Shimla Mosque Issue: संजौली मस्जिद अवैध निर्माण पर नहीं हुई कार्रवाई, कोर्ट में लोगों ने दायर किया आवेदन
Shimla Mosque Issue: शिमला के संजौली मस्जिद में अवैध और अनाधिकृत निर्माण मामले में वक्फ बोर्ड ने अपना पक्ष रखा दिया है। हालांकि, इस मामले की सुनवाई अभी टल गई है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 5 अक्तूबर को होगी।
इस बाबत संजौली मस्जिद के अवैध निर्माण मामले पर वक्फ बोर्ड के वकील बीएस ठाकुर ने कहा कि अनधिकृत निर्माण के बारे में नगर निगम शिमला की ओर से हिमाचल प्रदेश वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी किया गया था। हमने कोर्ट को जवाब और दस्तावेज सौंप दिए हैं।

निर्माण से संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन है। आज न्यायालय ने स्वामित्व के बारे में पूछा और हमने दस्तावेजी साक्ष्यों के माध्यम से न्यायालय को बताया कि 1947 में जब पूरे भारत में वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण किया गया था, तब मस्जिद वक्फ बोर्ड की संपत्ति थी।
संबंधित अधिकारी संपत्ति की स्थिति, निर्माण की रिपोर्ट दाखिल करेंगे। हम सुनवाई की अगली तारीख 5 अक्तूबर को जवाब दाखिल करेंगे। अवैध निर्माण से संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
वहीं, एडवोकेट जगत पाल कहते हैं कि यह अवैध और अनाधिकृत निर्माण का मामला है। यह मामला पिछले 14 सालों से चल रहा है। अभी तक इस मामले में कोई प्रभावी आदेश पारित नहीं हुआ है। इसलिए निवासियों ने इस मामले में और देरी न करने के लिए आवेदन दायर किया है।
जब भी कोई आम आदमी सरकारी जमीन पर कोई निर्माण करता है, तो उसे तोड़ दिया जाता है और बिजली-पानी की आपूर्ति बंद कर दी जाती है। लेकिन, इस मामले में यह कार्रवाई नहीं की गई है। पहला पक्ष, नगर निगम अदालत में निर्माण की अवैधता को स्पष्ट नहीं कर पाया है।
वह अदालत को यह बताने में सक्षम नहीं है कि मस्जिद का निर्माण वक्फ द्वारा किया गया था या किसी निजी संगठन द्वारा। खबर के मुताबिक, संजौली मस्जिद में अवैध निर्माण मामले पर सुनवाई के दौरान स्थानीय लोगों की एक सोसाइटी ने भी 20 पन्नों का लिखित आवेदन कोर्ट में दिया।
इस सोसाइटी का कहना है कि उन्हें भी इस मामले में पार्टी बनाया जाए। सोसाइटी की ओर से पेश अधिवक्ता जगत पाल ने कहा कि उन्हें भी इस मामले की पूरी जानकारी है। कहा कि जिस जगह मस्जिद का निर्माण हुआ है, वह सरकार की है और इसकी जमाबंदी में खसरा नंबर 36 में बाकायदा गैर मुमकिन मस्जिद दर्ज है। आवेदन के जरिए अवैध व अनधिकृत निर्माण को हटाने की मांग की गई है।












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