तेलंगाना: FRBM कर्ज दिलाने के लिए केसीआर ने दिल्ली में डाला डेरा
हैदराबाद, 29 जुलाई। तेलंगाना के लंबित मामलों के समाधान के लिए मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की मानसून संसद सत्र के दौरान दिल्ली में रहने की योजना रंग ला रही है। हालांकि एफआरबीएफ एक्ट के तहत उधार लेने की सीमा की मुख्य चिंता अभी बनी हुई है। एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि तेलंगाना को एफआरबीएफ के तहत कर्ज का आंकड़ा अभी स्पष्ट नहीं है।

सीएम केसीआर ने गुरुवार को लगातार तीसरे दिन दिल्ली में टीआरएस सांसदों के साथ एक और समीक्षा बैठक की। पार्टी सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री का मुख्य फोकस एफआरबीएम की स्वस्थ सीमा सुनिश्चित करना था। राज्य सरकार के अधिकारी एफआरबीएम ऋणों को लेकर वित्त मंत्रालय के लगातार संपर्क में हैं।
राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष बी विनोद कुमार ने कहा "तेलंगाना को लेकर वित्त मंत्रालय के अधिकारी जो स्पष्टीकरण मांग रहे हैं, हमारे अधिकारी उनके सभी सवालों का जवाब दे रहे हैं। राज्य सरकार ने वित्त मंत्रालय से अनुरोध किया है कि एफआरबीएम ऋणों पर उनकी शर्तों को पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू किया जाए न कि पूर्वव्यापी प्रभाव से।
राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 53,000 करोड़ रुपये का कर्ज जुटाने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, वित्त मंत्री टी हरीश राव ने हाल ही में कहा था कि केंद्र ने कर्ज सीमा में 19,000 करोड़ रुपये की कटौती की है। वहीं अधिकारियों के मुताबिक "हालांकि FRBM सीमा पर अभी भी कोई स्पष्टता नहीं है। एफआरबीएम ऋणों की मात्रा पर स्पष्टता के बिना, साल के लिए योजना विफल हो जाएगी।"
इस बीच सीएम केसीआर ने पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (आरईसी) के लंबित ऋणों की भी समीक्षा की। इन संस्थाओं से राज्य को प्रस्तावित ऋण का 80 प्रतिशत प्राप्त हुआ। स्वीकृत राशि का मात्र 20 प्रतिशत ही लम्बित है।












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