आर-पार की लड़ाई के मूड में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह

21 विधायकों की पार्टी के आलाकमान को एक अलग से पत्र भेजकर कह दिया गया है कि इस दौर में पार्टी अध्यक्ष को बदला ना जाए। तो अब वीरभद्र सिंह ने जो दांव चला था वो उल्टा पड़ता नजर आ रहा है।

शिमला। आय से अधिक संपत्ति का मामला, कोटखाई गैंगरेप केस की काली छाया और अपनी बढ़ती उम्र हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के सामने है। ऐसे मुद्दे बनकर उभरे हैं कि उन्हें अपने राजनीतिक जीवन की आखिरी पारी में बगावत करने को मजबूर कर रहे हैं। यही वजह है कि अब वीरभद्र सिंह अपनी पार्टी अध्यक्ष के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं।

Himachal Pradesh CM Virbhadra Singh Political confront

वीरभद्र सिंह के लिए हालात इन दिनों कुछ अनुकूल नहीं चल रहे हैं। एक विपदा हटती है तो दूसरी तैयार हो जाती है। यही वजह है कि उन्हें अब गुस्सा भी आने लगा है। इन दिनों दिल्ली में डेरा जमाए वीरभद्र सिंह जब शिमला से दिल्ली गए तो वो अपने साथ पार्टी के मौजूदा 35 विधायकों का समर्थन लेकर गए, लेकिन दिल्ली पहुंचते ही उनकी तादाद मात्र 14 रह गई। यानि 21 विधायकों की पार्टी के आलाकमान को एक अलग से पत्र भेजकर कह दिया गया है कि इस दौर में पार्टी अध्यक्ष को बदला ना जाए। हिमाचल कांग्रेस में चल रहा घमासान लगातार बढ़ता जा रहा है। अब वीरभद्र सिंह ने जो दांव चला था वो उल्टा पड़ता नजर आ रहा है। जिससे अब उनके पास दवाब बनाने के सिवा कोई चारा भी नहीं है।

दरअसल वीरभद्र सिंह आने वाले चुनावों से पहले अपने लिए पार्टी का हाथ खुला चाह रहे हैं। ताकि आने वाले चुनावों में उन्हें मनमाफिक टिकट मिल सके। उनकी चिंता अपने बेटे के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी है। वीरभद्र सिंह चाह रहे हैं कि पार्टी इस बार उन्हें और उनके बेटे को टिकट दे। वहीं उनकी पत्नी पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह की हसरतें भी किसी से छिपी नहीं हैं। अपने मन की बात करने के लिए पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल से मुलाकात के दौरान कह दिया है कि चुनावों से पहले यदि बदलाव नहीं होता है तो वो ना तो चुनाव लड़ेंगे, ना ही कोई रणनीति तैयार करेंगे, हां प्रचार के लिए जरूर समय देंगे।

Himachal Pradesh CM Virbhadra Singh Political confront

उन्होंने कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में पार्टी का प्रचार रथ हांकना उनके वश की बात नहीं है। उनके खिलाफ पार्टी के लोग बयानबाजी करते हैं। जानबूझकर नीचा दिखाने के लिए वरिष्ठता को नजरअंदाज किया जाता है। नियुक्तियों तक में उनकी सहमति नहीं ली जाती, जबकि हाइकमान ने भी समन्वह बिठाकर आगे बढ़ने के निर्देश दे रखे हैं। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने दिल्ली में हुई इस मुलाकात के दौरान दो टूक कह दिया है कि मिशन रिपीट के लिए संगठन का मौजूदा ढांचा उन्हें पसंद नहीं है। इसी बीच उन्होंने विधायकों का वो वक्तव्य भी अहमद पटेल को सौंप दिया है, जिसमें वीरभद्र सिंह के पक्ष में ताल ठोंकी गई है।

बहरहाल, पाटी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी दोनों टूर पर हैं। ऐसे में राजनीतिक सलाहकार अब चुनावी बेला पर हाइकमान को क्या सलाह देते हैं, ये समय बताएगा। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने प्रदेश पार्टी मामलों के प्रभारी सुशील कुमार शिंदे से भी फोन पर बातचीत की है। शिंदे का हिमाचल प्रवास सितंबर के पहले हफ्ते से शुरू हो रहा है, जिसमें वो जिला स्तरीय टूर करेंगे। मुख्यमंत्री गुरुवार को दिल्ली से शिमला लौट रहे हैं।

Himachal Pradesh CM Virbhadra Singh Political confront

उधर, वीरभद्र सिंह समर्थक 35 विधायकों के सीएम के साथ होने का दावा तो कर रहे हैं। लेकिन सुक्खू के समर्थन में पत्र पे पत्र लिखने वाले 21 विधायक होने की बात से बेखबर हैं। वीरभद्र सिंह समर्थकों का कहना है कि विधायक दल की बैठक में चूंकि 27 विधायक ही मौजूद थे। लिहाजा उन्हीं के हस्ताक्षर हुए हैं, जबकि मुख्यमंत्री के समर्थन में पूरे 35 विधायक हैं। उधर पार्टी अध्यक्ष सुक्खू के समर्थक इस दावे को झूठा करार दे रहे हैं। गौरतलब है कि सुधीर शर्मा, आशा कुमारी, गंगूराम मुसाफिर और चंद्र कुमार के साथ-साथ कुलदीप कुमार मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पसंदीदा भावी अध्यक्ष बताए जा रहे हैं। बदलाव की स्थिति में इनमें से किसी एक को तैनात किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने आलाकमान को अपनी पसंद बता दी है लेकिन पार्टी आलाकमान इस नाजुक मौके पर पार्टी में बदलाव लाए जाने के मूड में दिखाई नहीं दे रहा।
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