'कांग्रेस पार्टी में कौन काला और कौन सफेद कौआ, सबको पता है'
शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बुधवार को पार्टी में अपने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी में काले और सफेद कौवे हैं। उनके बारे में कांग्रेस का हर शख्स वाकिफ है। आज पीठ में पीछे छुरा घोंपने वाले विश्वासघातियों से खतरा है। जो कांग्रेस में रहते हुये भाजपा के साथ गलबाहियां करते हैं। उनकी बदौलत ही पार्टी रसातल में जा रही है। ऐसे लोगों के लिये पार्टी में कोई स्थान नहीं होना चाहिये। साथ ही उन्हें पार्टी में कोई तव्वज्जो नहीं दी जानी चाहिए।

दरअसल वीरभद्र सिंह ने अपनी ही कबीना के एक मंत्री पर इशारों इशारों में ही हमला बोल कर अपने इरादे साफ कर दिये कि वह आसानी से हार मानने वालों में नहीं हैं। वहीं पार्टी के भीतर यह बहस तेज हो गई है कि आखिर कौवा है कौन। उधर कांगड़ा से तेजतर्रार नेता परिवहन मंत्री जीएस बाली के सर्मथकों को आरोप है कि वीरभद्र सिंह उनके नेता बाली को बेवजह निशाना बना रहे हैं। दिलचस्प यह भी है कि बाली इस बैठक में नहीं थे। उन्होंने अलग से गुरूवार को नगरोटा बगवां में शिन्दे का कार्यक्रम तय किया है। जिसमें वीरभद्र सिंह नहीं जा रहे हैं। जाहिर यह दोनों नेताओं में आपसी खींचतान सामने आ गई है। बाली भी अपने आपको मुख्यमंत्री के दावेदारों में शुमार करते रहे हैं।
वीरभद्र सिंह के भाषण के बाद सुशील कुमार शिन्दे ने कहा कि पार्टी में गुटबाजी नई नहीं है। ऐसा पहले भी होता रहा है। लेकिन हमारा मकसद प्रदेश में दोबारा कांग्रेस सरकार को लाना होना चाहिये। उन्होंने याद दिलाया कि 1992 में भी वीरभद्र सिंह व सुखराम खेमों में हिमाचल कांग्रेस बंटी थी। लेकिन फिर भी चुनावों में कांग्रेस ने ही जीत दरज की। शिन्दे ने कहा कि केंद्र सरकार की नाकमियों के चलते जनता आज परेशान हैं। केवल कांग्रेस ही देश और प्रदेश को सही दिशा दे सकती है। बीजेपी की नाकामियों को देखते हुए जनता कांग्रेस में विश्वास जताएगी।
प्रदेश पार्टी अध्यक्ष सुखविन्दर सिंह सुक्खू ने पार्टी में गुटबाजी को लेकर कुछ नहीं कहा, लेकिन पार्टी के भविष्य पर चिंता जाहिर की। धर्मशाला में वीरभद्र सिंह खेमे ने अपनी ताकत दिखाते हुये जगह जगह बैनर लगाये थे। जिनमें जीएस बाली को छोडक़र सभी विधायकों की तस्वीरें लगी थीं। बाली अब गुरूवार को नगरोटा बगवां में अपनी ताकत दिखायेंगे। लेकिन बाली के कार्यक्रम में कांगड़ा में होते हुये वीरभद्र सिंह नहीं जायेंगे।












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