159 सांसद, 1193 विधायक चाहते हैं नहीं वापस हो 'नॉनसेंस' अध्‍यादेश!

Manmohan, Rahul
[अजय मोहन] दागी नेताओं को बचाने वाले अध्‍यादेश को लेकर राजधानी दिल्‍ली में सुबह से ही हलचल मची हुई है। एक तरफ कांग्रेस पार्टी के अंदर इस बात को लेकर असमंजस बना हुआ है। राहुल गांधी और सोनिया गांधी की पीएम के साथ मुलाकातों के बाद प्रधानमंत्री और राष्‍ट्रपति के बीच की मुलाकातों का दौर जारी है। चर्चा यह है कि अध्‍यादेश वापस लिया जाये या नहीं? सरकार के सहयोगी व विरोधी दल टीका-टिप्‍पणी में जरा भी पीछे नहीं हट रहे हैं। ऐसे में देश के 159 सांसद और अलग-अलग राज्‍यों की विधानसभाओं में काबिज 1193 विधायक कतई नहीं चाहते हैं कि यह 'नॉनसेंस' अध्‍यादेश वापस हो।

जी हां वही अध्‍यादेश जिसे राहुल ने 'नॉनसेंस' कहा था और आपने उन सांसदों-विधायकों को भी ठीक पहचाना है, जो इसके समर्थन में हैं। ये वो हैं जिन पर आपराधिक मुकदमें चल रहे हैं। कैबिनेट में यह अध्‍यादेश आने पर ये सांसद-विधायक सबसे ज्‍यादा खुश हुए थे, लेकिन जब राहुल गांधी ने गुस्‍सा जाहिर किया, तो उदास हो गये, क्‍योंकि अगर अध्‍यादेश में संशोधन हुए और दागी अपराध सिद्ध होने पर सांसद-विधायकों की कुसी छिनी, या चुनाव लड़ने से रोका गया, तो सबसे पहले तलवार इन्‍हीं नेताओं पर लटकेगी।

सपा ने राहुल के कंधे पर बंदूक रखी

आज पूरे देश की निगाहें यूपीए सरकार के आलाकमान पर है, कि वो इस पर क्‍या स्‍टैंड लेती है। इस संबंध में राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात करने गये प्रधानमंत्री ने इस पर अपना पक्ष रखा है। खैर जो भी फैसला होगा, वह शाम तक देश को बता दिया जायेगा, लेकिन मजेदार बात यह है कि इस अध्‍यादेश की वापसी का सबसे ज्‍यादा विरोध समाजवादी पार्टी कर रही है। सपा को अच्‍छी तरह पता है कि अध्‍यादेश में संशोधन हुआ तो उसकी पार्टी के तमाम नेता मुसीबत में पड़ जायेंगे।

ऐसे में सीधे तौर पर यह बात सपा कह भी नहीं सकती है, इसलिये प्रधानमंत्री की इज्‍जत को ढाल बना कर अपना पैंतरा चल रही है। सपा ने कहा कि अगर यह अध्‍यादेश वापस होता है, तो जनता में यह संदेश जायेगा कि यूपीए में पीएम से ज्‍यादा राहुल की चलती है। सच पूछिए तो इस समय सपा नेता राहुल गांधी के पीछे छिप कर तीर चला रही है।

सबसे ज्‍यादा परेशान यूपी

यह तो रहा अब तक का अपडेट जो दिल्‍ली में चल रहा है। वापस अगर उन विधायकों की चर्चा करें, जो कतई नहीं चाहते हैं कि अध्‍यादेश वापस हो, उनमें सबसे ज्‍यादा 181 विधायक उत्‍तर प्रदेश के हैं, जहां सपा की सरकार है। वहीं आपराधिक मुकदमों से लैस दूसरा सबसे बड़ा राज्‍य महाराष्‍ट्र है, जहां 228 में से 132 विधायकों पर क्रिमिनल केस लगे हुए हैं।

वहीं तीसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल आता है, जहां के 101 विधायकों पर क्रिमिनल केस चल रहे हैं। आंध्र प्रदेश में 74, तमिल नाडु में 77, केरल में 68, गुजरात में 58 और मध्‍य प्रदेश में 57 विधायक दागी हैं। इस अध्‍यादेश से जिस राज्‍य को कतई फर्क नहीं पड़ने वाला है वो है नागालैंड जहां के 56 विधायकों में से एक भी विधायक दागी नहीं है। मेघालय और मणिपुर दोनों में सिर्फ एक-एक विधायक पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

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