8kg Tumour: 6 महीने में 16 बार ऑपरेशन, डॉक्टरों ने मरीज के चेहरे से निकाला फुटबॉल जितना बड़ा ट्यूमर
बेंगलुरु, 1 अक्टूबर। भारत के डॉक्टरों ने एक बार फिर कमाल कर दिया है। कर्नाटक के बेंगलुरु में छह महीने तक 16 सर्जरी करने के बाद डॉक्टरों को मरीज के चेहरे से 8 किलोग्राम के ट्यूमर को निकालने में बड़ी कामयाबी मिली है। डॉक्टरों के कड़ी मेहनत की वजह से मरीज को न सिर्फ नया जीवनदान मिला है बल्कि मेडिकल साइंस के इतिहास में भी इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस ऑपरेशन में 72 लाख रुपए से भी अधिक का खर्च आया है।

बचपन से था चेहरे पर ट्यूमर
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार ओडिशा के टिटलागढ़ के रहने वाले मनबोध बाग के चेहरे पर दाईं ओर सालों से 8 किलो का ट्यूमर पल रहा था। वह बचपन से ही प्लेक्सिफॉर्म न्यूरोफिब्रोमा नामक एक दुर्लभ स्थिति से पीड़ित थे। इस वजह से उनके चेहरे पर बचपन से ही ट्यूमर बन रहा था जो लगातार बड़ा होता जा रहा था। जैसे-जैसे मनबोध की उम्र बढ़ती गई, वैसे-वैसे उनके चेहरे पर ट्यूमर का साइज भी बढ़ता गया।
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ट्यूमर देख दूर भागते थे लोग
इस ट्यूमर की वजह से उनके पास कोई नहीं आता था, उन्हें अपमानित भी होना पड़ता था। बेंगलुरु स्थित एस्टर सीएमआई अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि ट्यूमर की वजह से मनबोध को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता था, लोग उन्हें देखना पसंद नहीं करते थे। ट्यूमर के इलाज के लिए वह पहले भी कई अस्पतालों में जा चुके थे लेकिन उन्हें कहीं से भी राहत नहीं मिली। (फोटो साभार: द इंडियन एक्सप्रेस)

कई अस्पतालों ने हाथ लगाने से किया मना
कुछ अस्पतालों ने उनकी सर्जरी करने से मना कर दिया। डॉक्टरों को डर था कि साइज में फुटबॉल जितने बड़े ट्यूमर की सर्जरी के दौरान खून बहने की वजह से मरीज की जान भी जा सकती है, इसलिए उन्होंने ये जोखिम नहीं लिया। डॉक्टरों के मुताबिक सर्जरी में बाग के बचने की संभावना बहुत कम थी। मनबोध बाग को नई जिंदगी देने वाले डॉक्टरों ने बताया कि ओडिशा के प्रमुख अस्पताल ने उनके ट्यूमर की जांच की और सर्जरी शुरू किया।

ओडिशा में फेल हुआ था ऑपरेशन
हालांकि यह ऑपरेशन सफल नहीं हो पाया था क्योंकि सर्जरी के दौरान अनियंत्रित रक्तस्राव के कारण उसे बीच में ही छोड़ दिया गया। इसके बाद बाग को बेंगलुरु स्थित एस्टर सीएमआई अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उन्हें 6 महीने में 16 अलग-अलग सर्जरी से गुजरना पड़ा। इस चैलेंजिंग सर्जरी को न्यूरोसर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, ऑन्कोलॉजी, ईएनटी, न्यूरोएनेस्थेसिया और नेत्र विज्ञान के विशेषज्ञों ने अन्य विभागों के साथ मिलकर अंजाम दिया ताकि य्टूमर को सुरक्षित रूप से हटाया जा सके।

बेंगलुरु पहुंचे तो थी बेहद बुरी हालत
न्यूरोसर्जरी और अस्पताल में न्यूरोसाइंस के प्रमुख डॉ. रवि गोपाल वर्मा ने कहा, मनबोध बाग हमारे पास एक बेहद अजीबोगरीब ट्यूमर के साथ लाया गया था जो उनके सिर से लकर गर्दन तक फैला हुआ था। ओडिशा में असफल ऑपरेशन से गुजरने के बाद उनके ट्यूमर की कंडीशन और भी बुरी हो गई थी। सीटी स्कैन से पता चला कि ट्यूमर की वजह से बाग के चेहरे की हड्डियां भी प्रभावित हुई थीं। ऐसे रेयर केस में अक्सर अलग-अलग तरह के उपचार और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की आवश्यकता होती है।

कई तरह के किए गए ऑपरेशन
डॉ. रवि गोपाल वर्मा ने आगे कहा, हमारी टीम ने सावधानीपूर्वक ट्यूमर की जांच की और इलाज के लिए एक सफल ऑपरेशन का रास्ता निकाला। सर्जरी के दौरान, रक्तस्राव को कम करने के लिए, हमने प्री-ऑप ट्यूमर एम्बोलिजेशन की योजना बनाई। डॉ सतीश एमएस ने बताया कि ट्यूमर की साइज का पता लगाने के लिए बाग के चेहरे का 3डी-मॉडल तैयार किया गया। एक बार चेहरे से ट्यूमर हटा दिए जाने के 48 घंटे बाद प्लास्टिक सर्जरी की गई।

72.73 लाख रुपए का आया खर्च
डॉ. मधुसूदन के मुताबिक सर्जरी के दौरान बाग के चेहरा की आधिकांश त्वचा को हटाना पड़ा क्योंकि ट्यूमर उनसे जुड़ा हुआ था। इस वजह से बाग के चेहरे पर दाहिनी ओर बड़ा डिफेक्ट आ गया, उसे ठीक करने के लिए माइक्रोसर्जिकल टिश्यू ट्रांसफर की सर्जरी की गई। क्राउडफंडिंग पोर्टल मिलाप के सह-संस्थापक और अध्यक्ष अनोज विश्वनाथन ने बताया कि इस ऑपरेशन में कुल 72.73 लाख रुपए का खर्च आया जिसे, 8,700 से अधिक लोगों द्वारा मिली क्राउडफंडिंग से इकट्ठा किया गया।
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