• search

'क्रूर न्यू इंडिया' Vs 'मोहब्बत का पैगाम', क्या अभी से सेट हो गया 2019 का चुनावी एजेंडा?

By Yogender Kumar
Subscribe to Oneindia Hindi
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts

    नई दिल्‍ली। मोदी का इंडिया क्रूर है....हम प्‍यार बांटने आए हैं! कहने का अंदाज जरा फिल्‍मी है, पर बात सोलह आने राजनीतिक है। कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी इसी लाइन को पकड़कर 2019 लोकसभा चुनाव में उतरने का मन बना चुके हैं। सोमवार को राहुल गांधी ने ट्वीट कर अलवर में भीड़ हिंसा के शिकार अकबर खान का मुद्दा उठाया और लगातार हो रही मॉब लिंचिंग पर कटाक्ष करते हुए लिखा, ये मोदी का क्रूर न्‍यू इंडिया है। राहुल गांधी के इस बयान से एक दिन पहले मुंबई कांग्रेस ने पोस्‍टर लगवाए। नफरत से नहीं प्‍यार से जीतेंगे, साथ में पीएम नरेंद्र मोदी से गले लगते हुए राहुल गांधी की तस्‍वीर भी लगी थी।

    2019 में राहुल गांधी की लवोलॉजी जनता के गले उतरेगी?

    2019 में राहुल गांधी की लवोलॉजी जनता के गले उतरेगी?

    बीते शुक्रवार को अविश्‍वास प्रस्‍ताव के दौरान राहुल गांधी ने पीएम मोदी को गले लगाकर भी यही बात कही थी। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्‍या 2019 में राहुल गांधी की लवोलॉजी जनता के गले उतरेगी? उतर भी सकती है, लेकिन सबकुछ निर्भर करेगा कि कांग्रेस नफरत शब्‍द को चुनावी कैंपेन के दौरान किस प्रकार से डिफाइन करेगी। कांग्रेस अध्‍यक्ष बनने के तुरंत बाद गुजरात चुनाव में प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने बीजेपी पर नफरत भरी राजनीति का आरोप लगाया था। उन्‍होंने एक रैली में बार-बार कहा था, 'हम बीजेपी की नफरत का जवाब प्‍यार से देंगे।' तब से लगातार वह इस लाइन को दोहरा रहे हैं। अब उनका हर एक्‍शन 'बीजेपी की नफरत' के इर्द-गिर्द घूमता नजर आ रहा है। कुछ दिनों पहले वह मुस्लिम नेताओं से मिले थे, तब भी बीजेपी की नफरत की बात कही।

    सोनिया से अलग सॉफ्ट लाइन पकड़ रहे हैं राहुल गांधी

    सोनिया से अलग सॉफ्ट लाइन पकड़ रहे हैं राहुल गांधी

    वैसे, कांग्रेस का बीजेपी में देखना कोई नहीं बात नहीं है। सोनिया गांधी ने तो नरेंद्र मोदी को 'मौत का सौदागर' तक कह दिया था, लेकिन मोदी लहर का प्रचंड रूप देखने के बाद अब नरेंद्र मोदी 'मौत का सौदागर' कहना उल्‍टा पड़ सकता है। उनकी लोकप्रियता कम जरूर हुई है, लेकिन नरेंद्र मोदी अब बड़े फैक्‍टर हैं। ऐसे में राहुल गांधी ने सॉफ्ट लाइन पकड़ी है।

    इसे भी पढ़ें-300 सीटों का फार्मूला, गठबंधन पर सिर्फ राहुल लेंगे फैसला, पढ़ें CWC की 4 अहम बातें

