'भीमा-कोरेगांव' सालगिरह पर भड़की हिंसा, 1 की मौत, सीएम ने कहा-न्यायिक जांच की करेंगे अपील
पुणे। पुणे जिले में भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं सालगिरह पर आयोजित एक कार्यक्रम में दो गुटों के बीच हिंसा भड़क गई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई है और कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। इस दौरान काफी पथराव भी हुआ जिसके कारण आर्थिक क्षति भी हुई है। गौरतलब है कि आज से करीब 200 साल पहले हुई भीमा-कोरेगांव की लड़ाई में ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना ने पेशवा की सेना को पराजित किया था, इस जीत का जश्न दलित नेता मनाते हैं क्योंकि इतिहास के मुताबिक ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से महार समुदाय के सैनिकों ने युद्द लड़ा था क्योंकि वो उस वक्त वे अछूत माने जाते थे, उन्हें समाज में काफी तिरस्कार भरी नजरों से देखा जाता था, हालांकि इस कार्यक्रम का विरोध दक्षिणपंथी समूहों की ओर से किया जाता रहा है, उन्हें 'ब्रिटिश जीत' के जश्न पर आपत्ति है।

क्यों हुआ बवाल
पुलिस के मुताबिक स्थानीय समूह और भीड़ के कुछ सदस्यों के बीच स्मारक की ओर जाने के दौरान किसी मुद्दे पर बहस हुई, इसके बाद पथराव शुरू हो गया और देखते ही देखते हिंसा भड़क गई। गुस्साये लोगों ने जमकर तोड़-फोड़ की, जिसे कंट्रोल करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। इसी दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई है, हालांकि, उसकी पहचान नहीं हो पाई है, घायलों में कुछ की हालत काफी गंभीर बताई जा रही है।
सीएम देवेंद्र फडणवीस ने न्यायिक जांच के आदेश दिए
इस मामले में सीएम देवेंद्र फडणवीस ने न्यायिक जांच की अपील की बात कही है, उन्होंने कहा है कि भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं सालगिरह पर करीब तीन लाख लोग आए थे, हमने पुलिस की 6 कंपनियां तैनात की थी, कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने के लिए हिंसा फैलाई है, इस तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मृतक के परिवार वालों को 10 लाख के मुआवजा दिया जाएगा, युवा की मौत मामले में सीआईडी जांच करेगी।
प्रशासन ने सही ढंग से इसकी तैयारी नहीं की थी: पवार
तो वहीं दलितों पर हुई हिंसा पर शरद पवार ने कहा, लोग वहां 200 साल से जा रहे हैं, ऐसा कभी नहीं हुआ, इस मामले में ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, प्रशासन ने सही ढंग से इसकी तैयारी नहीं की थी इसलिए इस तरह की घटना हुई।












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