मुंबई: महिला के सिर में आती थी आवाजें, 20 साल बाद मिर्गी का सफल ऑपरेशन

जसलोक हॉस्चिटल एंड रिसर्ट सेंटर के न्यूरोसर्जन डॉ. परेश डोसी ने बताया कि मिर्गी के ज्यादातर मामलों में लोग इलाज कराने में देरी करते हैं जिस वजह से बीमारी बढ़ती जाती है

नई दिल्ली। मुंबई की रहने वाली एक महिला के सिर में पिछले बीस साल से कुछ आवाज सुनाई देती थी। जिसको लेकर उसके घर वाले काफी परेशान रहते थे। मुंबई से लेकर बेंगलुरू के बड़े डॉक्टरों से महिला का इलाज कराया गया लेकिन बीमारी किसी के समझ में नहीं आई। अब बीस साल बाद महिला के रेयर एपिलेप्सी सर्जरी हुआ है। महिला के दिमाग के अंदर इफेक्टेड एरिया की डॉक्टरों ने सर्जरी की है। अब महिला के हालात ठीक है। महिला के इस बीमारी की शुरूआत बचपन से हुई थी जब वह 12 साल की थी अब महिला की उम्र 32 साल है।

महिला को 12 साल की उम्र से मिर्गी थी

महिला को 12 साल की उम्र से मिर्गी थी

मिर्गी (एपिलेप्सी) के केस स्टडी पर बात करते हुए मुंबई के डॉक्टरों ने बताया कि महिला 12 साल की उम्र से मिर्गी की शिकार थी जिसे दवाओं से कंट्रोल नहीं किया जा सकता था। मुंबई के कोकिलाबेन धीरू भाई अंबानी हॉस्पिटल के डॉक्टर जयंती मनी ने बताया कि बीते पांच- छह सालों से महिला की हालत काफी बिगड़ गई थी वह अपने आप पास लोगों को झगड़ते हुए और बात करते हुए सुनती थी। जिसको लेकर उसके घरवाले ज्याजा परेशान थे। महिला की बीमारी की हिस्ट्री को ठीक तरीके से जानने के बाद ऑपरेशन किया गया। इस महिला का इलाज मुंबई और बेंगलुरू के डॉक्टरों ने किया। बीमारी का असली कारण एमआरआई में पता चल पाया जिसके बाद महिला के दिमाग की सर्जरी की गई।

इलाज में देरी से बीमारी बढ़ती जाती है

इलाज में देरी से बीमारी बढ़ती जाती है

जसलोक हॉस्चिटल एंड रिसर्ट सेंटर के न्यूरोसर्जन डॉ. परेश डोसी ने बताया कि मिर्गी के ज्यादातर मामलों में लोग इलाज कराने में देरी करते हैं जिस वजह से बीमारी बढ़ती जाती है। मिर्गी का इलाज करते समय केस स्टडी बहुत जरूरी होता है इस महिला का इलाज भी सही केस स्टडी के बाद ही संभव हो पाया। मिर्गी के मामलों से पहले दो साल तक दवा चलाई जाती है फिर ऑपरेशन पर विचार किया जाता है। उन्होंने कहा कि मिर्गी सिर पर चोट लगने, नवजात के दिमाग में ऑक्सीजन का प्रवाह कम होने, ब्रेन ट्यूमर, दिमागी बुखार और इंसेफेलाइटिस के कारण हो सकता है। ब्रेन स्ट्रोक होने के बाद, न्यूरोलॉजिकल डिजीज जैसे अल्जाइमर से, ड्रग एडिक्शन और एंटी डिप्रेशन दवा के अधिक सेवन आदि से भी मिर्गी होती है।

मिर्गी के ऑपरेशन में न्यूरो फिजिशियन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है

मिर्गी के ऑपरेशन में न्यूरो फिजिशियन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है

मिर्गी के ऑपरेशन में न्यूरो फिजिशियन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। न्यूरो फिजिशियन लक्षणों व ईईजी जांच से पता लगाते हैं कि ब्रेन के किस हिस्से में विकृति है। उसी हिस्से पर छोटा चीरा लगा कर विकृति को हटा दिया जाता है। ऑपरेशन के दौरान न्यूरो सर्जन, न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरो फिजिशियन, रेडियोलॉजिस्ट, साइकोलॉजिस्ट सहित एनेस्थीसिया की टीम की जरूरत होती है। इनमें से एक के भी नहीं होने से ऑपरेशन संभव नहीं हो पाता है।

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