Himachal Election 2022: जुब्बल कोटखाई सीट पर रोहित ठाकुर का भविष्य लगा दांव पर

Himachal Election 2022: हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले की जुब्बल कोटखाई विधानसभा सीट का अपना अलग महत्व है। दिवंगत भाजपा नेता नरेंद्र बरागटा की कर्मभूमि में उनके निधन के बाद बीते साल हुए उपचुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी रोहित ठाकुर ने विजय हासिल की थी। हालांकि, नरेंद्र बरागटा के बेटे चेतन बरागटा अपनी टिकट की दावेदारी करते रहे। लेकिन, उन्हें भाजपा ने प्रत्याशी नहीं बनाया और उन्होंने बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड भाजपा को हराने में अहम भूमिका निभाई। लेकिन इस बार हालात बदले हुए और चेतन बरागटा की भाजपा में एंट्री हो चुकी है। भाजपा में शमिल होने के बाद चेतन बरागटा टिकट के प्रमुख दावेदार भी हैं, जिससे कांग्रेस नेता रोहित ठाकुर का राजनीतिक भविष्य दांव पर लगा है।

Himachal Election 2022: Congress leader Rohit Thakur Jubbal Kotkhai assembly seat

हालांकि, बीते साल उप चुनावों में भाजपा नेता चेतन बरागटा की बगावत की वजह से भाजपा प्रत्याशी नीलम सरैक अपनी जमानत भी नहीं बचा पाई थीं। उप चुनावों में रोहित ठाकुर ने 29447 वोट प्राप्त किए और भाजपा के बागी दिवंगत नरेंद्र बरागटा के बेटे चेतन बरागटा ने आजाद प्रत्याशी के तौर पर 23344 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे। जबकि, भाजपा प्रत्याशी नीलम सरैक तीसरे स्थान पर रहीं। भाजपा प्रत्याशी नीलम सरैक अपनी जमानत भी नहीं बचा पाई। भाजपा की नीलम सरैक को 2584 और निर्दलीय प्रत्याशी सुमन कदम को 170 वोट मिले। नोटा 172 मत रहे।

शिमला जिला के जुब्बल कोटखाई से कांग्रेस पार्टी के मौजूदा विधायक रोहित ठाकुर का जन्म 14 अगस्त 1974 को हुआ। रोहित जुब्बल-कोटखाई के जुब्बल तहसील की ग्राम पंचायत धार के पौटा गांव के निवासी हैं। उन्होंने स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त की और डीएवी कॉलेज चंडीगढ़ से बीए राजनीति विज्ञान की शिक्षा ग्रहण की। राजनीति रोहित ठाकुर को अपने दादा पूर्व मुख्यमंत्री ठाकुर रामलाल से विरासत में मिली। वर्ष 2002 में दादा के निधन के बाद रोहित ठाकुर ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। रोहित ने पहली बार वर्ष 2003 में चुनाव लड़ा और जीत प्राप्त की।

उस वक्त उनकी 27 साल की उम्र थी। इससे पूर्व युवा कांग्रेस में सक्रिय थे। इसके बाद 2012 में चुनाव जीता और पिछले उप चुनावों में एक बार फिर जीत हासिल की। वीरभद्र सरकार में रोहित ठाकुर मुख्य संसदीय सचिव भी रह चुके हैं। रोहित ठाकुर को अब तक अपने राजनीतिक जीवन में तीन बार जीते और दो बार हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस के टिकट पर उनका मुकाबला हमेशा भाजपा नेता पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा से ही रहा।

दरअसल, उप चुनावों के दौरान भाजपा के लिए चेतन बरागटा की उपेक्षा भारी पड़ी। जिससे भाजपा के हाथ से यह सीट छिन गई। भाजपा विधायक नरेंद्र बरागटा के निधन से यह सीट खाली हुई थी। बताया जाता है कि यहां उप चुनावों के दौरान पहले भाजपा ने उनके बेटे चेतन बरागटा को मैदान में उतारने की बात कही। लेकिन आखिरी मौके पर नीलम सरैइक को टिकट दे दिया। उसके बाद चेतन बरागटा ने बगावत कर दी। जिसका नुकसान भाजपा को हुआ।

हालांकि एक जमाने में यहां भाजपा का दबदबा रहा है। पूरी सेब बेल्ट में बरागटा परिवार का खासा दबदबा रहा है, लेकिन इस बार संगठन मंत्री पवन राणा के दबाव के चलते सीएम जयराम ठाकुर भी चेतन बरागटा के टिकट की पैरवी नहीं कर पाए। इसका नुकसान पार्टी को हुआ। व चेतन की बगावत की वजह से भाजपा की यहां खूब फजीहत हुई। लेकिन इस बार यहां हालात बदले हैं, चेतन बरागटा भाजपा में आ चुके हैं। इस बार उन्हें ही टिकट मिलने की संभावना है, जिससे कांग्रेस विधायक रोहित ठाकुर पर अपनी सीट बचाने का दवाब है।

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