भारी तबाही के बीच हिमाचल सरकार का बड़ा फैसला, राज्य 'प्राकृतिक आपदा प्रभावित क्षेत्र' घोषित
भूस्खलन, भारी बारिश के बीच सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इससे पहले राज्य में हुए नुकसान का ब्यौरा दिया। वहीं अब राज्य सरकार ने प्रभावितों के हित में बड़ा कदम उठाया है।
हिमाचल प्रदेश में इस बार बारिश के तांडव के चलते भारी तबाही हुई है। राज्य में अब तक बारिश के बीच 74 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। राज्य ने अब तक 10 हजार करोड़ से अधिक का नुकसान झेला है। ऐसे में प्रदेश सरकार ने शुक्रवार (18 अगस्त) को बड़ा फैसला लिया। जिसके तहत पूरे राज्य को प्राकृतिक आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित कर दिया गया है।
भारी तबाही के बावजूद हिमाचल प्रदेश से संकट के बादल छंटने का नाम नहीं ले रहे। मौसम विभाग की ओर जारी ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक राज्य में 21 अगस्त से फिर बारिश का दौर शुरू होगा। प्रदेश में अगले 3 से 4 दिनों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। ऐसे में राज्य के विभिन्न हिस्सों में भूस्खलन को लेकर अलर्ट जारी किया जा चुका है। मौसम वैज्ञानिकों ने शिमला से लेकर बिलासपुर तक के कई इलाकों में बारिश की संभावना व्यक्त की है। ऐसे में इलाकों में लोगों को लिए अलर्ट जारी कर दिया गया है। राज्य में मौसम विभाग ने तीन से चार दिन का यलो अलर्ट जारी किया है।

हिमचाल में लगातार मूसलाधार बारिश की वजह से कई जगह पहाड़ों दरारें आ गई हैं। जिसके चलते भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। नदियों के उफना पर हैं। निचले इलाकों में बाढ़ के हालात हैं। कई इलाकों में सड़कें नदी या फिर नालों में बह गईं, जिससे क्षेत्र में इलाकों को बीच संपर्क टूट गया।
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अब तक 74 मौत, 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान
हिमाचल प्रदेश के शिमला में शिव मंदिर के मलबे से एक और शव बरामद हुआ है। चंबा जिले में दो लोगों की मौत हुई है। इन तीन मौतों का आंकड़ा पहले के आंकड़े में जोड़ने के बाद प्रदेश में बारिश की वजह से मौतों का आंकड़ा 74 पहुंच गया है। राज्य में इस बीच कुल 875 सड़कें बंद हो चुकी हैं। राज्य सरकार के मुताबिक बारिश और भूस्खलन से अब तक 10,000 करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ है। वहीं रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल में 24 जून को मानसून की शुरुआत हुई थी, जिसके बाद से राज्य में अब तक बारिश की जुड़े हादसों और घटनाओं के चलते कुल 217 लोगों की मौत हो चुकी है।












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