पर देखा जाए तो अमित शाह की बंगाल यात्रा पार्टी की राज्य इकाई में हुए बड़े संगठनात्मक परिवर्तन के बाद शुरू होने जा रही है। इसी दौरान राज्य के महासचिव (संगठन) सुब्रत चट्टोपाध्याय को हटाया गया और उनके उप-प्रमुख अमिताव चक्रवर्ती को केंद्रीय नेतृत्व द्वारा पदोन्नित दिया गया था। यह परिवर्तन बंगाल भाजपा इकाई में कई लोगों के लिए आघात के रूप में देखा गया है, क्योंकि चट्टोपाध्याय ने कई वर्षों के लिए संगठन महासचिव का पद संभाला था और उनको पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष का करीबी भी माना जाता था।

42 लोकसभा सीटों में से 18 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी पार्टी बनीं बीजेपी
उल्लेखनीय है दशकों से राजनीतिक रूप से ध्रुवीकृत राज्य में सीमित उपस्थिति के बाद भाजपा 2019 के आम चुनावों में पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से 18 सीटें जीतकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरी है। वहीं,पिछले कुछ वर्षों में राज्य में भाजपा की ताकत भी कई गुना बढ़ गई है। हालांकि भाजपा पश्चिम बंगाल में जहां कभी भी सत्ता में नहीं रही है, लेकिन पार्टी के नेताओं ने विश्वास जताया है कि अगले साल अप्रैल-मई में होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 10 साल के शासन को समाप्त कर देगी।
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