हिमाचल चुनाव: BJP और कांग्रेस के लिए मुसीबत बने ये बागी नेता

शिमला। प्रदेश के चुनावी अखाड़े में अब भाजपा और कांग्रेस के बन बनाए समीकरणों को बागी नेता बिगाड़ने में जुट गए हैं। दोनों ही दल बागियों को मनाने में नाकाम रहे हैं। हालांकि कुछ जगह कामयाबी भी मिली है लेकिन हालात ज्यादा सुखद नहीं माने जा सकते। कुछ मंत्री और विधायक हालांकि अपनी राजनैतिक महत्वाकाक्षाओं को परवान नहीं चढ़ा पाये हैं। लेकिन कुछ ने अपने इरादे अंतिम समय में भी नहीं बदले और अब मैदान में डट गये हैं। कांग्रेस पार्टी बिलासपुर सदर में पूर्व विधायक तिलक राज, भोरंज में प्रेम कौशल, मनाली में धर्मवीर धामी को मनाने में कामयाब रही है। वहीं भाजपा इस मामले में कमजोर रही है। हालांकि कुसुमपटी में अपनी भाभी ज्योति सेन के खिलाफ बगावत करने वाले पृथ्वी विक्रम सेन को मनाने में कामयाब रही है। लेकिन बाकी स्थानों पर भाजपा के बागी मोर्चे पर डटे हैं।

हिमाचल चुनाव: BJP और कांग्रेस के लिए मुसीबत बने ये बागी नेता

चुनावी मैदान में कांग्रेस के छह और भाजपा के चार बागी अभी भी प्रमुख तौर पर अपने अपने दलों को नुकसान पहुंचाने की स्थिति में हैं। विशेषकर कांगड़ा जिला के शाहपुर में पूर्व पर्यटन मंत्री और 5 बार विधायक रहे मेजर विजय सिंह मनकोटिया की बगावत कांग्रेस को भारी पड़ रही है। माना जा रहा है कि यहां कांग्रेस प्रत्याशी, केवल सिंह पठानिया अपनी जमानत भी बचा लें तो बड़ी बात होगी। वैसे पठानिया पहले भी अपनी जमानत गंवा चुके हैं। यहां मनकोटिया के प्रति सहानूभूति लहर चल रही है। वहीं ज्वालामुखी में कांग्रेस प्रत्याशी संजय रतन की हालत कांग्रेस के बागी जिला परिषद सदस्य विजेंदर धीमान ने खराब करके रख दी है। कांग्रेस का बड़ा वर्ग धीमान के साथ ताल ठोक रहा है। देहरा में कांग्रेस प्रत्याशी विप्लव ठाकुर की जमीन निर्दलीय चुनाव लड़ रहे होशियार सिंह ने खराब करके रखी है।

इसी तरह रामपुर बुशहर में कांग्रेस के पूर्व मंत्री सिंघी राम जो यहां से दो बार विधायक रह चुके हैं पार्टी से बगावत कर चुनाव मैदान में हैं। सिंघी राम ने कांग्रेस प्रत्याशी नंद लाल की नाक में दम कर दिया है। कांग्रेस पार्टी अंतिम समय तक बागियों को मनाने की कोशिश करती रही। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्दर सिंह हुड्डा और उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत बागियों को मनाने में जुटे रहे। यहां तक खुद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भी सीधे संपर्क साधा लेकिन बात नहीं बनी। कांग्रेस के प्रमुख बागी नेता मेजर मनकोटिया, सिंघी राम के अलावा करसोग के पूर्व विधायक मस्त राम, शिमला शहरी से हरीश जनाराथा, पूर्ण चंद ठाकुर दरंग, हरदीप बावा नालागढ़ से कांग्रेस के बागी मैदान में हैं। जिनकी वजह से कांग्रेस प्रत्याशी असहज महसूस कर रहे हैं।

इसी तरह भाजपा की बात की जाए तो चंबा से पूर्व विधायक बीके चौहान, पालमपुर में प्रवीण शर्मा, सिरमौर जिला के रेणूका में ह्रदय राम और कांगड़ा के ज्वाली में पूर्व राजस्व मंत्री राजन सुशांत जो हाल ही में आम आदमी पार्टी का साथ छोड़ भाजपा में आए हैं और फतेहपुर में पिछले चुनावों में भाजपा प्रत्याशी रहे बलदेव ठाकुर भाजपा प्रत्याशियों के राजनैतिक भविष्य को खतरे में डाले हुए। भाजपा के केन्द्रीय नेता संगठन मंत्री राम लाल, चुनाव प्रभारी थावर चंद गहलोत, पार्टी प्रभारी मंगल पांडे और केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा की बागियों को मनाने की सारी कोशिशें बेकार साबित हुई हैं। हालात इस कदर बदले हैं कि कल तक मिशन फिफ्टी का दम भरने वाली आज बहुमत के करीब सीटें लाने के लिये जोर लगाने पर मजबूर हुई है। भाजपा नेता भी अब मानने लगे हैं कि पार्टी को बागियों की वजह से खासा नुकसान होगा।

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