तेलंगाना: मिशन काकतीय व भागीरथ योजना ने लाई रंग, भूजल निकासी में आई कमी
भूजल स्तर को बनाए रखने को लेकर तेलंगाना सरकार का प्रयास रंग ला रही है। यही वजह है कि प्रदेश में पिछले वर्षों के मुकाबले में भूजल निकासी में कमी आई है।

भूजल को बचाए रखने को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। इसी बीच तेलंगाना सरकार को भूजल को बचाए रखने के लिए किए जा रहे प्रयासों की वजह से बड़ी सफलता मिली है। जानकारी के मुताबिक तेलंगाना की प्रमुख लिफ्ट सिंचाई योजनाओं, मिशन भागीरथ और मिशन काकतीय ने पिछले पांच वर्षों में तेलंगाना में पानी के स्तर को बदल दिया है। यही वजह है कि वार्षिक भूजल निष्कर्षण 2017 में 8.09 बीसीएम (बिलियन क्यूबिक मीटर) से घटकर 2022 में 8 बीसीएम हो गया है। जबकि इसी अवधि के दौरान भूजल निष्कर्षण का चरण 65.45 प्रतिशत से घटकर 41.6 प्रतिशत हो गया है।
आपको बता दें कि किसी क्षेत्र में भूजल संसाधनों की उपलब्धता वर्षा के समय, भूवैज्ञानिक स्तर, मौजूदा पुनर्भरण संरचनाओं की संख्या, औद्योगिक अनुप्रयोगों, पीने/घरेलू उद्देश्यों, सिंचाई आदि जैसे विभिन्न उद्देश्यों के लिए उपभोक्ताओं द्वारा निकासी सहित कई कारकों पर निर्भर करती है। हालांकि, भूजल संसाधनों की वृद्धि या कमी विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग होती है।
वहीं, तेलंगाना में लिफ्ट सिंचाई योजनाओं और मिशन भागीरथ के सफल कार्यान्वयन के कारण, सिंचाई और पेयजल प्रयोजनों के लिए सतही जल आपूर्ति में काफी वृद्धि हुई है। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में भूजल के उपयोग में काफी कमी आई है। अधिकारियों के मुताबिक पारंपरिक टैंकों के कायाकल्प के लिए मिशन काकतीय के कार्यान्वयन ने भी राज्य में भूजल स्तर को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इस साल नवंबर में तेलंगाना में औसत भूजल स्तर पिछले साल नवंबर में 4.97 एमबीजीएल के मुकाबले 4.5 एमबीजीएल (जमीनी स्तर से मीटर नीचे) है। 22 जिलों में औसत जल स्तर 5 एमबीजीएल से नीचे है और शेष 11 जिलों में यह 5-10 एमबीजीएल के बीच है।
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