तेलंगाना मुद्दा : नायडू दिल्ली में अनशन पर, सीमांध्र में उबाल

उन्होंने कांग्रेस पर तेलंगाना मसले को लेकर राजनीति खेलने का आरोप लगाया। नायडू ने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि वह पृथक तेलंगाना के पक्ष में हैं या संयुक्त आंध्र प्रदेश के पक्ष में। उन्होंने सिर्फ यह कहा, "हम दोनों क्षेत्रों के लोगों के लिए न्याय चाहते हैं।" यह पूछे जाने पर कि उनकी पार्टी किस तरफ है, नायडू सीधा जवाब देने से कतरा गए और प्रतिप्रश्न किया, "यदि आपके पास दो बच्चे हैं तो आप किसे चुनेंगे?" नायडू ने कांग्रेस पर लोगों को बांटने का आरोप लगाया। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने यहां संवाददाताओं से कहा, "कांग्रेस पार्टी पूरी तरह राजनीति खेल रही है। उन्हें आम आदमी की पीड़ाओं का ख्याल नहीं है। वे अधिकतम वोट जुटाना चाहते हैं।"
नायडू ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने इस निर्णय पर अन्य पार्टियों से चर्चा नहीं की। उन्होंने सवाल किया, "वे सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं बुला रहे हैं? एक राज्य का गठन क्या कांग्रेस का आंतरिक निर्णय है?" नायडू ने कहा, "लोकतंत्र का मतलब है कि अगर कोई समस्या है तो उस पर बहस, बातचीत होनी चाहिए और अंततोगत्वा उसका कोई समाधान तो निकालना ही होता है।" उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश के लोगों का राजनीतिक व्यवस्था से विश्वास उठ रहा है। नायडू ने कहा, "सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी यह सब भूल गई है। वे कोई समाधान नहीं ढूंढ रहे। दूसरी तरफ वे समस्या खड़ी कर रहे हैं।" यहां आंध्र भवन में नायडू का उपवास ऐसे समय में शुरू हुआ है, जब वाईएसआर कांग्रेस के नेता वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी संयुक्त आंध्र प्रदेश की मांग को लेकर हैदराबाद में बेमियादी अनशन पर हैं।
आंध्र प्रदेश के लोगों की तेलंगाना मुद्दे पर अलग अलग राय है, 2014 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए यह फिलहाल एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है। जिसमें सभी दल सीटें जीतने की खींचतान में लगे हुए है।












Click it and Unblock the Notifications