कुवैत में भुखमरी के कगार पर 800 भारतीय, मोदी सरकार से गुहार

भारतीय कामगारों की दुर्दशा के बारे में हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के ज्वालामुखी कस्बे के बाशिन्दे सुक्रदीन ने अपने परिजनों को स्काइप पर भेजे संदेश में जानकारी दी है।

शिमला। अक्सर अरब देशों में पैसा कमाने क लिये भारतीय लालायित रहते हैं। जब वहां कंपनियों की धोखाधड़ी का शिकार होते हैं तो उन्हें भूखों मरने की नौबत भी आ जाती है। कुछ ऐसा ही मामला कुवैत में फंसे करीब आठ सौ भारतीयों का है जो इन दिनों दाने-दाने के लिये मोहताज हैं।

Eight hundred Indians trapped in Kauwait

भारतीय कामगारों की दुर्दशा के बारे में हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के ज्वालामुखी कस्बे के बाशिन्दे सुक्रदीन ने अपने परिजनों को स्काइप पर भेजे संदेश में जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि कुवैत की खुराफी नैशनल कंपनी में भारतीय मूल के 800 के लगभग कर्मचारी फंसे है। मामले की जानकारी देते हुये बली मोहम्मद ने बताया कि उनके दामाद सुक्रदीन जो कुवैत में इसी कंपनी में कार्यरत है, ने स्काइप मैसेज में बताया है कि देश के लगभग 800 नौजवान कुवैत में फंसे हैं व भारत सरकार से मदद की आस में वक्त कट रहा हैं।

Eight hundred Indians trapped in Kauwait

तमाम लोग अपने परिजनों को किसी न किसी माध्यम से सूचना भेज कर मदद की गुहार लगा रहे हैं ताकि उनको वहां से निकाला जा सके। कुवैत में फंसे यह लोग अब तो बाहर भी नहीं निकल पा रहे हैं व भूखे वक्त काटने को मजबूर हैं।

बली मोहम्मद ने बताया कि कंपनी ने भारतीय मूल के 800 के लगभग कर्मचारियों को निकाल दिया है। उनका 3 माह का नोटिस पीरियड समाप्त हो चुका है। वे नोटिस मिलने के 6 माह बाद भी यहां फंसे हैं। उनको कंपनी ने पैसों का भुगतान भी नहीं किया है। पिछले एक साल से उनको वेतन भी नहीं दिया गया है। उनका रेजिडेंस वीजा भी समाप्त हो गया है, कंपनी उनको रिन्यू नहीं करवा रही है। उन्हें कोई मेडीकल ट्रीटमैंट नहीं मिल रहा है क्योंकि रेजिडेंसी के बिना न तो वहां पर कोई सफर कर सकता है और न ही उनका कोई इलाज होगा। हालात यही रहे तो आत्महत्या करने को मजबूर होंगे।

Eight hundred Indians trapped in Kauwait

उन्होंने मोदी सरकार व अपने परिजनों से इस मुसीबत की घड़ी में उनकी मदद करने की गुहार लगाई है ताकि वे अपने देश भारत आ सकें। बली मोहम्मद ने भारत व प्रदेश सरकार से उनकी मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि वे सांसद शांता कुमार से आग्रह करते हैं कि वे विदेश मंत्रालय से संपर्क करके उनके परिजनों को वहां से निकालने में मदद करें। वे कुछ लोगों के साथ सांसद शांता कुमार सांसद व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री से मिल कर अपनी समस्या उनके समक्ष रखेंगे ताकि कोई रास्ता निकल आए।

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