Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

बटला हाउस एनकाउंटर के 14 साल, वो कमरे अब भी ख़ाली हैं

बटला हाउस इलाके का फ्लैट नंबर 108
BBC
बटला हाउस इलाके का फ्लैट नंबर 108

14 साल बाद…. बटला हाउस इलाक़े का फ़्लैट नंबर 108.

ये वो फ्लैट है, जहां 19 सितंबर 2008 की सुबह गोलियां चल रही थीं. गोलियों की आवाज़ न सिर्फ़ इस इलाक़े में सुनाई दे रहीं थी बल्कि ख़बर की शक्ल में ये गोलियां हर बड़े न्‍यूज़ चैनल की स्क्रीन पर छाई हुई थीं.

ये फ्लैट दिल्ली में जामिया नगर के बटला हाउस इलाक़े में है. एल-18 बिल्डिंग के इस फ्लैट नंबर 108 में 14 साल पहले जब पुलिस ने दस्तक दी तो दोनों तरफ़ से फ़ायरिंग होने लगी.

इस फ़ायरिंग में इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा और हवलदार बलवंत को गोलियां लगीं. उसी दिन शाम को अस्पताल में इंस्पेक्टर मोहन चंद की मौत हो गई.

वहीं कमरे में मौजूद आतिफ़ अमीन और मोहम्मद साजिद मारे गए जबकि मोहम्मद सैफ़ को गिरफ़्तार कर लिया गया. दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि इनके दो साथी भागने में कामयाब रहे, जिन्हें पुलिस ने बाद में गिरफ़्तार कर लिया.

भागने वालों में आरिफ़ ख़ान और शहज़ाद अहमद शामिल थे. आरिफ़ ख़ान को साल 2021 में दिल्ली की साकेत कोर्ट ने मौत की सज़ा सुनाई थी, वहीं शहज़ाद उम्रक़ैद की सज़ा काट रहे हैं.

पुलिस की इस कार्रवाई को बटला हाउस एनकाउंटर कहा गया. दिल्ली पुलिस का दावा है कि उन्हें 14 साल पहले एल-18 बिल्डिंग में दिल्ली बम धमाकों से जुड़े इंडियन मुजाहिद्दीन के कुछ चरमपंथियों के फ्लैट नंबर 108 में छिपे होने की जानकारी मिली थी.

इसके बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की एक टीम यहां पहुंची थी. 13 सितंबर 2008 को दिल्ली में एक के बाद एक पांच बम धमाके हुए थे. इन धमाकों में 30 लोग मारे गए थे.

मानवाधिकार संगठनों ने इस एनकाउंटर को फ़र्ज़ी बताया था. कोर्ट में न्यायिक जांच की मांग की लेकिन कोर्ट ने ऐसी जांच करने से इनकार कर दिया.

समय के साथ बटला हाउस एनकाउंटर की ख़बरें ज़रूर मीडिया से छंट गई हो लेकिन उसका डर आज भी यहां रह रहे लोगों के दिलों दिमाग़ में बसा हुआ है.

बिल्डिंग
BBC
बिल्डिंग

कोई एनकाउंटर की बात नहीं करता

इस रिपोर्ट में ये जानने की कोशिश की गई है कि इतना लंबा वक़्त बीत जाने के बाद कैसा है वो फ्लैट जहां एनकाउंटर हुआ था, कौन लोग हैं जो उस बिल्डिंग में रहते हैं और घटना के बारे में क्या सोचते हैं. ज़रूरी बात कि एनकाउंटर के बाद बटला हाउस कितना बदल गया है?

बटला हाउस, जामिया मिलिया इस्लामिया मेट्रो स्टेशन से पैदल दस मिनट की दूरी पर है. मेट्रो स्टेशन से ई-रिक्शा पकड़कर आप भीड़ भरे बाज़ार से ट्रैफ़िक की तेज़ आवाज़ें सुनते हुए पांच मिनट में पहुंच सकते हैं. बटला हाउस चौक उतरने पर पास में ही एक मस्जिद है. नाम है ख़लीलुल्लाह मस्जिद.

