Himahcal Eateries Row: भोजनालयों के मालिकों के नाम लिखने पर बंट गई कांग्रेस! शिमला से दिल्ली तक घमासान?
Owners Name on Himachal Eateries: ढाबों और भोजनालयों पर उसके मालिकों के नाम और पहचान लिखने के मुद्दे पर कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश सरकार में ही दो फाड़ हो गया है। बुधवार को प्रदेश के पीडब्ल्यूडी और शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा था कि सभी भोजनालयों और खाने-पीन की दुकानों पर मालिकों का आईडी लगाने का फैसला लिया गया है। लेकिन, गुरुवार को राज्य सरकार के प्रवक्ता ने यह सफाई देने की कोशिश की कि अभी इस बारे में फैसला नहीं लिया गया है।
दिलचस्प बात ये है कि बुधवार को सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार के कद्दावर मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने राज्य सरकार के फैसले की जानकारी फेसबुक पर दी थी, और उसमें एक दिन पहले यूपी की बीजेपी सरकार के इसी पर लिए गए फैसले वाली खबर को भी साझा किया था।

हिमाचल में भोजनालयों के मालिकों के नाम लिखने पर बंटी कांग्रेस!
विक्रमादित्य सिंह के पोस्ट से यह निकल कर आया है कि हिमाचल की कांग्रेस सरकार भी आखिरकार बीजेपी के फैसलों को ही अपनाना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि तभी से कांग्रेस के अंदर शिमला से लेकर दिल्ली तक में कोहराम की स्थिति पैदा हो गई थी।
लेकिन, गुरुवार को हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बयान जारी करके सफाई दी कि स्ट्रीट वेंडर्स को लेकर नीति बनाने के लिए एक समिति बनाई गई है और इसपर अभी फैसला लिया जाना है। बयान में उन्होंने कहा है, 'अभी तक राज्य सरकार ने विक्रेताओं की ओर से अपने स्टॉल पर नेमप्लेट या किसी अन्य प्रकार की पहचान प्रदर्शित करना अनिवार्य करने को लेकर कोई फैसला नहीं लिया है।'
कांग्रेस नेतृत्व की नाराजगी के बाद फैसले से पीछे हटी सुक्खू सरकार!
इस बीच इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि यह बयान कांग्रेस आला कमान की ओर से इस मसले पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और विक्रमादित्य सिंह से नाराजगी जताने के बाद जारी किया गया है। इस बारे में हिमाचल प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी राजीव शुक्ला ने इसपर हाई पार्टी कमान की नाराजगी से दोनों नेताओं को अवगत करा दिया है।
कांग्रेस के मुस्लिम सांसद की आपत्ति के बाद राहुल ने पलटवाया फैसला?
यह भी जानकारी है कि इस मसले को लेकर पार्टी के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने गुरुवार को कथित रूप से राहुल गांधी से शिकायत की, जिसके बाद प्रदेश की टॉप लीडरशिप को इस तरह के कदमों से दूर रहने को कह दिया गया है।
उधर शुक्ला की ओर से जारी बयान में कहा गया, 'मैंने दोनों से मुख्यमंत्री और विक्रमादित्य सिंह से बात की है। इस मामले में तथ्य यह है कि एक समिति गठित की गई है। विचार यह है कि स्ट्रीट वेंडर्स के लिए एक तय स्थान आवंटित किया जाए और उन्हें लाइसेंस दिए जाएं... ताकि उन्हें परेशान न किया जाए। ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है कि उन्हें अपना नाम लगाना है।'
उनके मुताबिक, 'योगी की तरह का कुछ भी नहीं है....वहां सब कुछ राजनीतिक और सांप्रदायिक हो गया है। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि सरकार या मुख्यमंत्री की ओर से (नाम जाहिर करने को लेकर) कोई निर्देश नहीं है।'












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