2008 असम सीरियल बम ब्लास्ट: NDFB प्रमुख रंजन दैमारी समेत 10 को उम्रकैद, 88 लोगों की हुई थी मौत
नई दिल्ली। साल 2008 में हुए असम सीरियल बम विस्फोट मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के संस्थापक रंजन दैमारी और नौ अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस मामले में कोर्ट ने दैमारी समेत 14 लोगों को दोषी करार दिया था। विशेष सीबीआई जज अपरेश चक्रवर्ती ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत इन सभी को दोषी ठहराते हुए सजा का ऐलान किया। आपको बता दें कि 2008 में एक के बाद एक हुए 18 धमाकों में 88 लोगों की जान गई थी।

दैमारी के अलावा दोषी ठहराए गए लोगों में जॉर्ज बोडो, बी थराई, राजू सरकार, निलिम दैमारी, अंचई बोडो, इंद्रा ब्रह्मा, लोको बासुमतारी, खड़गेश्वर बासुमतारी, प्रभात बोडो, जयंत बोडो, अजय बासुमतारी, मृदुल गोयारी, माथुराम ब्रह्मा और राजेन गोयारी शामिल हैं। इस मामले की शुरुआती जांच असम पुलिस ने की थी। बाद में इसकी जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपी गई। इस मामले में सात आरोपी अब भी फरार है। सीबीआई ने ट्रायल के दौरान 650 गवाहों को पेश किया।
गौरतलब है कि एनडीएफबी ने 2008 में 30 अक्टूबर को एक के बाद एक गुवाहाटी, कोकराझार, बोंगईगांव और बारपेटा में विस्फोट किए थे। इसमें 88 लोग मारे गए थे जबकि 500 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। रंजन दैमारी को 2010 में बांग्लादेश में गिरफ्तार किया गया था। जहां से उसे बाद में लाया गया और गुवाहटी सेंट्रल जेल में रखा गया। उसे 2013 में सशर्त जमानत मिली। सरकार ने शांति वार्ता के लिए दैमारी के जमानत पर आपत्ति नहीं जताई।












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