भारतीय टीम ने जिस मैदान पर खेला था पहला टेस्ट उस ग्राउंड पर आज तक दोबारा नहीं हुआ कोई टेस्ट मैच
बॉम्बे के जिमखाना ग्राउंड पर भारत ने पहले टेस्ट मैच खेला था। यह टेस्ट मैच 15 दिसंबर 1933 को खेला गया था और यह मैच इंग्लैंड के खिलाफ हुआ था। उसके बाद दोबारा उस मैदान पर कभी टेस्ट मैच नहीं हुए।

ये अजीब इत्तेफाक है कि भारत के जिस मैदान पर पहला टेस्ट मैच खेला गया उस पर दोबारा फिर कोई टेस्ट नहीं हुआ। भारत ने इस टेस्ट मैच में इतिहास रचा था। उस समय यहां अंग्रेजी हुकूमत थी। भारत पराधीन था लेकिन उसने शासक इंग्लैंड के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया था। लाला अमरनाथ ने इस टेस्ट मैच को यादगार बना दिया था। टेस्ट शतक मारने वाले वे पहले भारतीय बने थे।
बॉम्बे जिमखाना ग्राउंड
15 दिसम्बर 1933, बॉम्बे जिमखाना ग्राउंड। भारत की जमीन पर पहला टेस्ट मैच खेला जा रहा था। डगलस जार्डिन की कप्तानी में इंग्लैंड की टीम भारत के दौरे पर आयी थी। भारतीय टीम के कप्तान कर्नल सीके नायडू थे। इस मैच को हुए 90 साल हो गये। आज के क्रिकेट प्रशंसकों के लिए यह जानना दिलचस्प होगा कि भारत में खेले गये पहले टेस्ट मैच का प्लेइंग इलेवन क्या था। भारत ने पहले बैटिंग शुरू की। सैयद वजीर अली और जनार्दन नावले पारी शुरू करने के लिए मैदान पर उतरे। पहला विकेट 44 पर गिरा। जनार्दन 13 रन बना कर हेडली वेरिटी का शिकार बने। भारत की तरफ से लाला अमरनाथ ने 38 रनों का सर्वाधिक स्कोर बनाया। कप्तान सीके नायडू ने 28 रनों का योगदान दिया। सैयद वजीर अली ने 36, सोराबजी कोह ने 31, विजय मर्चेंट ने 23, लक्ष्मीदास ने 19, लाधा रामजी ने 1 और रुस्तमजी जमशेदजी ने 4 रन बनाये। भारतीय टीम ने 219 रनों का स्कोर खड़ा किया।
इंग्लैंड की पारी
इसके जवाब में इंग्लैंड ने जोरदार बल्लेबाजी की। उसने 438 रनों का विशाल स्कोर बनाया। ब्रायन वेलेंटाइन ने 138 रनों की पारी खेली। सी वालटर्स ने 78 और कप्तान डगलस जार्डिन ने 60 रन बनाये। उस समय भारत-पाकिस्तान एक था। यह एक दिलचस्प तथ्य है कि आज से 90 साल पहले भारत के पास जेनुइन फास्ट बॉलर की जोड़ी थी। अमर सिंह और मोहम्मद निसार उस समय दुनिया के श्रेष्ठ तेज गेंदबाजों में शुमार थे। मोहम्मद निसार ने इस मैच में 90 रन देकर 5 विकेट लिये थे। अमर सिंह को केवल एक विकेट ही मिल पाया था। 3 विकेट रुस्तमजी को मिले थे। भारत की दूसरी पारी में केवल लाला अमरनाथ और कप्तान सीके नायडू ही जम कर बल्लेबाजी कर सके। इनके अलावा कोई और दमखम नहीं दिखा सका।
लाला अमरनाथ का शतक
इंग्लैंड के बड़े स्कोर के दबाव में भारत की दूसरी पारी बिखर गयी। 21 रन पर ही दो विकेट गिर गये। अब पारी को संभालने की जिम्मेदारी लाला अमरनाथ और कप्तान सीके नायडू पर आ गयी। दोनों संभल कर खेलने लगे और पारी जमायी। इनके बीच 186 रनों की साझेदारी हो चुकी थी कि सीके नायडू को स्टैन निकोलस ने आउट कर दिया। उन्होंने 67 रनों का योगदान दिया। लाला अमरनाथ ने धैर्यपूर्वक बल्लेबाजी की और 118 रनों की पारी खेली। उन्हें नोबी क्लार्क ने आउट किया। इसके बाद विजय मर्चेंट ने 30 रन बनाये। इनके अलावा बाकी बल्लेबाज असफल रहे। लाला अमरनाथ के शतक के बावजूद भारत सिर्फ 258 रन ही बना सका।
एक शतक से राजा को प्रजा का जवाब
माना जाता है कि लाला अमरनाथ की यह शतकीय पारी किसी भी भारतीय द्वारा खेली गयी सर्वश्रेष्ठ पारियों में एक है। इस शतक का महत्व आज के किसी शतक से कहीं बहुत ज्यादा है। वह इसलिए क्यों कि एक भारतीय ने अंग्रेजों का खेल के मैदान में डट कर सामना किया था। इस शतक को प्रजा की तरफ से राजा को दिया गया मुंहतोड़ जवाब माना जाता है। अंग्रेज भारतीयों को दोयम दर्जे का नागरिक समझते थे। अनगिनत जुल्म ढाते थे। ऐसे में लाला अमरनाथ का यह शतक लगा कर उन्हें करारा जवाब दिया था। इंग्लैंड 9 विकेट से जरूर यह टेस्ट मैच जीत गया लेकिन इस शतक ने भारतीय लोगों का आत्मसम्मान बढ़ा दिया।
जहां पहला टेस्ट हुआ वह अंतिम साबित हुआ
बॉम्बे जिमखाना ग्राउंड पर किसी भारतीय ने पहला टेस्ट शतक लगाया था। इस मायने से यह भारत के लिए खास मैदान था। लाल अमरनाथ ने इस मैदान पर पहला टेस्ट मैच खेला था। उन्होंने अपने डेब्यू टेस्ट में 38 और 118 रनों की शानदारी पारी खेली थी। उस समय के हिसाब से दर्शकों की संख्या भी रिकॉर्डतोड़ थी। करीब 50 हजार दर्शक ये मैच देखने आये थे। टिकट के दाम भी पांच गुना बढ़ा दिये थे। इसके बावजूद इतनी बड़ी भीड़ जुटी थी। चूंकि भारत में पहली बार किसी टेस्ट मैच का आयोजन हो रहा था इसलिए इसे देखने के लिए दर्शकों का रेला उमड़ पड़ा। लेकिन हैरानी की बात ये हैं कि इतनी खूबियों के बाद भी इस मैदान पर दोबारा टेस्ट मैच नहीं खेला गया।












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