हिमाचल प्रदेश चुनाव: नुरपुर (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र के बारे में जानिये

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शिमला। नुरपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हिमाचल प्रदेश विधानसभा की छह नंबर सीट है। काँगड़ा जिले में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 74,679 मतदाता थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में अजय महाजन इस क्षेत्र के विधायक चुने गए।

हिमाचल प्रदेश चुनाव: नुरपुर विधानसभा सीट के बारे में जानिये

पंजाब के पठानकोट से सटे जिला कांगड़ा के नुरपुर का गौरवशाली इतिहास रहा है। एक जमाने में इसका नाम धमड़ी था। राजा जगत सिंह के शासन काल में एक बार जहाँगीर और नूरजहाँ कांगड़ा जाते समय यहां रुके थे। फिऱ नूरजहां के नाम से धमड़ी का नाम नुरपुर हो गया।

नुरपुर किला नूरपुर का प्रमुख आकर्षण है, जो 10वीं शताब्दी में बनाया गया था। किला पठानिया कबीले द्वारा बनाया गया था जो कि उस समय के दौरान यहाँ के शासक थे। बताया जाता है कि यह किला 11वीं शताब्दी में भी मौजूद था तथा दिल्ली के शासक जेतपाल के छोटे लड़के ने इसे बसाया था। किला जबर कुंड का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। जबर कुंड एक छोटी चक्की नामक नदी की सहायक नदी है।

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किले के अंदर बृज महाराज मंदिर है, जो कि हिंदू भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। तेजस्वी प्रभु की काले पत्थर की मूर्ति राजा जगत सिंह के शासनकाल के दौरान राजस्थान से लाई गई थी। वर्तमान में किला काफी खऱाब है जो कि अप्रैल 1905 ई. में आए भयंकर भूकंप की वजह से बर्बाद हो गया। इसके अलावा, अंग्रेजों ने भी इसके कुछ भागों को नष्ट करने का प्रयास किया था। अग्रेजों के जमाने में महान क्रांतिकारी शहीद राम सिंह पठानिया जो कि यहां के बाशिन्दे थे, ने अग्रेंजो को नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया था।

2008 में विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के दौरान नुरपुर में इंदौरा की तीन पंचातें कट कर नुरपुर में आईं तो नुरपुर की 13 पंचायतें कट कर फतेहपुर में मिलीं। इंदौरा की वरांडा, कंडवाल व रिट पंचायतें नुरपुर में मिंलीं।

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बदलते जमाने में नुरपुर के विकास के कई आयाम छुये हैं। एक समय यहां की राजनीति में सत महाजन की तूती बोलती थी। महाजन जब तक जिंदा रहे लोगों ने उन्हें पठानकोट का होने के बावजूद हमेशा गले लगाया। विभिन्न कांग्रेस सरकारों में महाजन मंत्री कैबिनेट मंत्री रहे। आज के नुरपुर को उन्होंने ही बसाया व संवारा। जातिगत समीकरण देखे जायें तो यहां करीब चालीस फीसदी मतदाता राजपूत हैं व 20 फीसदी ओबीसी, 15 फीसदी ब्राहम्ण मतदाता हैं। यहां अनुसूचित जाति व जनजाति के मतदाता भी हैं। मजेदार बात यह है कि यहां कांग्रेस पार्टी ने कभी भी राजपूत को अपना प्रत्याशी नहीं बनाया तो राजपूत समुदाय में जब भी पठानिया बिरादरी का नेता मैदान में उतरा वह चुनाव जीत गया। नुरपुर में राजपूत व एससी व एसटी का गठजोड़ राजनीति की दिशा तय करता आया है।

नुरपुर विधानसभा क्षेत्र एक नजर में

जिला: कांगड़ा

लोकसभा चुनाव क्षेत्र : कांगड़ा

मतदाता: 77650

जनसंख्या (2017) : 176525

साक्षरता : 78 प्रतिशत

शहरीकरण: आधा इलाका ग्रामीण

हिमाचल प्रदेश चुनाव: नुरपुर विधानसभा सीट के बारे में जानिये

नुरपुर से अभी तक चुने गये विधायक

वर्ष चुने गये विधायक पार्टी संबद्धता कुल पंजीकृत मतदाता

2012 अजय महाजन कांग्रेस 74,679

2007 राकेश पठानिया निर्दलीय 88,170

2003 सत महाजन कांग्रेस 76,740

1998 राकेश पठानिया भाजपा 65,232

1993 सत महाजन कांग्रेस 58,598

1990 केवल सिंह पठानिया जनता दल 55,855

1985 सत महाजन कांग्रेस 40,877

1982 सत महाजन कांग्रेस 37,065

1977 सत महाजन कांग्रेस 33,221

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पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं अजय महाजन

नुरपुर के मौजूदा विधायक अजय महाजन को राजनीति विरासत में मिली। उनके पिता सत महाजन यहां से पांच बार विधायक रहे। इसका फायदा पिछले चुनावों में अजय महाजन को भी मिला। व वह चुनाव जीत गये। पंजाब के अमृतसर में 12 सितंबर 1958 को जन्में अजय महाजन ग्रेजुएट हैं, उनके दो बेटे हैं। युवा कांग्रेस से होकर अजय राजनीति में आये व 2012 के चुनावों में पहली बार विधायक बने। अजय महाजन पर आरोप लगता रहा है कि वह पठानकोट के ठेकेदारों व दूसरे लोगों को नुरपुर में तरजीह देकर उनका विकास कर रहे हैं लेकिन नुरपुर में आज ज्यादातर लोगों में सवाल उठ रहा है कि इस बार धरतीपुत्र विधायक क्यों न चुना जाये।

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English summary
Know about Nurpur assembly constituency of Himachal Pradesh.
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