मिले-जुले हैं मोदी सरकार के 100 दिन

नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इन दिनों जापान की यात्रा पर हैंऔर उनकी सरकार अपने 100 दिन पूरा करने पर अपनी उपलब्धियों सामने ला रही है। बेशक, उसका प्रदर्शन खराब नहीं माना जा सकता। पर उसे भी लंबा सफर तय करना है।

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जनता संतुष्ट

हालांकि समाचार पत्रों ने सर्वेक्षण जारी किया है उसमें लोगों ने 100 दिन के काम से संतुष्टि जाहिर की है। इस सर्वेक्षण को जन धारण मान लिया जाए तो फिर कहना होगा कि अभी मोदी को लेकर पैदा हुआ आकर्षण कायम है और लोगों का विश्वास उन पर है।

विदेशी नीति का मोर्चा

विदेशी नीति के मोर्चे पर मोदी ने अपनी भारतीय या दूसरे शब्दों में राष्ट्रीयता के दर्शन का जो विस्तार किया है वह एक नई धारा की शुरुआत है। भूटान, नेपाल, ब्रिक्स सम्मेलन में ब्राजिल तथा जापान चारों जगह मोदी ने अपनी एवं भारत की गहरी छाप छोड़ी है, ठोस प्राप्तियां भी झोली में डालीं हैं।

उसका निकट एवं दूरगामी लाभ देश को मिलेगा। मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों को औपचारिक वार्ताओं एवं समझौतों तक सीमित रहने की परिधित से बाहर निकालकर उसे सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक आयाम तक ले जाकर संवेदना का धरातल प्रदान किया है।

जब पाकिस्तान ने हुर्रियत नेताओं से बातचीत न करने का अनुरोध अस्वीकार कर दिया विदेश सचिव स्तर की बातचीत रद्द करके एक दृढ़ देश की छवि पेश की है। यह सब विदेश नीति में ऐसी शुरुआत है जिसका दुनिया पर असर पड़ रहा है।

भ्रष्टाचार पर चोट

भ्रष्टाचार के मामले में भी सरकार ने कई कदम उठाए हैं। मंत्रियों से अपने निजी स्टाफ के रूप में परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों को काम देने से रोका है।

मंत्रियों, सांसदों के अलावा चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को छोड़कर सभी सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और उनके परिवार वालों के लिए हर साल जुलाई में अपनी संपत्तियों की घोषणा करना जरूरी कर दिया गया है।

अपनी पहली कैबिनेट बैठक में कालाधन पर विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया। एसआईटी ने उच्चतम न्यायालय को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिस पर न्यायालय ने कहा है कि वह रिपोर्ट से संतुष्ट है।

इस बीच, आर्थिक मोर्चे पर पहली तिमाही के विकास दर के 5.7 प्रतिशत आंकड़े को हम पूरी तरह मोदी सरकार की देन नहीं मान सकते, पर इससे विकास की गाड़ी के गति पकड़ने का संकेत तो मान ही सकते हैं। हालांकि आर्थिक विकास के लिए कम से कम एक वर्ष का समय सरकार को देना होगा।

महंगाई

महंगाई चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा था। सबसे ज्यादा आलोचना सरकार की इसी मुद्दे पर हो रही है। आरंभ के एक महीने मंे सबसे ज्यादा कदम महंगाई के मोर्चे पर उठाए गए।

वर्तमान आंकड़ों के अनुसार थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुख्य महंगाई दर जुलाई 2014 में घटकर 5.19 फीसदी पर आ गई। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक भी अप्रैल के 8.6 फीसदी से घटकर जुलाई 2014 में 7.96 फीसदी के स्तर पर आया है। तो आंकड़ों में गिरावट जारी है, पर महंगाई पर संतोषजनक स्थिति नहीं है।

हां, पेट्रोल के दाम लगातार घटे हैं। पर सरकार को इस क्षेत्र में राज्यों के साथ मिलकर काफी कुछ करना होगा, क्योंकि अंततः महंगाई राज्यों का विषय है। वरिष्ठ पत्रकार और लेखक अवधेश कुमार मानते हैं कि मोदी सरकार पूर्व यूपीए सरकार से यह बेहतर नजर आ रही है।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि मोदी सरकार ने 100 दिन में निराश नहीं किया, बेहतर करने और होने की उम्मीदें बनाए रखीं हैं।

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