कोटखाई गैंगरेप: पुलिस की कहानी पर लोगों को नहीं हो रहा भरोसा
डी़जीपी ने पूरी कहानी बताई कि किस तरह दरिंदों ने इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया। लेकिन पुलिस की इस कहानी में कई पेंच हैं। पुलिस के पिछले बयानों से यह कहानी पूरी तरह अलग है।
शिमला के कोटखाई में स्कूली छात्रा से गैंगरेप और मर्डर केस में प्रदेश के पुलिस महानिदेशक सोमेश गोयल ने गुरुवार को प्रेस कांफ्रेस कर इस मामले का खुलासा किया। डी़जीपी ने पूरी कहानी बताई कि किस तरह दरिंदों ने इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया। लेकिन पुलिस की इस कहानी में कई पेंच हैं। पुलिस के पिछले बयानों से यह कहानी पूरी तरह अलग है। यही वजह है कि कोटखाई के लोगों को पुलिस की इस मामले की थ्योरी समझ नहीं आ रही है और लोग पुलिसिया जांच पर सवाल उठने लगे हैं।

पुलिस ने बताया जंगल में हुआ रेप
सारे मामले में कोटखाई पुलिस ने जिस तरीके से लापारवाही बरती वह पहले ही विवादों में है। जिस दिन पुलिस ने जंगल से लाश को बरामद किया था उस दिन कोटखाई पुलिस को घटनास्थल तक पुहंचने में करीब चार घंटे लग गये। तब तक हलाईला व महासू के बीच दांदी के जंगल में लोगों का भारी जमावड़ा हो गया था। कई लोगों ने यहां जमकर तस्वीरें खींची व उन्हें सोशल मिडिया में शेयर किया। आखिर पुलिस चार घंटो बाद क्यों पहुंची, इसका जवाब पुलिस नहीं दे पाई है। लेकिन बाद में एसआईटी को गठित कर मामले को सुलझाने का दावा किया गया। एसआईटी की जांच के आधार पर ही आज डीजीपी सोमेश गोयल ने जो कहानी बताई कि पीड़िता जंगल में जा रही थी व उसे जीप में बिठाया गया व उसके साथ जंगल में ही रेप किया गया और उसके बाद हत्या की गई।

पहले कहा कि रेप एक घर में हुआ
लेकिन पुलिस की इस थ्योरी में कई कड़ियां ऐसी जोड़ी गई हैं जिन पर कोटखाई के लोगों को ही शक है। दबी जुबान में लोग एसआईटी की जांच पर सवाल उठा रहे हैं। दरअसल इससे पहले बुधवार तक खुद पुलिस ही कह रही थी कि रेप और हत्या करने वाले इलाके के स्थानीय युवक साधन संपन्न परिवारों से हैं। साथ ही रेप जंगल में नहीं हुआ बल्कि गांव के एक घर में हुआ। अब डीजीपी की थ्योरी पर सवाल उठना लाजिमी हैं। वन इंडिया के साथ इलाके के कई लोागें ने अपनी बात के दौरान पुलिस की ओर से गढ़ी कहानी को मानने से साफ इंकार कर दिया।

सभी अपराधी बाहरी थे और गांव में छुपे थे
सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि आज पुलिस ने जिन आरोपियों का खुलासा किया है उनमें दो नेपाली मूल के हैं व दो उत्तराखंड के हैं। इस मामले में पुलिस ने आशीष चौहान उर्फ आशु (29), महासू के शराल गांव का रहने वाला है। जबकि पकड़े गए अन्य लोगों में पिकअप चालक राजेंद्र सिंह उर्फ राजू (32) जो कि मंडी के जंजैहली का रहने वाला है को पकड़ा है। जबकि सुभाष सिंह बिष्ट (42) उत्तराखंड और दीपक उर्फ दीपू (38) पौड़ी, घड़वाल के रहने वाले हैं और सूरत सिंह (29) नेपाल, लोकजन उर्फ छोटू (19) नेपाल के रहने वाले हैं। पुलिस जिस आशीष चौहान की बात कर रही है उसकी इस घटना में डायरेक्ट इंन्वालवमेंट नहीं है। सवाल यह भी यह भी है कि दो नेपाली दो उत्तराखंडी और एक मंडी का रहने वाला आरोपी इतनी बड़ी वारदात करने के बाद भी उसी गांव में छह दिन तक रहे जहां उन्होंने अपराध किया था। आमतौर पर कोई भी अपराधी अपराध करने के बाद घटनास्थल से भाग जाता है। लेकिन हैरानी का विषय है कि पुलिस ने सभी आरोपियों को काटखाई में ही गिरफ्तार किया है।

जंगल में हाथापाई का नहीं है सबूत
यही नहीं जंगल में डीजीपी रेप होने की बात कर रहे हैं लेकिन खुद ही कह रहे हैं कि मृतका के पीठ पर ही कुछ खरोचें थीं। अगर जंगल में रेप हुआ हो तो क्या सिर्फ पीठ पर ही खरोचें लगेंगी? यही नहीं जिस दिन लाश बरामद की गई उस दिन घटनास्थल पर कोई ऐसा साक्ष्य नहीं था कि जिससे साबित हो जाता कि रेप वहां ही हुआ हो। अगर ऐसा हुआ होता व छह लोगों ने पीड़िता के साथ हाथापाई की होती तो वहां झाडियी टूटी होती। पुलिस ने इन्हीं वजहों से खुद कहा था कि रेप यहां नहीं किसी घर में हुआ है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जंगल में जा रही जीप में स्कूली छात्रा कैसे नेपाली मूल के लोागें के साथ आसानी से बैठने को तैयार हो गई। डीजीपी भी खुद कह रहे हैं कि वह तो महासू स्कूल में 9 मई को ही दाखिल हुई थी। जाहिर वह इलाके में नई थी। लिहाजा कोई भी इंसान जो उस इलाके में नया आया हो वह किसी अनजान वाहन में तब तक नहीं बैठ सकता जब तक उसका कोई अपना परिचित उसके साथ हो।

दो दिन तक जंगल में लाश थी और किसी ने देखा नहीं?
सबसे बड़ी हैरानी का विषय है कि कोटखाई के स्कूल में 10वीं कक्षा में पढऩे वाली नाबालिग छात्रा 4 जुलाई को लापता हो जाती है। दो दिन बाद उसका शव कोटखाई के महासू के दांदी जंगल में नग्र अवस्था में पड़ा मिलता है । पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि छात्रा के साथ गैंगरेप के बाद उसकी गला घोंटकर हत्या की गई। सवाल यह भी है कि अगर दो दिन तक लाश जंगल में ही पड़ी थी तो उस लाश को जंगली जानवरों ने खाया क्यों नहीं। कहीं ऐसा तो नहीं है कि छात्रा को किसी घर में दो दिन तक बंधक बनाकर रखा गया और बाद में उसकी हत्या की गई और उसकी लाश को जंगल में फेंक दिया गया हो और जिस घर में उसे बंधक बनाया गया उसके मालिकों को बचाने के लिये ही पुलिस अपनी नई थ्योरी सामने लेकर आई हो।












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