1993 मुंबई सीरियल बम ब्लास्ट: पढ़ें उस काले दिन की खौफनाक कहानी
स्टॉक एक्सचेंज की बिल्डिंग में धमाके के बाद लोगों को अंदाजा ही नहीं था कि आगले 90 मिनट में मुंबई धमाकों से हिल जाएगी। माहिम कॉसवे में धमाके ने तीन की जान ले ली।
मुंबई। 1993 मुंबई ब्लास्ट मामले में टाडा कोर्ट का फैसला आ गया है। कोर्ट ने अबू सलेम समेत 6 आरोपियों को दोषी करार दिया है और एक आरोपी को बरी कर दिया है। आइए हम आपको आज उस काले दिन की पूरी कहानी विस्तार से बताते हैं। 12 मार्च 1993, दिन- शुक्रवार, जगह- देश की आर्थिक राजधानी मुंबई। जी हां ये वो तारीख है जिसे भारत के इतिहास में ब्लैक फ्राइडे के नाम से जाना जाता है। इसी दिन मुंबई एक के बाद एक 12 सिलसिलेवार बम धमाकों से दहल उठी थी।

उस मनहूस दोपहर को हर उस ठिकाने को निशाना बनाया गया जो मुंबई की शान थी और पहचान थी। पूरी दुनिया के इतिहास में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर सीरियल बम धमाके हुए थे। इन बम धमाकों में 257 लोग मारे गए थे जबकि 713 लोग जख्मी हुए थे। सबसे पहला धमाका बाम्बे स्टॉक एक्सचेंज की इमारत के बाहर हुआ था। दोपहर करीब 1 बजकर 28 मिनट पर ऐसा धमाका हुआ जिसकी आवाज मीलों तक सुनी गई। 29 मंजिला बीएसई की इमारत थर्रा गई थी। जो जहां था वहीं गिर पड़ा और काला धुआं छंटा तो तबाही सामने आई। चारों ओर छितराईं लाशें, रोते-बिलखते और डर से चीखते लोग दिख रहे थे।
उस वक्त देश की आर्थिक राजधानी के शेयर बाजार में दो हजार लोग मौजूद थे। बेसमेंट की पार्किंग में आरडीएक्स से लदी एक कार में टाइमर के जरिये धमाका हुआ था, जिसमें 84 बेगुनाह मारे गए और करीब सवा दो सौ जख्मी हुए थे। ये तो शुरुआत थी, दस मिनट बाद नर्सी नत्था स्ट्रीट की अनाज मंडी के एक ट्रक में धमाका हुआ। जब तक शहर कुछ समझ पाता 50 मिनट बाद स्टॉक एक्सचेंज से कुछ ही दूर एयर इंडिया की इमारत के पार्किंग में धमाका हुआ। ये विस्फोट इतना जबर्दस्त था कि बेसमेंट की दोनों मंजिलों में बड़े गड्ढे पड़ गए। गुलजार रहने वाली अनाज मंडी में चीखें गूंजने लगीं।
90 मिनट में 7 धमाके
स्टॉक एक्सचेंज की बिल्डिंग में धमाके के बाद लोगों को अंदाजा ही नहीं था कि आगले 90 मिनट में मुंबई धमाकों से हिल जाएगी। माहिम कॉसवे में धमाके ने तीन की जान ले ली। तभी हीरे-जवाहरात का बाजार धमाके से दहल उठा और 17 लोग मारे गए। जवेरी बाजार में एक लावारिस स्कूटर में विस्फोटक रखे गए थे। तब तक डेढ़ घंटे में सात धमाके हो चुके थे। मुंबई के कई हिस्से श्मशान घाट जैसे दिख रहे थे।
पांच मिनट बाद ही बांद्रा के सी रॉक होटल की 18वीं मंजिल में धमाका हुआ। किस्मत अच्छी थी, इसमें किसी का नुकसान न हुआ, लेकिन तीन मिनट बाद प्लाजा सिनेमा की पार्किंग में खड़ी कार में धमाके 10 लोगों की जान ले ली। अगले सात मिनट तक यूं ही सन्नाटा पसरा रहा फिर जुहू से खबर आई। वहां सेंटार होटल में धमाका हुआ था, जिसमें तीन लोग बुरी तरह जख्मी हुए थे। फिर सहारा एयरपोर्ट के पास भी एक हल्का धमाका हुआ। उसके तुरंत बाद एयरपोर्ट के करीब सेंटॉर होटल में एक और जानलेवा विस्फोट हुआ, दो बेगुनाह और मारे गए। मुंबई ने मातम ओढ़ लिया था।
किस समय कहां हुआ धमाका
- पहला धमाका-दोपहर 1.30 बजे, मुंबई स्टॉक एक्सचेंज
- दूसरा धमाका-दोपहर 2.15 बजे, नरसी नाथ स्ट्रीट
- तीसरा धमाका-दोपहर 2.30 बजे, शिव सेना भवन
- चौथा धमाका-दोपहर 2.33 बजे,एयर इंडिया बिल्डिंग
- पांचवा धमाका-दोपहर 2.45 बजे,सेंचुरी बाज़ार
- छठा धमाका-दोपहर 2.45 बजे, माहिम
- सातवां धमाका-दोपहर 3.05 बजे,झावेरी बाज़ार
- आठवां धमाका-दोपहर 3.10 बजे,सी रॉक होटल
- नौवां धमाका-दोपहर 3.13 बजे,प्लाजा सिनेमा
- दसवां धमाका-दोपहर 3.20 बजे,जुहू सेंटूर होटल
- ग्यारवां धमाका-दोपहर 3.30 बजे,सहार हवाई अड्डा
- बारहवां धमाका-दोपहर 3.40 बजे,एयरपोर्ट सेंटूर होटल
दाऊद इब्राहिम था मास्टर माइंड, पाकिस्तान में रची गई साजिश
इस हमले का मास्टरमाइंड दाऊद इब्राहिम था। जो आज सरहद पार आतंकी आकाओं के महफूज किले में जाकर बंद हो गया है। इस धमाके की साजिश पाकिस्तन में रची गई थी। 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद फैले दंगों में सोने की तस्करी करने वाले टाइगर मेमन का बिजनेस तबाह हो गया था।
मेमन ने अपनी बर्बादी का बदला लेने के लिए मुंबई को दहलाने की साजिश रची। मुंबई बम धमाकों के अंजाम देने के लिए दुबई में एक खुफिया मीटिंग हुई। मीटिंग के बाद कुछ नौजवानों को बम बनाने की ट्रेनिंग लेने के लिए पाकिस्तान भेजा गया। इसके बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम ने आतंकियों को मुंबई में हथियार और गोला-बारूद मुहैया कराया और फिर आया वो ब्लैक फ्राइडे जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया।












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