साधु बनने अमेरिका से हिमाचल आया जस्टिन हुआ लापता, तलाश में भटक रही मां सुजैन

शिमला। एक मां की पथराई आंखे आज भी अपने लाडले बेटे को ढ़ूंढ रही हैं, जो सात समंदर पार भारत के कुल्लू मनाली की वादियों में कहीं खो गया है। यहां बात हो रही है अमेरिकी युवक जस्टिन अलेक्जेंडर शेटलर की। करीब दो साल पहले जस्टिन एलेक्ज़ेंडर शेटलर,जो कि रोमांचक यात्राओं का शौकीन था,को कुल्लू मनाली की वादियां अपनी ओर आकर्षित करती हैं। वह अपनी बुलेट से कई यात्राएं कर चुका था। नेपाल और बैंकॉक की यात्रा के तुरंत बाद जस्टिन भारत पहुंचता है। भारत में अध्यात्म और शांति की खोज जस्टिन को हिमाचल ले जाती है। धर्मशाला और उससे आगे की ट्रेकिंग के बाद अपनी रोमांचक यात्रा में जस्टिन पार्वती वैली में पहुंच जाता है। वह कुल्लू में पार्वती पहाड़ियों पर कुछ दिन गुजारने के बाद गायब हो गया, वह दरअसल साधु बनने की इच्छा रखता था और वहां रहा फिर गायब हो गया। जस्टिन की मां सुज़ैन रीब ने अपने बेटे की तालाश के लिये कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। लेकिन अभी भी उसने उम्मीद नहीं छोड़ी है। सुजैन को लगता है कि उसका बेटा उससे मिलेगा।

ब्लॉग में जस्टिन ने लिखी अपनी यात्रा

ब्लॉग में जस्टिन ने लिखी अपनी यात्रा

दरअसल, जस्टिन एलेक्ज़ेंडर शेटलर ने कुल्लू के पार्वती घाटी में बिताये अपने पलों को अपने ब्लॉग में बखूबी वर्णित किया है। उसके ब्लॉग के मुताबिक, एक सुबह जस्टिन पार्वती घाटी में एक गुफा के पास से गुजरता है। यहां उसे एक नागा साधु दिखाई देता है। नागा बाबा उसे गुफा के पास आते हुए देखता है और जब वह गुफा के पास से गुजऱता है तो जस्टिन को इशारे से अपने पास गुफा में आने के लिए कहता है। दोनों कैसे और क्या बातचीत करते हैं, यह ज्यादातर इशारों की बात है क्योंकि उस बाबा को अंग्रेजी का केवल एक ही शब्द पता था-गुड, जस्टिन सोचता है कि कैसे और क्या बातचीत हो लेकिन वह किसी तरह यह समझ पाता है कि योग, ध्यान और अध्यात्म के बारे में उसे जागरूक करने के लिए बाबा ने अपने पास बुलाया है।

अपनी योग और साधना के प्रदर्शन से वह बाबा जस्टिन को प्रभावित करता है और जस्टिन दो हफ्तों तक उस बाबा के साथ उस बाबा की दिनचर्या को अपनाता हुआ उस गुफा में रहता है। जस्टिन को लगता है कि इतने समय में दोनों के बीच एक दोस्ताना रिश्ता बन गया है। इतने दिनों में दोनों ट्रेकिंग करते हुए और ऊपर के पहाड़ पर पहुंचते हैं। यहां मनतलाई लेक के पास दस दिन वे ध्यान करते हैं। फिर एक गांव में तीन दिन बिताते हैं। यहां जस्टिन के पास न खाने के लिए कोई फल-सब्ज़ी होता है और न ही ठंड से बचने के लिए लकड़ी जलाने का इंतज़ाम। जस्टिन कमज़ोर महसूस करता है और खुद को भूखा भी। वह इतना कष्ट सिर्फ इसलिए उठाना चाहता है ताकि वह इस तरह के जीवन का अनुभव कर सके।

जस्टिन ने किया नशा और साधु का जिक्र

जस्टिन ने किया नशा और साधु का जिक्र

इसके साथ ही ब्लॉग और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जस्टिन ने जो पोस्ट लिखे उनसे यह बात ज़ाहिर है कि उसने इस यात्रा में उस साधु सहित कई लोगों को चिलम, हशीश और अन्य ड्रग्स का सेवन करते देखा या इस तरह का व्यापार होते देखा था। ऐसे भी संकेत हैं कि ठंडे मौसम के कारण चिलम का सेवन जस्टिन ने भी किया था.। जस्टिन के गायब होने का मामला जब पुलिस के पास गया तो पुलिस ने उस साधु से पूछताछ की जिसके साथ जस्टिन ने पार्वती वैली की गुफाओं में काफी समय बिताया। उस साधु का कहना था कि मनतलाई लेक से पुल्गा तक दोनों ने साथ लौटना तय किया था। दोनों ठाकुर कुआं तक साथ आए थे और वहां से दोनों को टुंडा भोज तक पहुंचना था। ठाकुर कुआं से दोनों ने अलग होकर सफर किया और तय किया कि दोनों टुंडा भोज पर मिलेंगे। साधु का कहना था कि वह टुंडा भोज पहुंचा लेकिन जस्टिन वहां नहीं पहुंचा। कुछ इंतज़ार के बाद साधु ने आगे का अपना सफर जारी रखा। लेकिन साधु ने जस्टिन के बिना बेसकैंप तक पहुंचने का निर्णय बिना किसी खबर के क्यों लिया इस पर साधु ने कुछ नहीं कहा इसलिए पुलिस ने साधु के इस बयान पर आशंका जताते हुए कहा था कि इस कहानी की सच्चाई जानने के लिए पुलिस जांच करेगी। जस्टिन इस साधु के साथ पार्वती वैली में रहा। जस्टिन ने इसका नाम सत नरन गिरि बताया था।