मस्जिद के बाहर कुछ फलों की रेहड्डियां, कुछ दुकानें और लाइन में खड़े ऑटो सवारियों का इंतज़ार कर रहे हैं. 14 साल पहले एनकाउंटर के दिन दिल्ली पुलिस ने मस्जिद के पास बैरिकेडिंग कर दी थी ताकि कोई भी व्यक्ति मस्जिद के पीछे वाले इलाक़े में न जा पाए.

मस्जिद के पीछे ही वो गली है जहां एल-18 बिल्डिंग में पुलिस ने एनकाउंटर किया था, लेकिन मस्जिद के पास कोई भी इसके बारे में बात नहीं करना चाहता. एक व्यक्ति ने बताया कि कुर्सी पर बैठे बुज़ुर्ग सालों से इस इलाक़े में रह रहे हैं शायद वो कुछ बता पाएं.

बुजुर्ग व्यक्ति से जब बात करनी शुरू की तो पान थूकते हुए उन्होंने कहा कि मैं तो कुछ ही साल पहले यहां आया हूं, मुझे तो कुछ भी नहीं पता. साफ़ था कि वे इस बारे में कोई बात नहीं करना चाहते. ऐसा ही हाल पान की दुकान से लेकर ऑटो चलाने वाले का भी था. कोई कुछ भी बताने को तैयार नहीं.

बटला हाउस
BBC Sport
बटला हाउस

कहां है वो फ़्लैट जहां एनकाउंटर हुआ

मस्जिद से क़रीब पचास क़दम की दूरी पर पीछे की तरफ़ वो गली है, जिसमें एल-18 बिल्डिंग मौजूद है. गली में दोनों तरफ़ चार चार मंज़िल की इमारतें हैं. कुछ बिल्डिंगों में नीचे दुकानें हैं तो कुछ में वाहनों को खड़ा करने के लिए पार्किंग बनी है.

चार मंज़िल की एल-18 बिल्डिंग के दोनों तरफ़ भी इतनी ही ऊंची बिल्डिंग बनी हुई हैं. नीचे गेट के पास एल-18 नाम से एक नेम प्लेट लगी हुई है. बिल्डिंग में दाख़िल होने के लिए एक बड़ा सा लोहे का गेट है जिसके आर-पार आसानी से देखा जा सकता है.

ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग की जगह बनाई गई है जिसमें दो कारें खड़ी हैं, साथ ही एक परिवार भी रहता है. बिल्डिंग में बाईं तरफ़ से ऊपर जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई हैं.

बटला हाउस का मकान
BBC
बटला हाउस का मकान

बरसों से बंद पड़ा है मकान

हर एक मंज़िल पर दो फ्लैट बने हुए हैं. सीढ़ियां चढ़ते हुए मालूम चलता है कि कुछ फ्लैट के बाहर ताला लटका हुआ है. चौथी मंज़िल के लिए सीढ़ियां जहां ख़त्म होती हैं सामने ही फ्लैट नंबर 108 का दरवाज़ा दिखाई देता है.

फ्लैट में बाहर की तरफ़ दो दरवाज़े दिए गए हैं. एक दरवाज़ा सीढ़ियां की तरफ़ खुलता है तो दूसरा दरवाज़ा सामने वाले फ्लैट की तरफ़. इसके बाद सीढ़ियां चढ़ने पर बिल्डिंग की छत दिखाई देती है.

इसी फ्लैट से 19 सितंबर 2008 की सुबह बटला हाउस के लोगों ने गोलियां चलने की आवाज़ सुनी थी, लेकिन आज ये घर धूल से सना हुआ बंद पड़ा है. घर के एक दरवाज़े पर टंगे ताले पर ज़ंग लग चुका है. ऊपर से किसी ने उस पर पेंट कर दिया है, जबकि दूसरा दरवाज़ा अंदर से बंद किया हुआ है.

दरवाज़े के ऊपर एक एसी भी टंगा हुआ है जो सालों से बंद हैं. पास में एक डस्टबिन रखी हुई है.

