हिमाचल प्रदेश चुनाव 2017: सीट नंबर 49 नैना देवी(अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र के बारे में जानिये

शिमला। श्री नैना देवी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सीट नंबर 49 है। बिलासपुर जिले में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 61,477 मतदाता थे। यह क्षेत्र साल 2008 में, विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के अनुसरण में अस्तित्व में आया। 2012 के विधानसभा चुनाव में यहां से रणधीर शर्मा विधायक चुने गये।
नैना देवी मंदिर वह जगह है जहां सती की आंखें गिरीं । बताया जाता है कि एक लडक़ा अपने मवेशियों को चराने गया और देखा कि एक सफेद गाय अपने थनों से एक पत्थर पर दूध बरसा रही है। उसने अगले कई दिनों तक इसी बात को देखा। एक रात जब वह सो रहा था, उसने देवी माँ को सपने मे यह कहते हुए देखा कि वह पत्थर उनकी पिंडी है। नैना ने पूरी स्थिति और उसके सपने के बारे में राजा बीर चंद को बताया7 जब राजा ने देखा कि यह वास्तव में हो रहा है, उसने उसी स्थान पर श्री नयना देवी नाम के मंदिर का निर्माण करवाया।

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नैना देवी मंदिर महिशपीठ नाम से भी प्रसिद्ध है क्योंकि यहाँ पर माँ श्री नयना देवी जी ने महिषासुर का वध किया था7 किंवदंतियों के अनुसार, महिषासुर एक शक्तिशाली राक्षस था जिसे श्री ब्रह्मा द्वारा अमरता का वरदान प्राप्त था, लेकिन उस पर शर्त यह थी कि वह एक अविवाहित महिला द्वारा ही परास्त हो सकता था7इस वरदान के कारण, महिषासुर ने पृथ्वी और देवताओं पर आतंक मचाना शुरू कर दिया 7 राक्षस के साथ सामना करने के लिए सभी देवताओं ने अपनी शक्तियों को संयुक्त किया और एक देवी को बनाया जो उसे हरा सके7 देवी को सभी देवताओं द्वारा अलग अलग प्रकार के हथियारों की भेंट प्राप्त हुई। महिषासुर देवी की असीम सुंदरता से मंत्रमुग्ध हो गया और उसने शादी का प्रस्ताव देवी के समक्ष रखा। देवी ने उसे कहा कि अगर वह उसे हरा देगा तो वह उससे शादी कर लेगी। लड़ाई के दौरान, देवी ने दानव को परास्त किया और उसकी दोनों ऑंखें निकाल दीं। सिख गुरु गोबिंद सिंह जब उन्होंने मुगलों के खिलाफ अपनी सैन्य अभियान 1756 में छेड़ दिया, वह श्री नैना देवी गये और देवी का आशीर्वाद लेने के लिए एक महायज्ञ किया7 आशीर्वाद मिलने के बाद, उन्होंने सफलतापूर्वक मुगलों को हरा दिया। नैना देवी आज प्रसिद्ध तीर्थस्थल के रूप में उभर कर सामने आया है। यहां साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
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नैना देवी डिलिमिटेशन से पहले कोट कहलूर के नाम से जाना जाता था। नैना देवी चुनाव क्षेत्र में राजपूत मतदाता अधिक हैं। उसके बाद अनूसूचित जाति के मतदाता आते हैं। इस क्षेत्र को तीन भागों में बांटा जा सकता है। डिलिमिटेशन के दौरान कोटकहलूर की तीन पंचायतें सदर में चलीं गईं। जिसका नुक्सान कांग्रेस को हुआ। धानकोठी, जमथल व कसोल पंचायतें कांग्रेस के प्रभाव वाली थीं। जो कट गईं। क्षेत्र को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है। पंजाब से सटा स्वाघाट का इलाका मैदानी है तो नमहोल का इलाका पहाड़ी है। वहीं मध्य भाग में बस्सी बैल्ट है। एक समय यहां राम लाल ठाकुर की तूती बोलती थी। लेकिन आज रणधीर शर्मा यहां के कर्णधार हैं। लोागें की आजिविका का साधन अपने परंपरागत काम धंधे ही हैं।
नैना देवी (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र एक नजर में

श्री नैना देवी से अब तक चुने गये विधायक
वर्ष चुने गये विधायक पार्टी संबद्धता
2012 रणधीर शर्मा भाजपा

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विद्यार्थी परिषद से होकर विधायक का रास्ता तय किया रणधीर शर्मा ने
नैना देवी के विधायक रणधीर शर्मा एम ए हिन्दी के साथ ला ग्रेजूयूट हैं। 54 वर्षीय रणधीर शर्मा का एक बेटा है। आखिल भारतीय विद्यार्थी से होकर वह राजनिति में आये। छात्र जीवन में परिषद के संगठन सचिव रहे। और जम्मू काशमीर में संगठन को मजबूत करने के लिये अपनी अहम भूमिका अदा की। उसके बाद प्रदेश युवा मोर्चा के अध्यक्ष बने। स्थानीय राजनिति में उनका कोई लंबा चौड़ा योगदान नहीं रहा। 2007 में उन्होंने कोट कहलूर से पहली बार चुनाव जीता। जो कि बाद में नैना देवी बनी। उस समय पंजाब में अकाली सरकार थी। उसका फायदा उन्हें मिला। कहा जा सकता है कि किस्मत ने उनका साथ दिया व वह विधायक बन गये। व 2012 में नैना देवी से उन्होंने दोबारा चुनाव जीता। रणधीर आज प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता भी हैं।
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