एक हादसे ने बदली जिंदगी, 'लाशों' की सेवा की खातिर नहीं की शादी

हिमाचल प्रदेश में शांतनु कुमार ने अपने जज्बे से हर किसी को कायल कर दिया है। वे लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार के लिए समर्पित हैं।

शिमला। बदलते युग में जहां मानवीय संवेदनायें जहां लगभग खत्म होती जा रही हैं। इसी युग में अगर आपको एक ऐसा इंसान मिले जो लावारिस शवों का न केवल अंतिम संस्कार कर रहा है बल्कि अस्थियों को अपने ही खर्च पर मुक्ति दिला रहा हो तो आप भी हैरान रह जायेंगे। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर कस्बे में एक ऐसा इंसान है जो ऐसा कर रहा है। उसके किस्से आज हर किसी की जुबान पर सुने जा सकते हैं। शांतनु के इसी जज्बे का हर कोई कायल है।

अपने खर्चे पर कर रहे हैं लाशों की सेवा

अपने खर्चे पर कर रहे हैं लाशों की सेवा

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर के समाजसेवी शांतनु कुमार करीब डेढ दशक से लावारिस लाशों को अपने कंधों पर उठाकर न केवल उनका अंतिम संस्कार करवाते हैं बल्कि अपने खर्चें पर हरिद्वार जाकर अस्थियां को रीति-रिवाज के साथ गंगा में विसर्जित करते हैं। शांतनु अब तक करीब करीब 604 लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करवा चुके हैं। गुरुवार को वह दो लावारिस लाशों की अस्थियां के साथ हरिद्वार की ओर रवाना हो गए। इनमें से एक लावारिस शव की अस्थियां शिमला से आई हैं और दूसरी नादौन से प्राप्त हुई है। काबिलेगौर है कि अपने ही खर्च पर हरिद्वार जाकर हर की पौड़ी ब्रह्मा कुंड में हिंदू शास्त्र के अनुसार पिंड दान करवाते हैं।

समाजसेवा के लिए नहीं की शादी

समाजसेवा के लिए नहीं की शादी

शांतनु कुमार ने समाज सेवा के लिए अविवाहित रहने का निर्णय लिया। जब भी उन्हें पता चलता है कि कहीं पर लावारिस शव पड़ा तो वह अपने मकसद के लिए निकल पड़ते हैं और शव का अंतिम संस्कार कराने के बाद हरिद्वार में अस्थियां विसर्जन करके वापस लौटते हैं।

समाज सेवा के लिए मिला सम्मान

समाज सेवा के लिए मिला सम्मान

शांतनु को समाज सेवा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए गार्ड फेयर ब्रेवरी अवार्ड से भी तत्कालीन राज्यपाल सदाशिव कोकजे द्वारा सम्मानित किया गया था। 2012 में हिमाचल प्रदेश सरकार के द्वारा हिमाचल गौरव अवार्ड से नवाजा गया। इसके साथ ही कई समाज सेवी संस्थाओं के द्वारा भी शांतनु को सम्मानित किया है। हाल ही में हमीरपुर जिला प्रशासन ने भी उन्हें सम्मानित किया। एक छोटे से कपड़े की रेहड़ी लगाने वाले शांतनु ने इनाम में मिली हजारों रुपये की राशि को भी अपने पास नहीं रखा और उसे भी चौरिटी में दान कर दिया।

मदर टेरेसा को मानते हैं प्रेरणा स्रोत

मदर टेरेसा को मानते हैं प्रेरणा स्रोत

शांतनु कुमार का कहना है कि समाज सेवा करके अलग सी अनुभूति होती है और इस काम के लिए मदर टेरेसा को प्रेरणा स्रोत मानते हैं। शांतनु मूल रूप से बंगाल के रहने वाले हैं। अशोक नगर में उनका घर है। उन्होंने बताया कि वो सन 1990 से समाज सेवा शुरू की। वो 1980 में में हमीरपुर आए। उन दिनों उनके पिता जो परमाणु ऊर्जा विभाग में कार्यरत थे। यहां नौकरी के सिलसिले में आये थे। उन्होंने बताया कि उनके अंदर समाज सेवा की भावना हमीरपुर में हुए एक हादसे के बाद शुरू हुई थी। उन्होंने लोगों से अपील की है, अगर कोई भी गरीब परिवार अस्थियां विसर्जन करने में असमर्थ है तो वह संपर्क कर सकता है।

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