लोकसभा सांसद वीरेन्दर कश्यप के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में आरोप तय
शिमला। भाजपा अक्सर राजनिति में ईमानदारी की बात तो करती है,लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि भारतीय जनता पार्टी के हिमाचल प्रदेश की शिमला सीट से लोकसभा सासंद वीरेन्दर कश्यप को अदालत रिशवत लेने के एक मामले में दोषी करार दे दिया है। लेकिन हिमाचल भाजपा अपने सांसद के भ्रष्टाचार के मामले पर मौन साधे है।

दरअसल लोकसभा सांसद वीरेन्दर कशयप के खिलाफ सोलन की अदालत ने भ्रष्टाचार के एक मामले में आरोप तय कर दिए हैं। इससे भाजपा बैकफुट पर आ गई है। गौरतलब है कि 20 अप्रैल 2009 को लोकसभा चुनाव के दौरान लोकसभा सांसद वीरेंद्र कश्यप द्वारा रिश्वत लेने का मामला स्टिंग आपरेशन के माध्यम से सामने आया था। जिसमें कशयप किसी कार्य को पूरा करवाने के लिए पैसे ले रहे थे।
प्रार्थी का आरोप है कि जिस समय यह मामला हुआ, उस वक्त प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। उसके बाद कश्यप शिमला लोकसभा सीट से चुनाव जीत कर सांसद बन गए। इसके कारण मामले की जांच ठीक से नहीं की गई। हालांकि तत्कालीन सरकार ने फरवरी 2010 में विशेष जांच दल का गठन कर इस प्रकरण की छानबीन करने के आदेश जारी किए थे, लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण विशेष जांच दल ने यह कहकर केस को बंद कर दिया था कि सांसद पर लगाए गए इन आरोपों पर कोई केस नहीं बनता है।
प्रार्थी ने याचिका में यह भी आरोप लगाया है कि इस बारे में लोकसभा की तत्कालीन स्पीकर को शिकायत की गई थी, लेकिन इसके बाद भी सांसद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रदेश सरकार की ओर से न्यायालय के समक्ष दायर किए गए शपथ पत्र के मुताबिक 6 मार्च 2014 को वीरेंद्र कश्यप के खिलाफ राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत फिर से मामला दर्ज कर लिया है और अब सोलन न्यायालय में आज उनके खिलाफ चार्जेस फ्रेम हो गए हैं। जिससे भाजपा भी अब परेशानी में है।












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