104 साल के फ्रीडम फाइटर एचएस डोरेस्वामी का निधन, कुछ हफ्ते पहले ही कोरोना को दी थी मात
बेंगलुरु, मई 26। फ्रीडम फाइटर और समाजसेवी एचएस डोरेस्वामी का बुधवार को उनके आवास पर निधन हो गया। बताया जा रहा है कि उनका निधन कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुआ है। एचएस डोरेस्वामी ने कुछ हफ्ते पहले ही कोरोना को मात दी थी। आपको बता दें कि डोरेस्वामी मई के पहले हफ्ते में कोरोना संक्रमित हुए थे, जिसके बाद उन्हें बेंगलुरु के श्री जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवस्कुलर साइंसेज एंड रिसर्च (SJICSR) में भर्ती कराया गया था। एक हफ्ते के बाद ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी, लेकिन रिकवर होने के बाद से ही वो स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे थे। उन्हें फिर से अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन बुधवार को उनकी मौत हो गई।

करीबी ने बताया, उनके अंदर अभी भी कोविड के लक्षण थे
डोरेस्वामी के एक करीबी रविकृष्ण रेड्डी ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए बताया कि वह पिछले 12 दिनों से अस्पताल में थे। उनमें अभी भी कोविड के थोड़े-थोड़े लक्षण थे। हालांकि उनका ऑक्सीजन लेवल हमेशा 92 और 97 के बीच बना रहता था। रविकृष्ण रेड्डी ने बताया कि डोरेस्वामी ने मंगलवार तक खाना भी खाया, लेकिन आज सुबह उन्हें अचानक तेज दर्द उठा, जिसके बाद उन्हें ICU में शिफ्ट किया गया, लेकिन दोपहर 1.20 बजे उनका निधन हो गया। उनके निधन की जानकारी अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ मंजूनाथ ने दी है।
डोरेस्वामी ने पांच साल की उम्र में ही खो दिया था माता-पिता को
आपको बता दें कि एचएस डोरेस्वामी का जन्म 10 अप्रैल, 1918 को मैसूर के तत्कालीन राज्य हरोहली में हुआ था। पांच साल की उम्र में उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया था। तब से उन्हें उनके दादाजी ने पाला। वह कम उम्र में ही स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हो गए। पोस्टबॉक्स में छोटे पैमाने पर समय बम लगाने और ब्रिटिश सरकार के अधिकारियों के रिकॉर्ड वाले कमरे में दस्तावेजों को जलाने समेत ब्रिटिश शासन के खिलाफ मैसूर राज्य में विरोध प्रदर्शन और आम हड़तालों का आयोजन तक उन्होंने किया। उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन सहित कई स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया। वह 1943 से 1944 तक 14 महीने जेल में रहे।












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