'GST ऐसा फुटबॉल है जिसे हर कोई अपने तरीके से किक मार रहा है'
शिमला। जीएसटी काउन्सिल की आगामी 6 अक्टूबर को होने वाली बैठक के मद्देनज़र कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने जीएसटी काउन्सिल से जोरदार शब्दों में आग्रह किया है की जीएसटी में आ रही व्यापारियों की परेशानियों, विसंगतियों, असमानताओं और जीएसटी पोर्टल की अक्षमता को दूर करने के लिए तुरंत कदम उठाये जाएं जिससे व्यापारी आसानी से जीएसटी का कर पालन कर सकें।

कैट ने कहा की जीएसटी पोर्टल की असफलता और जीएसटी प्रक्रिया में फैले भ्रम एवं जीएसटी पर किसी नोडल एजेंसी के न होने से जीएसटी के स्वरूप को विकृत कर दिया है। जीएसटी एक तरीके से फुटबॉल बन गया है जिसे हर कोई अपनी तरह से किक मार रहा है और व्यापारी उसे पकड़ने के लिए चारों तरफ भाग रहा है ।
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी.सी.भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा की जीएसटी कॉउन्सिल की मीटिंग रूटीन टाइप न होकर व्यापारियों द्वारा जीएसटी पर उठाये गए सवालों पर गंभीर रूप से विचार करे क्योंकि देश भर के व्यापारियों में बेहद भ्रामक और आक्रोश का वातावरण है। यह एक तरीके की बगावत की स्थिति है जिसके कारण व्यापारी बुरी तरह निराश और हताश हो गया है ।
कैट ने मांग की है की यदि माल बिक्री करने वाला टैक्स जमा नहीं कराता है तो ख़रीदने वाले व्यापारी पर कोई ज़िम्मेदारी नहीं होनी चाहिए। रिवर्स चार्ज प्रावधान बिलकुल अप्रासंगिक है और राजस्व पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा इसलिए इसको समाप्त किया जाए । जीएसटी रिटर्न 100 करोड़ से अधिक की टर्नओवर पर लागू हो बाक़ी सब लोग रिटर्न तिमाही भरें लेकिन टैक्स हर महीने जमा कराए ।ई वे बिल एक लाख से ज़्यादा कीमत की अंतरराज्यीय बिक्री पर ही लागू हो । एचएसएन कोड सिर्फ़ मेन्यूफैंकचरर पर ही लागू हो और व्यापारियों को इससे मुक्त रखा जाए ।
जीएसटी पोर्टल के काम न करने और जीएसटी की कोई मॉनिटरिंग व्यवस्था न होने के कारण केवल 100 दिनों में ही जीएसटी बड़े विवाद में आ गया है। श्री भरतिया एवं श्री खंडेलवाल ने कहा की जीएसटी कॉउन्सिल अपनी आगामी बैठक में कर एवं प्रक्रिया तथा जीएसटी पोर्टल से सम्बंधित विषय जो कैट एवं अन्य संगठनों ने उठाये हैं उन पर गंभीरता से विचार करेगी और कारगर उपाय उठाएगी। कैट ने कहा है की 28 % प्रतिशत के कर स्लैब पर विशेष ध्यान देकर उसमें ऐसी वस्तुएं जो किसी भी रूप में विलासिता अथवा नकारात्मक नहीं हैं लेकिन 28 % के स्लैब में डाली गयी हैं को वहां से निकल कर उनके उचित लोअर स्लैब में डाला जायेगा। दोनों व्यापारी नेताओं ने कहा की उपभोक्ता 28 % के कर को वस्तु की एक तिहाई कीमत मानता है और उसे कर के रूप में देने के लिए तैयार नहीं है।
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