हिमाचल चुनाव 2017: सीट नंबर 63 शिमला (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र के बारे में जानिये

शिमला। शिमला विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सीट नंबर 63 है। शिमला जिले में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 54,905 मतदाता थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में सुरेश भारद्वाज इस क्षेत्र के विधायक चुने गए। शिमला ख़ूबसूरत हिल स्टेशन है जो हिमाचल प्रदेश की राजधानी है। समुद्र की सतह से 2202 मीटर की ऊँचाई पर स्थित इस जगह को 'समर रिफ्यूज' और 'हिल स्टेशनों की रानी' के रूप में भी जाना जाता है। वर्तमान का शिमला जिला 1972 में निर्मित किया गया था। इस जगह का यह नाम 'माँ काली' के दूसरे नाम 'श्यामला' से व्युत्पन्न है। सन् 1864 में इस जगह को ब्रिटिश भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया था। स्वतन्त्रता के बाद यह जगह कुछ समय तक पंजाब की राजधानी भी रही। बाद में शिमला को हिमाचल प्रदेश की राजधानी बना दिया गया।

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यह सुरम्य पहाड़ी क्षेत्र विभिन्न पर्यटकों को आकर्षित करता है। पर्यटक, एक फैले हुए खुले क्षेत्र रिज से, जो कि लक्कर बाज़ार और स्कैंडल पॉइंट से जुड़ा हुआ है, इस पर्वत श्रुंखला के लुभावने दृश्यों का आनंद ले सकते हैं। जाखू मंदिर भगवान 'हनुमान' को समर्पित है जो समुद्र की सतह से 8048 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। कर्नल जे .टी. बोइल्यू द्वारा डिज़ाइन की गई खूबसूरत क्राइस्ट चर्च, रंगीन ग्लासों से सजी हुई है जिनमें रिज के दृश्य दिखाई देते हैं।

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दोरजे ड्रैक मठ विहार, निंगमा परंपरा से संबंधित है जो तिब्बती बौद्ध संस्कृति को प्रदर्शित करता है। वहीं दूसरी ओर माँ काली देवी को समर्पित, काली बाड़ी मंदिर है जहाँ पूरे साल भक्तों का तांता लगा रहता है। दीवाली, नवरात्री और दुर्गा पूजा जैसे हिंदू त्योहार इस मंदिर में पूरी धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाए जाते हैं। भक्तगण, समुद्र तल से 1975 मीटर की ऊँचाई पर स्थित संकटमोचन मंदिर के दर्शन भी कर सकते हैं। यह मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है और सन् 1966 में निर्मित किया गया था। मंदिर के विभिन्न परिसरों में अलग-अलग देवी-देवताओं को प्रतिस्थापित किया गया है।

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शिमला प्राचीन विरासत इमारतों के लिए प्रसिद्ध है, जो ब्रिटिश वास्तु-कला शैली का प्रतिनिधित्व करती हैं। 'रोथनी कैसल', इन्हीं इमारतों में से एक है, जो 'एलन ऑक्टेवियन ह्यूम' का निवास स्थान हुआ करता था। पर्यटक 'मैनोर्विल हवेली' को भी देख सकते हैं जहां,सन् 1945 में लॉर्ड वावेल के साथ एक बैठक में आजादी के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल और मौलाना आजाद, रुके थे।

एक और आकर्षक विरासत भवन है, टाउन हॉल जिसे 1919 में बनाया गया था, वर्तमान में इस इमारत में शिमला नगर निगम कार्यालय का ऑफिस है। सन् 1888 में बनी 'वाइसरीगल लॉज' को 'राष्ट्रपति निवास' के नाम से भी जाना जाता है। यह एक छह मंजिला इमारत है जो उचित रखा-रखाव वाले लॉन और बागीचों से घिरी हुई है। 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी' वर्तमान में इसी इमारत में स्थित है। इस इमारत की नवजागरण वास्तुकला शैली इसे शिमला का आकर्षक और हॉट पर्यटन स्थल बनाती है।
राजनैतिक नजरिये से देखा जाये, तो शिमला में अधिकतर मतदाता बाहरी हैं। जो दो गुटों में बंटे रहते हैं। एक अप्पर शिमला का तो दूसरा लोअर हिमाचल के लोगों का। लोअर हिमाचल के यहां रहने वाले अधिकतर मतदाता भाजपा को समर्थन देते आये हैं। यहां दिलचस्प तथ्य यह है कि जब भी यहां वामपंथी अंदोलन हुये, उस दौरान हमेशा ही कांग्रेस पार्टी को नुकसान होता रहा है। वामपंथियों के संघर्ष का अंत में भाजपा को फायदा मिला है। इस बार भी कोटखाई प्रकरण के चलते वामपंथियों का उग्र अंदोलन होता रहा है। जिससे अप्पर शिमला में कांग्रेस की पकड़ कमजोर हुई है।

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शिमला से अभी तक चुने गये विधायक
वर्ष चुने गये विधायक पार्टी संबद्धता
2012 सुरेश भारद्वाज भाजपा
2007 सुरेश भारद्वाज भाजपा
2003 हरभजन सिंह भज्जी कांग्रेस
1998 नरेंदर बरागटा भाजपा
1993 राकेश सिंघा भाकपा
1990 सुरेश भारद्वाज भाजपा
1985 हरभजन सिंह कांग्रेस
1982 दौलत राम चौहान भाजपा
1977 दौलत राम चौहान जनता पार्टी

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सुरेश भारद्धाज किस्मत के धनी हैं
शिमला के विधायक सुरेश भारद्धाज किस्मत के धनी हैं। इस बार उनका पहले टिकट कटा, लेकिन बाद में फिर मिल गया। अब वह एक बार फिर भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में हैं। 65 वर्षीय भारद्धाज बीएससी व लॉ स्नातक हैं। छात्र काल में एबीवीपी से जुड़े रहे व बाद में राजनिति में आये। 1982 में प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रहे। उसके बाद 2003 से लेकर 2006 तक फिर भाजपा की कमान उन्होंने संभाली। 1990 में पहली बार विधायक चुने गये। उसके बाद 2007 में फिर विधायक बने। 2012 में भी उन्होंने शिमला से चुनाव जीता। विधानसभा में उन्हें भाजपा का मुख्य सचेतक चुना गया। अब फिर एक बार चुनाव मैदान में हैं। इस बार भी उनका कांग्रेस के पूर्व विधायक हरभजन सिंह भज्जी से मुकाबला है।
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