भारत में चार महीने में निकला 18 हजार टन कोविड-19 बायो वेस्ट, लिस्ट में महाराष्ट्र सबसे ऊपर
नई दिल्ली: भारत के हर हिस्से में कोरोना वायरस का संक्रमण फैल गया है। कोरोना महामारी को रोकने के लिए डॉक्टर जी-जान से जुटे हैं, लेकिन इलाज और टेस्ट से निकले बायोमेडिकल कचरे ने चिंता बढ़ा दी है। पिछले चार महीनों की बात करें तो देश में 18006 टन COVID-19 बायो वेस्ट निकला है। इसमें सबसे ज्यादा महाराष्ट्र से आया है। कोरोना केस बढ़ने के साथ ही बायो वेस्ट भी बढ़ता जा रहा है, जिस वजह से सिर्फ सितंबर में ही 5500 टन कचरा कोविड-19 की वजह से निकला।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक महाराष्ट्र ने 3,587 टन कोविड-19 बायोमेडिकल कचरा निकाला है, जबकि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलाकर ये आंकड़ा 18006 टन का है। देशभर में लगे 198 बायो वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट की मदद से इस कचरे का निपटारा किया जा रहा है। बोर्ड ने बताया कि इस कचरे में प्रमुखता पीपीई किट, मास्क, जूता कवर, ड्रेसिंग, प्लास्टर, कॉटन स्वैब, खून लगे बिस्तर, ब्लड बैग, सुई, सीरिंज आदि शामिल हैं।
डेटा के मुताबिक महाराष्ट्र के बाद तमिलनाडु ने 1737 टन, गुजरात ने 1638 टन, केरल ने 1516 टन, यूपी ने 1416 टन, दिल्ली ने 1400 टन, कर्नाटक ने 1380 और पश्चिम बंगाल ने 1000 टन कोविड-19 बायो वेस्ट उत्पन्न किया। सिर्फ सितंबर में ही 5490 टन कचरा निकला, जिसमें 622 टन गुजरात का था। इसके बाद तमिलनाडु ने 543 टन, महाराष्ट्र ने 524 टन, यूपी ने 507 टन कचरा निकला।
वहीं सीपीसीबी ने मार्च में हेल्थकेयर सेंटर, क्वारंटीन सेंटर, सैंपल कलेक्शन सेंटर समेत सभी के लिए बायो कचरे के निपटारे के लिए एक गाइडलाइन जारी की थी। इसके अलावा बायोमेडिकल कचरे की निगरानी के लिए COVID19BWM नाम से एक ऐप्लीकेशन भी तैयार किया था। ये ऐप बायो वेस्ट के संग्रहण और निपटारे को ट्रैक करने में मदद करता है।












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