12 साल बाद भाईचारे के लिए साथ आए गुजरात दंगा के पीड़ित और आरोपी

गुजरात दंगों के बाद जो दो तस्वीरें लोगों के जेहन में सबसे देर तक रहीं, वे इन्हीं की थीं। पहली तस्वीर दंगा प्रभावित नरोडा पाटिया में ली गई। जिसमें कुतुबुद्दीन खून से सनी कमीज पहने दोनों हाथ जोड़े दया की भीख मांगता दिख रहा है तो वहीं दूसरी तस्वीर है दूधेश्वर में मारकाट का जश्न मनाते शाहपुर के अशोक भावनभाई परमार की, जिसके चेहरे पर काली दाढ़ी है, मस्तक पर भगवा रिबन है और हाथ में लोहे की एक रॉड है।
Did You Know: गुजरात दंगे में पुलिस ने चलाई थी 10000 राउंड गोलियां
दंगे के 12 साल बाद केरल के कन्नूर जिले के थालीपरम्बा में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे के लिए ये दोनों लोग सीपीएम की एक सेमिनार के मंच पर पहुंचे। सेमिनार का विषय था नरसंहार का एक दशक। दोनों मंच पर गले गले और बताया कि 28 फरवरी 2002 की तारीख से वे अब कितना दूर निकल आए हैं। जहां अशोक ने मुसलमानों से माफी मांगी।
एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक इन दोनों को साथ लाने के पीछे पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता कलीम सिद्दीकी का हाथ था। इस भाईचारे के सेमिनार में अशोक भावनभाई ने कुतुबुद्दीन और पूरे मुस्लिम समुदाय से 2002 की घटना के लिए माफी मांगी।
Did You Know: गुजरात दंगे में दंगों को रोकने के लिए पुलिस ने लगभग 10000 राउंड गोलियां चलायीं थी। जिनमें जिनमें 13 मुसलमानों और 77 हिन्दुओं की मौत हुई।












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