कश्मीर घाटी में आतंकियों के निशाने पर स्कूल-कॉलेज, फिर लौट रहे हैं 1990 जैसे हालात?

राज्य में ऐसे हालात 1990 के बाद एक बार फिर बने हैं। यह वो दौर था जब आतंकियों का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा था।

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में स्कूल और बैंक आतंकवादी संगठनों के निशाने पर हैं। लश्कर ए तोएबा ने दावा किया है कि हुर्रियत कॉन्फ्रेंस की ओर से जारी विरोध प्रदर्शनों के कैलेंडर को सरकार की ओर से महत्व न दिए जाने के विरोध में स्कूल और कॉलेजों को टारगेट किया जा रहा है।

Kashmir Unrest

लश्कर ने दावा किया कि हुर्रियत की ओर से जारी कैलेंडर में कहा गया है कि सिर्फ शांति के समय ही बैंक शाम पांच बचे तक खुले रहेंगे। लेकिन बैंक इस फरमान को मानने को तैयार नहीं हैं।

राज्य में ऐसे हालात 1990 के बाद एक बार फिर बने हैं। यह वो दौर था जब आतंकियों का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा था। 9 जुलाई को कश्मीर घाटी में भड़की हिंसा के बाद कई स्कूलों को आतंकियों और प्रदर्शनकारियों की ओर से निशाना बनाया गया।

एक नजर में देखिए क्या हैं हालात

  • जुलाई 2016 से अब तक कश्मीर घाटी में 23 स्कूल जलाए गए।
  • बीते करीब साढ़े तीन महीनों में कश्मीर घाटी के सभी 10 जिलों में कम से कम एक स्कूल को आग के हवाले किया गया।
  • बीते पांच दिनों में ही पांच स्कूलों को आग लगा दी गई।
  • कश्मीर में हिंसा के दौरान 17 सरकारी मिडिल, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल संदेहजनक परिस्थितियों में जल गए।
  • कश्मीर में दो बड़े निजी स्कूल भी आग की चपेट में आए जिससे काफी नुकसान हुआ।
  • अनंतनाग में वक्फ बोर्ड की ओर से चलाए जा रहे ऐतिहासिक स्कूल को भी आग के हवाले कर दिया गया। इसमें मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उनके दिवंगत पिता मुफ्ती मुहम्मद सईद ने भी बढ़ाई की थी।
  • 17 में से सात को पूरी तरह जलाकर राख कर दिया गया जबकि 10 स्कूलों में कुछकुछ नुकसान हुआ।
  • दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। यहां पांच स्कूलों को या तो पूरी तरह जलाकर राख कर दिया गया। कुछ में आंशिक नुकसान भी हुआ है।
  • मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में तीन स्कूलों को आग लगा दी गई।
  • पुलिस ने सभी मामलों में केस दर्ज कर लिया है लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

तो क्या वाकई 1990 जैसे हालात हैं कश्मीर में?
1990 के दशक में जम्मू-कश्मीर में करीब 5000 स्कूलों को आतंकियों ने तहस नहस कर दिया था। बच्चों का स्कूल जाना दूभर हो गया था। कई मामलों में आतंकियों ने बच्चों और शिक्षकों को स्कूल से जबरन बाहर करके आग लगाई थी। इन स्कूलों को बनाने में कई साल लग गए। लेकिन एक बार फिर वैसे ही हालात बनने की वजह से अब फिर सारी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा।

  • 10 मई 1989 को श्रीनगर के लाल चौक पर स्थित बिस्को मेमोरियल स्कूल को उड़ाने के लिए विस्फोटक प्लांट किया गया था।
  • 17 मार्च 1990 को श्रीनगर के सोनावर स्थित कैथोलिक मिशन के स्कूल को उड़ाने की कोशिश की गई थी।
  • 23 मई 1990 को लाल चौक स्थित बिस्को मेमोरियल स्कूल के कंपाउंड में एक धमाका हुआ था। आतंकियों ने स्कूल में इस्लामिक शिक्षा शुरू करने की भी चेतावनी दी थी।
  • 11 नवंबर 1990 को एक बार फिर बिस्को मेमोरियल स्कूल को निशाना बनाया गया। यह धमाका मिसनरी स्कूलों को निशाना बनाकर किया था।
  • 23 फरवरी 1991 को लाल चौक स्थित मिस मेलांसन गर्ल स्कूल में एक धमाका हुआ
  • 5 जुलाई 1992 को लाल चौक स्थित बिस्को मेमोरियल स्कूल में एक धमाका हुआ।
  • 24 जुलाई 1993 को बिस्को मेमोरियल स्कूल में आतंकियों ने आग लगा दी थी।
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