जानिए 'धरती पुत्र' मुलायम सिंह यादव के बारें 10 खास बातें
सैफई। पूरे देश में समाजवाद का नारा बुंलद करने वाले और पिछड़ी जाती के रहनुमा कहे जाने वाले सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव 22 नवंबर को 77 वर्ष के हो जायेंगे। यूपी के सैफई से दिल्ली की संसद तक पहुंचने वाले मुलायम सिंह यादव ने एक अलग तरह की राजनीति को जन्म दिया जिसके चलते वो यूपी के तीन बार सीएम बने और इस समय भी यूपी में उन्हीं की सरकार है जिसकी राजगद्दी उन्होंने अपने बेटे अखिलेश यादव को सौंप दी है।
आईये जानते हैं राजनीकि पुरोधा मुलायम सिंह यादव के बारे में कुछ खास बातें..
- 22 नवम्बर 1939 को इटावा जिले के सैफई गाँव में जन्में मुलायम सिंह यादव को राजनीति से पहले पहलवानी का शौक था।
- राजनीति में आने से पहले मुलायम सिंह इन्टर कालेज में अध्यापक थे।
- मुलायम सिंह ने आगरा विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर (एम०ए०) एव जैन इन्टर कालेज करहल (मैनपुरी) से बीटी किया है।
- मुलायम सिंह 1967 में पहली बार विधान सभा के सदस्य चुने गये थे।
- साल 1992में उन्होंने समाजवाद का नारा बुलंद किया और सपा पार्टी बनायी।
- मुलायम सिंह के बारे में और बातें जानने के लिए नीचे की स्लाइडों पर क्लिक कीजिये...
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गठबंधन की राजनीति के जनक
मुलायम सिंह यादव को गठबंधन की राजनीति के जनक कहा जाता है, इन्होंने पहली बार बसपा-सपा के गठजोड़ से यूपी में सरकार बनायी और खुद सीएम बने।

लता मंगेशकर
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव स्वर कोकिला लता मंगेशकर की आवाज के मुरीद हैं।

पिछड़ों के रहनुमा
देश में जब ठाकुर-पंडित की राजनीती होती थी ऐसे में मुलायम ने यादव सहित सभी पिछड़ी जातियों को एक करके उन्हें पहचान दिलाने का काम किया।

'धरती पुत्र'
'धरती पुत्र' उपनाम से मशहूर मुलायम सिंह ने गुरु नत्थूसिंह को मैनपुरी में आयोजित एक कुश्ती-प्रतियोगिता में प्रभावित करने के पश्चात नत्थूसिंह के परम्परागत विधान सभा क्षेत्र जसवन्त नगर से हीअपना राजनीतिक सफर शुरू किया।

मंडेला से प्रभावित
मुलायम सिंह यादव की अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला से साल 1990 में वाराणसी के बाबतपुर हवाई अड्डे पर मुलाकात हुई थी। मुलायम मंडेला से काफी प्रभावित थे।

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