तेलंगाना पुलिस ने 191 बच्चों को बाल मजदूरी से कराया मुक्त
हैदराबाद, 01 अगस्त। सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी बाल मजदूरी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। तेलंगाना पुलिस ने जुलाई माह में बड़ी संख्या में बाल मजदूरी में लगे बच्चों को रेस्क्यू किया है। एक सब इंस्पेक्टर और चार कॉन्स्टेबल की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट व एसएचई की टीम के सदस्यों की टीम ने मिलकर इस ऑपरेशन को चलाया। कुल 8 टीमों का गठन 9 डिवीजन के लिए तैयार की गई थी। इन टीमों को राचाकोंडा पुलिस कमिश्नर ने तैयार किया था। इन टीमों ने कुल 191 बच्चों को रेस्क्यू किया है जिसमे 95 लड़के और 10 लड़कियां तेलंगाना की हैं। जबकि 73 लड़के और 13 लड़कियां देश के अलग-अलग राज्यों की हैं।

बता दें कि इससे पहले हरियाणा में भी बाल मजदूरी में शामिल बच्चों को रेस्क्यू किया गया। कुल 16 बच्चों को रेस्क्यू किया गया था। इन बच्चों की काउंसलिंग की गई, जिसके बाद पता चला कि आखिर कौन इनसे बाल मजदूरी करा रहा था। बच्चों की काउंसलिंग के आधार पर 12 आरोपियों के खिलाफ बाल मजदूरी के तहत केस दर्ज कराया गया है। साथ ही निर्देश दिया गया हैकि अगर कोई भी बाल मजदूरी करवाता है तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। बाल कल्याण समिति के चेयरमैन उमेश चानना ने बताया कि बाल मजदूरी कराना कानूनी अपराध है। ऐसे में अगर कोई ऐसा करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। अगर किसी को भी ऐसी जानकारी है तो वह पुलिस को इस संबंध में जानकारी दे सकता है।
वहीं मध्य प्रदेश में बाल मजदूरी को रोकने के लिए लगातार कोशिश की जा रही है। बाल श्रमिकों को मुख्य धारा से जोड़ा जा रहा है। इस साल 2237 बच्चों को मुख्य धारा से जोड़ा जा चुका है। जबकि पिछले साल 29179 बच्चों का पुनर्वसन किया गया था। मध्य प्रदेश के डिप्टी लेबर कमिश्नर एलपी पाठक ने कहा कि बच्चों को श्रम से मुक्त कराकर उन्हें चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सामने पेश किया जाता है, जहां कमेटी के निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जाती है।












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