Exclusive: पहाड़ पर मोदी लहर नहीं, भाजपा उम्मीदवारों के छूट रहे हैं पसीने
Recommended Video

शिमला। हिमाचल प्रदेश की तेरहवीं विधानसभा चुनावों में भाजपा को सत्ता में लाने के लिये पीएम मोदी और अमित शाह जीतोड़ कोशिशों में जुटे हैं। मोदी लहर कुछ मद्धम हुई तो इसमें धूमल को भी जोड़ दिया गया। लेकिन पहाड़ में फिर भी न तो मोदी लहर दिख रही है, न ही भाजपा के पक्ष में वोटर का मन। यही वजह है कि प्रदेश में अभी तक यानि मतदान से पहले महौल ऐसा नहीं बन पाया है कि भाजपा आसानी से सत्ता पर काबिज हो जाये। भाजपा के सत्ता में आने के रास्ते में कांग्रेस नहीं बल्कि बागी हैं। तो दूसरी ओर जीएसटी के चलते भाजपा जनता का विश्वास नहीं जीत पाई। जिससे भाजपा के पक्ष में कोई महौल यहां नहीं बन पाया। प्रदेश में कांग्रेस पार्टी व वीरभद्र सिंह पर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ताबड़तोड़ हमले चुनाव प्रचार में भाजपा नेता करते रहे हैं।

वीरभद्र पर भ्रष्टाचार के आरोपों का मतदाताओं पर ज्यादा असर नहीं
वीरभद्र पर भ्रष्टाचार के आरोपों का हिमाचल के मतदाताओं पर ज्यादा असर नहीं है। क्योंकि वे जानते हैं कि वर्ष 1998 में पंडित सुखराम के भ्रष्टाचार आरोपों के बावजूद उन्होंने ने 5 सीटें जीती थीं और हिमाचल की राजनीति का नक्शा ही बदल दिया था। इस बार सुखराम और उनके पुत्र अनिल शर्मा बीजेपी के साथ हैं। बीजेपी सुखराम के भ्रष्टाचार को उनके पुत्र अनिल शर्मा के साथ नहीं जोड़ रही। भाजपा के नेता यही कह रहे हैं कि अनिल शर्मा पर कोई भी भ्रष्टाचार का आरोप नही है।

वीरभद्र कांग्रेस के प्रभुत्व वाली सीटों पर सहानुभूति बटोर रहे हैं
बहरहाल जितना भाजपा भ्रष्टाचार का राग अलाप रही है, उतना वीरभद्र कांग्रेस के प्रभुत्व वाली सीटों पर सहानुभूति बटोर रहे हैं। भाजपा भ्रष्टाचार पर वार करते वक्त भूल जाती है कि उसका अपना दामन पाक साफ नहीं है। ऊना में प्रधानमंत्री मोदी भाजपा की चुनावी रैली में भ्रष्टाचार पर वीरभद्र सिंह व कांग्रेस पार्टी को कोस रहे थे, तो उसी रैली के संचालन का जिम्मा भाजपा के पूर्व सांसद सुरेश चंदेल संभाल रहे थे, जिन पर नोट लेकर सवाल पूछने का मामला चल रहा है। उन्हें भ्रष्टाचार के आरोप में पकड़ा गया था। अब कांग्रेस पार्टी के नेता कह रहे हैं कि भाजपा का भ्रष्टाचार पर दोहरा चरित्र है।

भाजपा उम्मीदवारों के छूट रहे हैं पसीने
इसी तरह नरेन्द्र मोदी के जादू की बात करें, तो मोदी ने पालमपुर, ऊना व फतेहपुर में चुनावी रैलियां की हैं। इन तीनों ही सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों के पसीने छूट रहे हैं। अगर कांगड़ा जिला की बात की जाये तो टीम धूमल के दो दिग्गज रविन्द्र सिंह रवि देहरा में निर्दलीय प्रत्याशी होशियार सिंह से पिछड़ते नजर आ रहे हैं, तो बिक्रम ठाकुर जसवां परागपुर में कांग्रेस प्रत्याशी सुरेन्द्र मनकोटिया के फेर में फंस गये हैं। पिछली बार कांग्रेस को दस सीटें कांगड़ा में मिली थीं। निर्दलीय चुनाव जीतने वाले भी कांग्रेस के साथ हो गये थे। यानि 15 में से 12 विधायक। लेकिन इस बार इतने विधायक भाजपा के यहां नहीं जीत रहे हैं। इसके मायने स्पष्ट हैं कि भाजपा आसानी से सरकार नहीं बना पायेगी।












Click it and Unblock the Notifications