चौथी मंज़िल पर ही दूसरे फ्लैट में एक परिवार रहता है, जिसकी दीवार पर नया सीएफ़एल बल्ब लगा हुआ है वहीं फ्लैट नंबर 108 के बाहर लगे हुए 100 वॉट के बल्ब को सालों से बदला नहीं गया है. ऐसा बल्ब पूरी बिल्डिंग में कहीं भी देखने को नहीं मिलता, जो इस बात की तरफ़ इशारा करता है कि यहां सालों से कोई रहने नहीं आया.

बटला हाउस इलाके का फ्लैट नंबर 108
BBC
बटला हाउस इलाके का फ्लैट नंबर 108

'ये फ्लैट अंडमान की सेलुलर जेल की तरह है'

फ्लैट नंबर 108 कब से बंद है? ये सवाल जब बिल्डिंग में रहने वाले एक शख़्स से पूछा तो उन्होंने बंद दरवाज़े के पीछे से ही बात करना पंसद किया. जाली लगे दरवाज़े के पीछे खड़े व्यक्ति को देख पाना काफ़ी मुश्किल भरा था, सिर्फ़ आवाज़ ही सुनाई दे रही थी.

एल-18 ब्लिडिंग में रहने वाले शख़्स ने कहा, "एनकाउंटर के बाद से ये घर बंद पड़ा है. ये दरवाज़े कभी नहीं खुलते. ये फ्लैट अंडमान की सेलुलर जेल की तरह है. यहां अब ना कोई आता है, ना रहता है और ना इस बारे कोई बात करता है. ये घर एक बिजली की तरह है इसे कोई टच नहीं करना चाहता. अगर कोई चोर आकर इस घर में घुस जाए तो कोई पूछने वाला तक नहीं है."

दरवाज़े के पीछे अंधेरे में खड़े शख़्स अपनी पहचान ज़ाहिर नहीं करना चाहते. घर की क़ीमत कितनी होगी ? इस सवाल के जवाब में वे कहते हैं. "इसी बिल्डिंग में कोई अपना फ्लैट बेचना चाहता था उन्होंने 45 लाख मांगे थे, कम से कम 40 लाख रुपये तो इसकी क़ीमत होगी, लेकिन इस फ्लैट में कौन ही रहना चाहेगा? ये किसी बंद गली की तरह है. बंद है तो बंद है. ये जिसका घर है उसका सारा पैसा डूब गया."

एनकाउंटर के समय आप कहां थे? इस सवाल का कोई भी व्यक्ति सीधा जवाब नहीं देना चाहता. बस यही कहते हैं कि इस इलाक़े की एक ख़ास तरह से ब्रांडिंग की गई है. शक की नज़र से इस इलाक़े को देखा जाने लगा है. पीछे 14 सालों में चीज़ें काफ़ी बदल गई हैं, अब समय पहले से ज़्यादा मुश्किल भरा हो गया है.

14 साल के बाद भी बिल्डिंग में रह रहे शख्स का डर साफ़ महसूस किया जा सकता है. जामिया टीचर्स सॉलिडेरिटी ग्रुप ने बटला हाउस एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए एक लंबी रिपोर्ट प्रकाशित की है. रिपोर्ट के मुताबिक़ ये फ्लैट मोहसिन निसार का है.

जामिया टीचर्स सॉलिडेरिटी
Getty Images
जामिया टीचर्स सॉलिडेरिटी

'इलाक़े में कोई टैक्सी वाला नहीं आता था'

बिल्डिंग के बाहर एक पड़ोसी मिले, जो एनकाउंटर वाले दिन इसी गली में मौजूद थे. वे कहते हैं, "हमें जो बताना था हमने सब कुछ बता दिया, अब बताने को कुछ नहीं हैं. सब झूठ बोलते हैं, लोगों ने झूठ बोल बोलकर उसे सच बना दिया है. सच की कहीं कोई जगह नहीं हैं."

गली में रह रहे दूसरे कई लोगों से बात करने की कोशिश की तो ज्यादातर लोगों का एक जैसा ही जवाब था, "हम तो कुछ महीने पहले ही यहां आए हैं. हम पहले कहीं और रहते थे. मुझे कुछ नहीं पता. आप किसी और से पूछ लो."

