क्या होता है हेल्दी-पोर्न, विशेषज्ञों ने बताया

ऑस्ट्रेलिया की सिडनी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों के नेतृत्व में किए गए एक शोध में पोर्नोग्राफी के आकलन का एक पैमाना तैयार किया गया है जिसका मकसद शिक्षकों और अभिभावकों की मदद करना है ताकि वे बच्चों को उचित यौन शिक्षा दे सकें.
विशेषज्ञों की जिस टीम ने यह पैमाना तैयार किया है उसमें किशोर स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञ, यौन शिक्षक और पोर्नोग्राफी पर रिसर्च करने वाले शोधकर्ता शामिल थे. यह टीम बच्चों और किशोरों के स्वस्थ यौन विकास के लिए अध्ययन कर रही थी.
कैसे पता चलेगा?
अपने अध्ययन में टीम ने पाया कि स्वस्थ पोर्नोग्राफी में ये मुख्य तत्व होते हैं- पर्दे पर सहमति के लिए बातचीत दिखाई जाए, सुरक्षित सेक्स दिखाया जाए. निर्माण कार्य पूरी तरह नैतिक हो, विभिन्न यौन अभ्यास दिखाए जाएं और कलाकारों में शारीरिक, लैंगिक और नस्लीय विविधता हो.
पिछले 30 साल से पोर्नोग्राफी को लेकर अध्ययन और शोध करने रहे प्रोफेसर ऐलन मैकी ने इस शोध का नेतृत्व किया. वह बताते हैं, "मैंने यह प्रोजेक्ट तब शुरू किया जब सिडनी में एक हाई स्कूल स्टूडेंट के अभिभावक ने मुझसे पूछा कि हेल्दी पोर्नोग्राफी क्या हो सकती है, जिसे वे अपने वयस्क हो रहे बेटों को दिखा सकें. तब हमें अहसास हुआ कि ऐसी कोई मार्गदर्शिका नहीं है जो सचेत उपभोक्ताओं के काम आ सके. तब हमने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की टीम बनाई और इस पर काम शुरू किया."
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इस अध्ययन के निष्कर्ष इंटरनेशनल जर्नल ऑफ सेक्शुअल हेल्थ में प्रकाशित हुए हैं, जो वर्ल्ड एसोसिएशन फॉर सेक्शुअल हेल्थ की आधिकारिक पत्रिका है. हाल ही में अमेरिका की कर्टिन यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों का एक अध्ययन प्रकाशित हुआ था जिसमें बताया गया था कि 90 फीसदी माता-पिता यौन संबंधों और सामाजिक रिश्तों को लेकर ज्यादा शिक्षा की उपलब्धता चाहते हैं. वे चाहते हैं कि बच्चों को पोर्नोग्राफी आदि विषयों पर सातवीं या आठवीं कक्षा से ही पढ़ाया जाना चाहिए.
किसके काम आएगा?
ताजा अध्ययन में विशेषज्ञों ने माना है कि यह एक बेहद संवेदनशील विषय है और वे स्पष्ट तौर पर कहते हैं कि उनके निष्कर्षों से यह नहीं समझा जाना चाहिए कि वे 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को पोर्नोग्राफी से संपर्क में लाने की सिफारिश कर रहे हैं. इस अध्ययन में 18 से 25 वर्ष की आयु तक के लोगों पर ध्यान केंद्रित किया गया है.
लेकिन उन्होंने ऑस्ट्रेलियन इंस्टिट्यूट ऑफ फैमिली स्ट्डीज के अध्ययन के नतीजों को भी ध्यान में रखा है, जिनके मुताबिक 9-16 वर्ष की आयु के 44 फीसदी बच्चों का वास्ता इंटरनेट के जरिए सेक्स संबंधी सामग्री से पड़ता है, इसलिए यौन शिक्षा संबंधी सहमति की आयु पर दोबारा विचार किए जाने की जरूरत है.
शोधकर्ताओं ने यौन शिक्षा में मदद के लिए एक फैक्टशीट और एक लेसन प्लान भी तैयार किया है जो 18 वर्ष से ऊपर के लोगों को पढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है. माता-पिता भी इन संसाधनों का इस्तेमाल यह जानने के लिए कर सकते हैं कि उनके बच्चों को किस तरह की शिक्षा मिलनी चाहिए.
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Source: DW
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