    मोदी के खिलाफ कांग्रेस के पास हैं ये दो अहम हथियार

    मोदी के खिलाफ कांग्रेस के पास हैं ये दो अहम हथियार

    रविवार को नई कांग्रेस वर्किंग कमेटी की पहली बैठक में मनमोहन सिंह ने जिस प्रकार से नरेंद्र मोदी पर जुमले गढ़ने का आरोप लगाया है, उससे साफ है कि कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी समेत उसके सभी शीर्ष नेता नरेंद्र मोदी को सीधे निशाना बना रहे हैं। विदेश दौरों से लेकर जुमले गढ़ने तक और नफरत की राजनीति से लेकर मोदी के अहंकार जैसे निजी आरोप बताते हैं कि कांग्रेस के पास 2019 लोकसभा चुनाव में उतरने के लिए केवल दो ही विकल्‍प बचे थे। पहला- नरेंद्र मोदी की शख्सियत पर हमला और दूसरा कट्टर हिंदुत्‍व के नाम बीजेपी पर नफरत की राजनीति करने वाली पार्टी का टैग। इन दोनों को मिलाकर कांग्रेस एक बात कह रही है 'मोदी की नफरत की राजनीति', क्‍योंकि इस दौर में मोदी ही बीजेपी हैं।

    कांग्रेस की प्रो-मुस्लिम नीति कहीं दोबारा न कर दे हिंदू वोट संगठित

    कांग्रेस की प्रो-मुस्लिम नीति कहीं दोबारा न कर दे हिंदू वोट संगठित

    देखा जाए तो राजनीति में निजी हमले पहले भी होते रहे हैं, इसमें कुछ भी नया नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि क्‍या 'नफरत की राजनीति' के आधार पर कैंपेन चलाने से कांग्रेस को फायदा होगा? कहीं ऐसा तो नहीं 'नफरत की राजनीति' का कांग्रेसी आरोप मोदी के हिंदू वोट बैंक को और संगठित कर दे? भूलना नहीं चाहिए कि हिंदू कांग्रेस का भी वोट बैंक है, लेकिन मौजूदा रणनीति से ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस 2014 की तरह हिंदू वोट बैंक को बीजेपी के हवाले कर बैठी है। नमामि गंगे प्रोजेक्‍ट, मोदी के संसदीय के क्षेत्र में विकास कार्य, दलित, पिछड़ों के मुद्दे छोड़कर सिर्फ बीजेपी की नफरत के इर्द-इर्द चुनावी ताना-बाना क्‍या ठीक रहेगा?

    मोदी की शख्सियत के इर्द-गिर्द ही घूमती रही कांग्रेस की राजनीति, नहीं खड़े कर सकी आंदोलन

    मोदी की शख्सियत के इर्द-गिर्द ही घूमती रही कांग्रेस की राजनीति, नहीं खड़े कर सकी आंदोलन

    मोदी सरकार के चार साल से ज्‍यादा के कार्यकाल में कांग्रेस ने जितने भी मुद्दों को हवा दी वे सभी बीजेपी की नफरत वाली राजनीति के इर्द-गिर्द थे। मसलन- अवॉर्ड वापसी, मॉब लिंचिंग, गौरी लंकेश हत्‍याकांड वगैरह। मोदी सरकार के खिलाफ चार साल में सबसे बड़ा अगर कोई आंदोलन हुआ तो वह दलितों का भारत बंद था, लेकिन उसमें भी कांग्रेस लीड करती नहीं दिखी। निष्‍कर्ष यह है कि मोदी सरकार के सत्‍ता में आने के बाद कांग्रेस मोदी और बीजेपी की नफरत के सहारे ही विरोध का धर्म निभाती रही है। वह गंगा की सफाई से लेकर नोटबंदी तक किसी मुद्दे पर मोदी सरकार के विरोध को आंदोलन में परिवर्तित नहीं कर सकी। तो कांग्रेस के पास अब बचा ही क्‍या है? वही मोदी की ''नफरत की राजनीति''। इसी मुद्दे पर अब कांग्रेस ने 2019 का ताना-बाना बुना है, देखना होगा कि कांग्रेस की यह रणनीति आखिर कितनी सफल होती है।

    इसे भी पढ़ें- शादी के बाद भी संबंध के लिए मजबूर करती थी 3 बच्‍चों की मां, प्रेमी ने की खुदकुशी 

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    English summary
    2019 Lok Sabha Election's Agenda? PM Modi's cruel India Vs Rahul Gandhi's Love Message.

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more