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Himachal: हिमाचल प्रदेश में बनेगी देश की पहली झील के नीचे सुरंग, क्या है गोबिंद सागर झील प्रोजेक्ट?

Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश सरकार गोबिंद सागर झील में देश की पहली पानी के नीचे सुरंग बनाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इस सुरंग का उद्देश्य बिलासपुर शहर को किरातपुर-मनाली चार लेन सड़क से जोड़ना है। यह परियोजना राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास और आर्थिक गतिविधियों को गति देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकती है। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धरमानी ने सोमवार को इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जानकारी देते हुए इसके संभावित लाभों को रेखांकित किया।

लूहणू मैदान से चार लेन सड़क तक सीधा लिंक

प्रस्तावित सुरंग बिलासपुर के लूहणू मैदान को किरातपुर-मनाली चार लेन सड़क से जोड़ेगी। जिससे बिलासपुर शहर की आर्थिक गतिविधियों को नया जीवन मिल सकता है। चार लेन सड़क के निर्माण के बाद बिलासपुर शहर मुख्य सड़क से कट गया था। जिसके चलते व्यापार और उद्योग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। सुरंग के निर्माण से यह समस्या हल होने की उम्मीद है। साथ ही यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है।

Rajesh Dharmani

भारत में अपनी तरह की पहली परियोजना

यदि यह परियोजना पूरी होती है तो यह भारत में अपनी तरह की पहली झील के नीचे सुरंग होगी। गोबिंद सागर झील जो उना और बिलासपुर जिलों में फैली हुई है। लगभग 56 किमी लंबी और 3 किमी चौड़ी है। सुरंग के निर्माण से क्षेत्रीय परिवहन और पर्यटन दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

उन्नत जर्मन तकनीक का उपयोग

इस परियोजना में जर्मन इमर्सन टनल तकनीक और अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीनों का उपयोग करने की योजना है। सुरंग के कुछ हिस्सों का निर्माण जमीन पर किया जाएगा और फिर झील के नीचे स्थापित किया जाएगा। झील के तल के नीचे सुरंग की खुदाई करते समय सुरक्षा और स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए ये तकनीकें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

मंत्री धरमानी ने बताया कि जर्मनी के विशेषज्ञों और सलाहकारों की एक टीम इस परियोजना की व्यवहार्यता का आकलन करेगी। यदि यह परियोजना व्यवहार्य पाई जाती है तो इसके लिए केंद्र सरकार की सेतु भारतम योजना के तहत वित्तीय सहायता मांगी जाएगी। परियोजना की अनुमानित लागत कई सौ करोड़ रुपए हो सकती है।

पर्यावरणीय संरक्षण पर जोर

पर्यावरणीय चिंताओं का समाधान करते हुए मंत्री धरमानी ने आश्वासन दिया कि टिकाऊ जर्मन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। ताकि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जा सके। परियोजना का उद्देश्य न केवल बुनियादी ढांचे का विकास करना है। बल्कि प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करते हुए हिमाचल प्रदेश को आधुनिक तकनीकों का उदाहरण बनाने का भी है।

पर्यटन और आर्थिक विकास को बढ़ावा

सुरंग बनने से न केवल बिलासपुर शहर की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। बल्कि यह पर्यटन के क्षेत्र में भी एक नया आयाम जोड़ेगी। क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों के लिए यह सुरंग एक विशेष आकर्षण बन सकती है।

गोबिंद सागर झील में पानी के नीचे सुरंग का प्रस्ताव हिमाचल प्रदेश में बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास को नई दिशा दे सकता है। यह परियोजना अपनी जटिलता और तकनीकी नवाचार के कारण राज्य और देश के लिए एक ऐतिहासिक कदम होगी। यदि यह योजना साकार होती है तो यह हिमाचल प्रदेश को विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे के विकास में अग्रणी बनाएगी।

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