2012 Chhawla Case : दोषियों को SC से मिली है 'मुक्ति', DCW ने स्वत: संज्ञान लिया, DCP से मांगे जवाब
2012 Chhawla Case में दिल्ली महिला आयोग (DCW) ने suo moto cognizance लिया है। आयोग ने DCP से विस्तृत जानकारी मांगी है। 2012 Chhawla case DCW takes suo moto cognizance writes to Delhi DCP HQ
2012 Chhawla Case में दिल्ली महिला आयोग (DCW) ने suo moto cognizance लिया है। जघन्य वारदात के बारे में स्वत: संज्ञान लेने के बाद महिला आयोग ने Delhi DCP HQ को पत्र लिखा। आयोग ने 2012 छावला रेप केस में मृतक के परिवार को सुरक्षा के संबंध में जानकारी, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए अन्य कदमों का विवरण और कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। मामला उत्तराखंड की युवती का है।

उत्तराखंड के CM ने कानून मंत्री रिजिजू से बात की
SC के फैसले के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा था कि उन्होंने कानून मंत्री किरेन रिजिजू से बात की है। सीएम धामी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उन्होंने एडवोकेट चारू खन्ना से बात की है। वही इस केस को देख रही हैंं। पीड़िता भारत की बेटी है और उसे न्याय दिलाने के लिए सरकार सब कुछ करेगी।
दिल्ली महिला आयोग ने क्या कहा
बता दें कि एक दशक पुराने 2012 छावला रेप केस में डीसीडब्ल्यू ने 19 वर्षीय मृतका के परिवार के कल्याण के लिए स्वत: संज्ञान लिया है। दिल्ली डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (डीसीपी) ने मुख्यालय को पत्र लिखा है। महिला आयोग ने मृतका के परिवार की सुरक्षा के संबंध में जानकारी मांगी है। डीसीडब्ल्यू ने पूछा है कि पीड़िता के परिजनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या पहल की गई। आयोग ने पुलिस की ओर से उठाए गए अन्य कदमों का विवरण और कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।

2012 Chhawla Case में SC
गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने 2012 Chhawla rape case के दोषियों को बरी करने का फैसला सुनाया। देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि वारदात कितना भी जघन्य क्यों न हो, अदालत के फैसले साक्ष्यों पर आधारित होते हैं, भावनाओं से प्रेरित नहीं। सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस बेला त्रिवेदी ने आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया है। हालांकि, पीड़िता के पिता ने अपना संघर्ष जारी की बात कही है।
क्या सुप्रीम कोर्ट का फैसला शर्मनाक ?
छावला गैंगरेप-हत्या केस के नाम से कुख्यात दिल्ली के इस मामले में सोमवार, सात नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया। अदालत ने तीनों दोषियों की फांसी की सजा माफ कर उन्हें बरी कर दिया। दिल्ली हाईकोर्ट से मौत की सजा पा चुके दोषियों को मुक्ति मिलने का फैसला पूरे देश को चौंका गया। कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले सवाल भी खड़े किए हैं। शीर्ष अदालत का फैसला शर्मनाक तक बताया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला
मामला फरवरी, 2012 का है। उत्तराखंड की पौड़ी निवासी 19 साल की पीड़िता दिल्ली से सटे गुरुग्राम के साइबर सिटी इलाके में नौकरी करती थी। काम के बाद दिल्ली के छावला इलाके में स्थित अपने घर लौट रही युवती को आरोपियों ने उसके घर के पास से ही अगवा कर लिया था। एक कार की मदद से किडनैप की गई युवती का शव तीन दिन बाद बहुत बुरी अवस्था में हरियाणा के रेवाड़ी गांव की एक खेत से बरामद हुआ था।
निचली अदालत और हाईकोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई
2012 की इस घटना को मीडिया रिपोर्ट्स में जघन्य वारदात कहा गया। वारदात के तीन साल बाद 2015 में दिल्ली की निचली अदालत ने तीनों आरोपियों राहुल, रवि और विनोद को 19 साल की पीड़िता के अपहरण, गैंगरेप और हत्या का दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। बाद में हाईकोर्ट ने भी फांसी से माफी देने से इनकार कर दिया था।












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