हिमाचल प्रदेश: विधायकों को सीएम जयराम ठाकुर की दो टूक- काम नहीं करने वालों के कटेंगे टिकट

नई दिल्ली, 06 जून। हिमाचल प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर से सत्ता में वापसी करना चाहती है। लेकिन उसके सामने सत्ता विरोधी रुझान को कम करने की मुश्किल चुनौती है। लेकिन इस चुनौती का सामना करने के लिए भारतीय जनता पार्टी अपनी ही पार्टी के मौजूदा विधायको का पत्ता काटने की तैयारी कर रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस बात का इशारा भी कर दिया है। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर कई विधायकों को टिकट नहीं दिया जाएगा।

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जयराम ठाकुर से जब पूछा गया कि क्या उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की तरह मौजूदा विधायकों का टिकट इस चुनाव में कटेगा, मुख्यमंत्री ने कहा कि निश्चित तौर पर कुछ विधायकों का टिकट कटेगा, हालांकि यह कुछ सीमित संख्या में होगा। जयराम ठाकुर ने यह स्पष्ट नहीं बताया कि कितने मौजूदा विधायकों का पार्टी इस बार टिकट काट सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाई कमान इस मामले पर काफी सोच विचार करके काम करता है, काफी कुछ मुल्यांकन करने के बाद फैसला लिया जाता है। जिन लोगों ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है और सत्ता विरोधी रुझान का सामना कर रहे हैं उन्हें टिकट नहीं दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार एक बार फिर से वापसी करने के लिए तैयार है। हमने मुख्य प्रोजेक्ट्स की पहचान कर ली है, जोकि लोगों को फायदा देगी। फंड भी जारी कर दिए गए हैं। हमारा आंकलन है कि तकरीबन 5000 करोड़ रुपए के काम अगस्त माह तक पूरे हो जाएंगे। कांग्रेस के भीतर मतभेद चल रहा है, जोकि उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है। हमे उनसे चुनौती मिल रही है, आम आदमी पार्टी का यहां कहीं भी उपस्थिति नहीं है। मुख्यमंत्री ने इस बात को भी खारिज कर दिया है कि दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री को हिमाचल में आप के उदय के चलते गिरफ्तार किया गया है। सत्येंद्र जैन हिमाचल में आप के पार्टी इंचार्ज हैं।

कांग्रेस पार्टी को क्या वीरभद्र सिंह की विरासत से कोई लाभ होगा इसपर जयराम ठाकुर ने कहा कि पार्टी उनके नाम का इस्तेमाल कर रही है, क्योंकि प्रदेश में उनके पास कोई दूसरा नेता नहीं है। वीरभद्र सिंह जी के परिवार के साथ प्रदेश के लोगों को सहानुभूति है, यही वजह है कि उनके परिवार के लोगों को वरीयता दी जा रही है जिससे कि वीरभद्र सिंह जी के वफादारों को एकजुट रखा जा सके। लेकिन कांग्रेस वोटरों को अपने पक्ष में नहीं मोड सकेगी।

यूनियन सिविल कोड को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि हम जल्दबाजी में नहीं हैं, हमने उत्तराखंड के मॉडल का अध्ययन किया है, हम इसकी कानूनी तौर पर समीक्षा कर रहे हैं। जबकि घाटी में हिंसा को लेकर उन्होंने कहा कि सेना को स्वतंत्र अधिकार देना चाहिए।

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