मां सुजैन को लापता बेटे की तलाश

मां सुजैन को लापता बेटे की तलाश

जस्टिन की मां सुज़ैन रीब अपने फैमिली फ्रेंड जोनाथन स्लीक्स के साथ भारत पहुंची और उन्होंने उस साधु पर शक ज़ाहिर किया था। एम्बैसी और विदेश मंत्रालय से मिले आश्वासनों और सहयोग के बाद रीब ने हैलिकॉप्टर से करीब एक घंटे तक पार्वती वैली का मुआयना कर जस्टिन की खोज भी की। कई पुलिस अफसरों और स्थानीय लोगों से मुलाकात कर जस्टिन को तलाशने की कवायद की लेकिन जस्टिन का कोई पता न चला। रीब और उनके परिवार ने मिलकर जस्टिन को लेकर सोशल मीडिया पर भी कैंपेनिंग की. पुलिस की जांच में कुछ स्थानीय लोगों से पूछताछ के साथ ही उस साधु और कुली के बयान दर्ज करना शामिल रहा लेकिन इसके बाद भेजी गई सर्च टीमों को कोई और सुराग नहीं मिला। कुल्लू के इस वरिष्ठ पुलिस अफसर का इस मामले पर कहना था कि इस तरह की घटनाएं यहां आम होती जा रही हैं। हम बार-बार निर्देश और चेतावनी जारी करते हैं कि विदेश से आने वाले पर्यटक और ट्रेकर किसी भी अजनबी के साथ कहीं न जाएं लेकिन इसकी अनदेखी की जाती है। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि पुलिस जस्टिन की तलाश का सिलसिला जारी रखे हुए है और एक हद तक जारी रख सकती है। यह मुमकिन नहीं है कि हमेशा इस तलाश को जारी रखा जा सके।

पार्वती घाटी से पहले भी लापता हो चुके हैं पर्यटक

पार्वती घाटी से पहले भी लापता हो चुके हैं पर्यटक

जानकारों और पुलिस के भी कुछ लोगों की एक थ्योरी यह भी है कि यहां के युवाओं का एक बहुत बड़ा वर्ग बेरोजग़ार है इसलिए देशी-विदेशी पर्यटक अक्सर लूट का शिकार होते हैं। अगर पर्यटक अपने साथ महंगी या मूल्यवान चीज़ें ले जाते हैं तो ऐसे लोगों की नजऱों में आ जाते हैं। लूट के अलावा कभी-कभी ऐसी घटनाएं और गंभीर भी हो जाती हैं। एक और थ्योरी है प्राकृतिक दुर्घटना की। जस्टिन के मामले में यह आशंका भी व्यक्त की जा चुकी है वह किसी दुर्घटना का शिकार हुआ हो, यह भी संभव है. कहा गया कि बारिशों के मौसम में भू-स्खलन और पहाड़ी रास्तों पर फिसलन होना आम है। कई लोग इसी वजह से दुर्घटनाओं के शिकार होकर गहरी खाइयों में गिर जाते हैं। एक थ्योरी है कि दुर्घटना ड्रग्स के नशे में होना भी संभव है।

पार्वती वैली में खास तौर से विदेशी पर्यटकों के गायब होने का सिलसिला रहा है। यहां अब तक कई विदेशी पर्यटक लापता हो चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियां भी दबी ज़बान में मानती रही हैं कि विदेशी पर्यटकों को लूट कर कत्ल कर दिया जाता है। पांच साल पहले एक विदेशी को हंपटा पास में पीट-पीटकर मार डाला गया था जबकि टोंडा भोज में एक की जान पत्थर मार-मारकर ले ली गई थी। पार्वती वैली का एक और राज़ है ड्रग्स। मनाली और पार्वती वैली सहित उत्तर भारत से चरस, अफीम और अन्य ड्रग्स गोवा पहुंचती हैं जहां से दुनिया भर में इनकी तस्करी की जाती है। मनाली और हिमाचल के अन्य इलाकों में इजऱाइली, रशियन और इतालवी ड्रग्स माफिया सक्रिय हैं और कई केसों के सिलसिले में गोवा के ड्रग्स कारोबार के तार मनाली से जुड़ चुके हैं। यहां गायब होने वालों में से कभी कोई शव नदी में तैरता मिल चुका है तो कभी कोई कंकाल भी मिल चुका है। इन तमाम घटनाओं के मद्देनजऱ पार्वती वैली को ऑफ द रिकॉर्ड 'वैली ऑफ डेथ' कहा जाने लगा है।

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