गली से गुज़रते हुए एक व्यक्ति ने बताया, "साल 2008 में एनकाउंटर हुआ उसके कई सालों तक कोई भी टैक्सी इस इलाक़े में नहीं आती थी. रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट से अगर किसी को घर आना होता था तो टैक्सी ड्राइवर बटला हाउस का नाम सुनकर मना कर देते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है. यहां रह रहे लोग उन पुराने दिनों को याद नहीं करना चाहते."

कौन थे जिनका पुलिस ने एनकाउंटर किया

आतिफ़ अमीन

जामिया टीचर्स सॉलिडेरिटी ग्रुप की रिपोर्ट के मुताबिक़ एनकाउंटर के वक़्त आतिफ़ अमीन की उम्र 24 साल थी. आतिफ़ उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ ज़िले में सरायमीर के रहने वाले थे. उस वक़्त वे जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से मानवाधिकार में एमए कर रहे थे.

दो सालों से आतिफ़ दिल्ली में थे. बटला हाउस से पहले वो दिल्ली के जसोला विहार में रहे थे. पुलिस ने एनकाउंटर के बाद आतिफ़ को दिल्ली बम धमाकों का मास्टरमाइंड बताया था.

मोहम्मद साजिद

रिपोर्ट के मुताबिक़ बटला हाउस एनकाउंटर के समय मोहम्मद साजिद की उम्र 17 साल थी. साजिद आज़मगढ़ में संजरपुर के रहने वाले थे. उस वक़्त वे आज़मगढ़ से ही 11वीं की पढ़ाई कर रहे थे.

एनकाउंटर के बाद पुलिस ने कहा था कि मोहम्मद साजिद बम बनाया करता था.

बटला हाउस एनकाउंटर में आतिफ अमीन और साजिद मारे गए थे.

आजमगढ़ में सामाजिक कार्यकर्ता तारीक़ सफ़ीक़ के मुताबिक़ आतिफ़ अमीन के परिवार में उनके पिता की मौत हो चुकी है, बडे भाई दिल्ली में पत्रकार थे उनका भी निधन हो चुका है. घर में अब बात करने वाला कोई नहीं है.

वहीं साजिद के पिता का भी देहांत हो गया है. एक भाई हैं वे मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ नहीं हैं, परिवार में कोई भी बात करने वाला नहीं है.

एनकाउंटर
BBC
एनकाउंटर

आरिज खान, शहजाद अहमद एनकाउंटर के समय फ़रार हो गए थे जिन्हें पुलिस ने बाद में पकड लिया था. आरिज़ ख़ान को साकेत कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी जिसे उन्होंने हाई कोर्ट में चुनौती दी है. वहीं शहजाद अहमद को साकेत कोर्ट ने 2013 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.

सामाजिक कार्यकर्ता तारिक़ सफीक़ के मुताबिक़ बटला हाउस एनकाउंटर में बेटे आरिज़ का नाम आने पर पिता को गहरा सदमा लगा और उनकी मौत हो गई.

वहीं शहजाद के परिवार वाले आजमगढ़ में रहते हैं, परिवार वाले अब उस घटना पर कोई बात नहीं करना चाहते हैं.

वहीं 19 सितंबर 2022 को यूपी में राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल ने बटला हाउस एनकाउंटर में न्यायिक मांग की जांच को लेकर प्रदर्शन किया.

राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल पार्टी के यूपी प्रदेश अध्यक्ष नुरुल हुदा ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "अगर बीजेपी सबका साथ सबका विश्वास की बात करती तो उन्हें कम से बटला हाउस एनकाउंटर केस में न्यायिक जांच करवानी चाहिए. हम 14 साल से मांग कर रहे हैं."

"हम कई बार दिल्ली ट्रेन भरकर जा चुके हैं, जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर चुके हैं, हमने 2016 में राजनाथ सिंह से भी मुलाकात की, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है. आज़मगढ़ पर जो कलंक लगा है वो सिर्फ न्यायिक जांच से ही धुल सकता है."

दूसरी तरफ़ एनकाउंटर में मारे गए मोहन चंद शर्मा की पत्नि माया शर्मा से फ़ोन पर कई बार बात करने की कोशिश करने के बाद भी उनसे संपर्क नहीं हो सका.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+