PICS: आप जो सड़क पर कूड़ा फेंकते हैं...वही साफ करती हैं ये...

कचरे के ढ़ेरों से परेशानी हुई तो उसने ठान लिया कि अब यहां आकर इन्हें ठिकाने लगाकर ही दम लेंगी।

शिमला। हिमाचल प्रदेश के धौलाधार पर्वत माला में धर्मशाला से सटे पर्वतारोहियों के पंसदीदा त्रियुंड, नड्डी से लेकर नीचे मैकलोडगंज तक आपको एक विदेशी बाला जिसे अब गारबेज गर्ल के रूप में भी पहचाना जाता है, अक्सर इस इलाके में कूड़ा-कर्कट इकट्ठा करती दिखाई देती है तो हर किसी का माथा ठनकता है कि आखिर ये ऐसा क्यों कर रही होगी? इन पहाड़ों में जहां अकेला आदमी भी आसानी से नहीं जा सकता। वहां कचरे को ठिकाने लगाना कोई आसान काम नहीं है।

अपनी जिद पर अड़ी हैं जोडी अंडरहिल

अपनी जिद पर अड़ी हैं जोडी अंडरहिल

अपनी ही धुन में अपनी टीम के साथ काम करने वाली ये ब्रितानी युवती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान का रोल मॉडल है। जो अपने जज्बे व जनून के साथ स्वच्छता का संदेश देती नजर आती है। ये ब्रितानी युवती जिसका नाम जोडी अंडरहिल है, दिसंबर 2008 में भारत आए उस पर्यटक दल में थी जिसमें 100 से ज्यादा लोग भारत भ्रमण पर आए थे। जोडी अंडरहिल में उन दिनों भारत के बारे में बहुत कुछ सुन चुकी थी। इसी वजह से भारत को नजदीक से जानने की उसकी लालसा उसे यहां खीच लाई। वो मुंबई, कर्नाटक, केरल व कन्याकुमारी में घूमी भी। भारत की सुंदरता उसे भा गई। लेकिन उसने मन ही मन फैसला ले लिया कि वो अब भारत में रहकर भारत के पर्यटक स्थलों की सुंदरता के लिए काम करेगी।

नौ साल पहले लिया था ये प्रण...

नौ साल पहले लिया था ये प्रण...

जोडी अंडरहिल आज पिछले नौ सालों से अपने स्वच्छता अभियान को अपने ही दम पर गति दे रहीं हैं। जोडी अंडरहिल अपने भारत भ्रमण के अनुभवों की याद ताजा करते हुए कहती हैं कि मैंने हर जगह कूड़े के ढ़ेर देखे। मेरी एक रेल यात्रा के दौरान उस समय मुझे कठिन परिस्थितयों में जूझना पड़ा, जब पूरे सफर में मुझे कहीं भी अपना कचरा ठिकाने लगाने के लिए कहीं कोई जगह ही नहीं मिली तो मैं जेब में ही उसे डालने लगी। इस पर मेरे सहयात्रियों ने मेरे पैकेट को लेकर उसे खिडकी से बाहर फेंक दिया, मेरे आंसू झलक आए। हैरानी कि बात थी कि पूरे कम्पार्टमेंट में कोई ऐसा नहीं था जो मेरी स्थिती को समझ पाता। इन पलों को मैं आज तक भुला नहीं पाई हूं।

कचरे ने बढ़ाई परेशानी, करके रहेंगी साफ

कचरे ने बढ़ाई परेशानी, करके रहेंगी साफ

फरवरी 2009 में जोडी धर्मशाला के पास तिब्बतन चिल्ड्रन विलेज में छात्रों से रूबरू होने पहुंचीं। यहां वर्कशॉप आयोजित की। यहां आकर खूबसूरत शहर धर्मशाला में कचरे के ढ़ेरों से परेशानी हुई तो उसने ठान लिया कि अब यहां आकर इन्हें ठिकाने लगाकर ही दम लेंगी। ब्रिटेन में जोडी के पिता की अपनी एक निर्माण कंपनी है। लेकिन वहां समय बिताने के बजाए वो भारत में काम करने की ठान चुकी है। यहां उसने अपना एक गैर सरकारी संगठन बनाकर अपने सपने को साकार बनाने का प्रण लिया तो जोडी की मदद को ब्रिटेन के ही कुछ मददगार आगे आए और कारंवा आगे बढ़ता गया। जोडी के संगठन ने माऊंटेन क्लीन योजना के तहत पहाड़ों में बने पर्वतारोहियों के शिविरों को स्वच्छ करने की शुरुआत की। जिसके तहत उसने धर्मशाला की धौलाधार को चुना और बाद में मणिमहेश में भी अपना अभियान चलाया।

मिल चुके हैं इनसे कई बड़े लोग...

मिल चुके हैं इनसे कई बड़े लोग...

2012 सितंबर में जोडी अंडरहिल के संगठन ने देहरादून का रुख किया। उनके संगठन में साठ पूर्णकालिक सदस्य हैं। यहां इन लोगों ने बेहतरीन काम किया है। जोडी के संगठन को महिंदरा एंड महिंदरा, माइक्रोसॉफ्ट, नोकिया जैसी प्रतिष्ठित कंपनियां भी आर्थिक सहयोग दे रही हैं। हाल ही में उन्हें थापर चेरिटेबल पब्लिक ट्रस्ट से युवाओं में एजूकेशन अवेयरनेस के लिए प्रोजेक्ट मिला है। हाल ही में उनके संगठन ने जिम कॉर्बेट पार्क में भी अपना अभियान चलाया। उसके बाद नैनीताल जिला में अपनी गतिविधियां आरंभ कीं। इसके लिए महिंदरा से दो बोलेरो जीप उन्हें मिलीं। महिंदरा के चेयरमैन आनंद महिंदरा ने भी हाल ही में जोडी के प्रयासों को सराहा व कहा कि महिंदरा ग्रुप को जोडी के प्रयासों पर गर्व है।

लोगों की मानसिकता भी समझती हैं जोडी

लोगों की मानसिकता भी समझती हैं जोडी

जाने-माने अभिनेता आमिर खान भी जोडी के 'वेस्ट वॉरियर' से खासे प्रभावित हैं। पिछले साल जुलाई में जोडी की मुंबई में करीब 90 मिनट तक आमिर खान से मुलाकात हुई। आमिर खान आज जोडी के मुरीद हैं। वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान की प्रगति से निराश हैं और कहती हैं कि ये अकेले प्रधानमंत्री के बस की बात नहीं। इसे मिशन मोड पर लाकर हर सरकारी अधिकारी व आम नागरिक को जोड़ना होगा। ताकि संकल्प को सही मायनों में गति मिले। जोडी अंडरहिल कहती हैं कि सार्वजनिक स्थलों को साफ-सुथरा रखने के प्रति भारतीय लोग इसलिए संजीदा नहीं कि वो मानतें हैं कि ये दोबारा भी तो गंदे हो जाएंगे लेकिन इस धारणा को बदलना होगा। उन्हें सोचना होगा कि अगर हम अपने घरों की गंदगी रोजाना साफ न करें तो क्या घर में साफ सुथरा वातावरण पैदा हो सकता है।

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