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हरोली सीट पर ब्राह्मणों के बीच होती रही है जंग, Mukesh Agnihotri के आगे कमजोर पड़ी BJP

हरोली सीट पर ब्राह्मणों के बीच होती रही है जंग, Mukesh Agnihotri के आगे कमजोर पड़ी BJP

Haroli Assembly Seat: 12 नवंबर को हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में विधानसभा चुनाव (assembly elections) के लिए वोटिंग होनी है। वोटिंग से पहले मतदाताओं को अपने-अपने पक्ष में करने के लिए सत्ताधारी पार्टी बीजेपी समेत सभी राजनीतिक दल यु्द्धस्तर पर प्रचार-प्रसार में जुट गए है। तो वहीं, आज हम बात कर रहे हैं हरोली विधानसभा सीट (Haroli Assembly Seat) की। इस सीट से मुकेश अग्निहोत्री (Mukesh Agnihotri) इस बार ऊना जिले की हरोली सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। यह सीट अनारक्षित है और साल 2008 में विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के दौरान अस्तित्व में आई थी। हरोली सीट पर ब्राह्मण मतदाताओं का दबदबा रहा है।

Haroli Assembly Seat

हिमाचल कांग्रेस (Himachal Congress) के प्रमुख नेताओं में शुमार मुकेश अग्निहोत्री (Mukesh Agnihotri) इस बार मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं। यही वजह है कि इस बार हरोली का चुनाव खासा महत्व रखता है। इस बार मुकेश के चुनाव प्रचार में उनकी पत्नी सिमी और बेटी आस्था भी जुटी है। चूंकि प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी मुकेश को जाना पड़ रहा है। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री किस्मत के धनी हैं। पेशेवर पत्रकारिता को छोड़ उन्होंने राजनिति को अपनाया तो कामयाब होते गए। पंजाब के संगरूर जिले में जन्में 60 वर्षीय मुकेश पोस्ट ग्रेजूयेट हैं और उनकी एक बेटी है। शिमला में जनसत्ता के संवाददाता के तौर पर उन्होंने अपनी पहचान बनाई। बाद में दिल्ली में तैनाती मिली तो सपंर्कों को फायदा भी मिला और कांग्रेस पार्टी ने उन्हें टिकट दिया।

मुकेश अग्निहोत्री 2003 में पहली बार संतोखगढ़ से विधायक चुने गए। इसके बाद 2007 में हुए चुनावों में जनता ने फिर से उन्हें चुनकर विधानसभा भेजा। 2008 में डिलिमिटेशन में संतोखगढ़ हरोली चुनाव क्षेत्र बन गया और मुकेश 2012 में हरोली से चुनाव जीते। वीरभद्र सरकार में उद्योग, सूचना एवं जन संपर्क और संसदीय कार्य मंत्री बने। इसके बाद 2017 में चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस पार्टी के विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने। मुकेश अग्निहोत्री इस बार फिर से चुनाव मैदान में हैं। तो वहीं, भाजपा ने राम कुमार को मैदान में उतारा है, लेकिन भाजपा प्रत्याशी यहां कमजोर दिखाई दे रहे हैं।

विधानसभा पुनर्सीमांकन से पहले हरोली को संतोषगढ़ विधानसभा चुनाव क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता था। हरोली विधानसभा क्षेत्र में शुरू से ही ब्राह्मणों में जंग होती रही। भाजपा और कांग्रेस से हर बार ब्राह्मण प्रत्याशी ही मैदान में उतारे गए। इमरजेंसी के बाद जनता पार्टी ने भी ब्राह्मण प्रत्याशी को मैदान में उतार कर जंग जीत ली थी। पुनर्सीमांकन के बाद इस हलके का नाम हरोली रखा गया है। इससे पूर्व यह हलका संतोषगढ़ विधानसभा क्षेत्र से जाना जाता था। पुनर्सीमांकन के बाद अब संतोषगढ़ इलाका ऊना हलके में शामिल हो गया है। इस हलके से 1966 से लेकर विद्यासागर जोशी, कश्मीरी लाल जोशी, विजय जोशी विधायक रहे।

1998 में जय कृष्ण शर्मा भाजपा से चुनाव जीते तथा विधायक बने। जयकृष्ण शर्मा भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष भी रहे। इनके बाद 2003 और 2007 और 2012 व 2017 में मुकेश अग्निहोत्री लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। विजय जोशी इस हलके से चार बार विधायक बने तथा प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे। हलके में हर बार ब्राह्मणों में ही जंग होती रही और ब्राह्मणों का ही कब्जा रहा।

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