Himachal: बिक्रम ठाकुर की राहों में अपनों ने बिखेर दिए कांटे, राम रहीम के सत्संग में मांगा था जीत का आशीर्वाद

Himachal: बिक्रम ठाकुर की राहों में अपनों ने बिखेर दिए कांटे, राम रहीम के सत्संग में मांगा था जीत का आशीर्वाद

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों (Himachal Pradesh Assembly Elections) में इन दिनों नित नए विवाद सामने आ रहे हैं। चुनावी मौसम में पैरोल पर जेल से बाहर आए गुरमीत राम रहीम सिंह (Gurmeet Ram Rahim Singh) से उनके सत्संग में आर्शीवाद लेकर निहाल हुए प्रदेश के उद्योग मंत्री बिक्रम ठाकुर जसवां परागपुर से अपने चुनाव लड़ने से अधिक राम रहीम से आर्शीवाद लेने को लेकर चर्चा में हैं। कांग्रेस सहित दूसरे दल उन्हें इसको लेकर घेर रहे हैं। तो वहीं, दूसरी ओर भाजपा इस मामले पर मौन साध चुकी है। विवाद का ही असर रहा है कि अब यहां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुनावी सभा भाजपा को रद्द करना पड़ा है।

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    बिक्रम ठाकुर की राहों में अपनों ने बिखेर दिए कांटे,राम रहीम के सत्संग में मांगा था जीत का आशीर्वाद
    Himachal Election 2021: Vikram Thakur Jaswan Paragpur Gurmeet Ram Rahim Singh

    हिमाचल सीएम जय राम ठाकुर के ताकतवर मंत्री के लिए इस बार जसवां परागपुर में अपने ही चुनौती बन कर सामने आए हैं। हमीरपुर संसदीय चुनाव क्षेत्र के तहत कांगड़ा जिला में आने वाला जसवां परागपुर 2008 के परिसीमन में अस्तित्व में आया था। इससे पहले इसे जसवां के नाम से जाना जाता था। यह सीट अनारक्षित है। प्रदेश विधानसभा की 11 नंबर सीट पर भाजपा के बिक्रम ठाकुर चुने गए इस बार भी भाजपा ने उन्हें ही मैदान में उतारा है। जसवां-परागपुर में विधानसभा में बाद में जुड़ा परागपुर अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए खास तौर पर दुनिया भर में जाना जाता है। यह भारत पहला हेरिटेज गांव है।

    मुगल साम्राज्य और ब्रिटिश काल का गुलामी भरा जीवन भी परागपुर गांव के लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से विमुख नहीं कर पाया था। आधुनिकता की अंधी दौड़ में यहां लोग इनकी सुरक्षा में जुटे रहे। 50-100 साल नहीं तीन शताब्दियों से यह गांव गौरवमयी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को अपने में संजोए है। इसी का प्रतिफल है कि परागपुर को देश का पहला धरोहर गांव होने का गौरव हासिल हुआ। गांव वालों की कोशिश से ही यह भारत का पहला धरोहर गांव कहलाता है। यहां का हेरिटेज होटल पर्यटकों का पसंदीदा ठिकाना हैं। नादौन और चिंतपूर्णी से जुड़ी इस विधानसभा में कुल 59 पंचायतें हैं। जसवां परागपुर विधानसभा चुनाव क्षेत्र करीब 109 किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। एक तरफ नादौन तो दूसरी तरफ चिंतपूर्णी व देहरा से सटा यह इलाका है।

    यह क्षेत्र जसवां व परागपुर दो ब्लाकों में बंटा है। परागपुर में 36 पंचायतें हैं तो जसवां में 23 पंचायतें हैं। यह राजपूत बहुल क्षेत्र है। दूसरे स्थान पर अनुसूचित जाति के मतदाता हैं। उसके बाद ओबीसी व ब्राह्मण मतदाता आते हैं। जसवां परागपुर में इस बार बिक्रम ठाकुर की राहों में भाजपा के ही दो बागियों ने कांटे बिखेर दिए है। भाजपा और संघ परिवार करीबी संजय पराशर ने बगावत कर निर्दलीय चुनाव लडने के लिए अपना नामांकन भर दिया है। वहीं, समाजसेवी मुकेश ठाकुर भी निर्दलीय चुनाव लड रहे हैं। मुकेश ठाकुर जो कि कोरोना काल के दौरान जसवां परागपुर के लोगों के लिए देवदूत बनकर सामने आये थे। उस दौरान उन्होंने हर किसी की मदद की। इस सबसे बिक्रम ठाकुर की परेशानियां बढ़ गई हैं और उनके वोट बैंक में सेंध लग रही है।

    इसी के चलते बिक्रम ठाकुर ने इलाके के दलित मतदाताओं को साधने के लिए राम रहीम वाला पैंतरा चला। लेकिन वो दांव भी लगता है, उल्टा पड गया। भाजपा की ओर से संजय पराशर को मनाने की कोशिशें की जा रही है। हालांकि, वह अपने निर्णय पर अडिग हैं। तिकोने मुकाबले में बिक्रम ठाकुर का चुनाव जीतना मुश्किल है। तो वहीं, इसका सीधा लाभ कांग्रेस को मिल सकता है। जसवां परागपुर में इस बार 39008 महिला व 40848 पुरुष अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

    जसवां परागपुर से अभी तक चुने गये विधायक
    वर्ष चुने गये विधायक पार्टी संबद्धता
    2017 बिक्रम ठाकुर भाजपा
    2012 बिक्रम सिंह भाजपा
    2007 निखिल राजौर मनु शर्मा कांग्रेस
    2003 बिक्रम ठाकुर भाजपा
    1998 विप्लव ठाकुर कांग्रेस
    1993 विप्लव ठाकुर कांग्रेस
    1990 काशमीर सिंह राणा भाजपा
    1985 विप्लव ठाकुर कांग्रेस
    1982 आज्ञा राम ठाकुर भाजपा
    1977 आज्ञा राम ठाकुर जनता पार्टी

    बिक्रम ठाकुर को राजनीति विरासत में नहीं मिली
    जसवां के विधायक व्रिकम ठाकुर 28 अगस्त 1964 को जसवां तहसील के जोल गांव में पैदा हुए। विज्ञान स्नातक ठाकुर का एक बेटा व एक बेटी है। पहली बार वह 2003 में जसवां जो अब जसवां परागपुर के नाम से जाना जाता है, से विधायक चुने गए। उसके बाद 2012 में विधायक चुने गए। ब्रिकम ठाकुर प्रदेश जनता युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष भी रहे हैं। सरकार में खादी बोर्ड और प्रदेश वन निगम के उपाध्यक्ष पद पर भी रहे हैं। 2017 के चुनावों में मिली जीत के बाद बिक्रम ठाकुर उद्योग एवं परिवहन मंत्री बने। उन्हें राजनीति विरासत में नहीं मिली व पहले नौकरी करते थे।

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