sant baba ram singh news: संत बाबा राम सिंह का आज 5 फीट ऊंचे चबूतरे पर अंतिम संस्कार
Sant Baba Ram Singh Last Rites: करनाल। केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले संत बाबा राम सिंह की आज अंत्येष्टि होगी। निसिंग के गांव सिंघड़ा में पांच फीट ऊंचे चबूतरे पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। सिंघड़ा गांव में देश-दुनिया के हजारों लोग एकत्रित हो रहे हैं। बीते रोज भी करीब १० हजार लोगों ने उनके अंतिम दर्शन किए। आज यानी कि शुक्रवार को सुबह ग्यारह बजे से उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू होगी।

अंतिम संस्कार आज
इससे दो दिन पहले ही करनाल के मेडिकल हॉस्पिटल में संत राम सिंह के शव का पोस्टमार्टम हुआ था। डॉक्टरों ने उनकी मौत की साफ वजह गोली लगना ही बताई। बता दिया जाए कि, रामसिंह ने बीते बुधवार की शाम उस वक्त खुद को गोली मार ली, जब वह सिंधु बॉर्डर पर किसानों के साथ आंदोलनरत थे। उन्होंने कहा था कि, वो किसानों की मौजूदा हालत से काफी दुखी हैं। सरकार के कानून किसानों को बर्बाद कर देंगे। मैं इस पीड़ा में ही जान दे रहा हूं।' ऐसा कहने के कुछ ही देर बाद उनकी लाश बरामद हुई।

सिंघड़ा में उनका डेरा है
राम सिंह गांव 65 वर्ष के थे। वह सिंघड़ा के रहने वाले थे और यहीं उनका डेरा भी है। यही वजह है कि, वह सिंगड़ा वाले बाबा जी के नाम से भी मशहूर थे। सिंगड़ा हरियाणा के करनाल जिले का ही एक गांव है। रामसिंह के हरियाणा-पंजाब के अलावा दुनियाभर में लाखों की संख्या में अनुयायी हैं। वे सभी सिंघड़ा पहुंच रहे हैं। बताया जाता है कि, रामसिंह कई सिख संगठनों में अलग-अलग पदों पर रह चुके थे। राम सिंह सिंगड़ा वाले डेरे के अलावा दुनिया के अलग-अलग देशों में प्रवचन करने के लिए जाते थे।

किसानों के लिए ही पहुंचे थे दिल्ली
किसान संगठन के एक पदाधिकारी ने राम सिंह की तारीफ करते हुए कहा कि, संत बाबा राम सिंह धार्मिक उपदेशक होने के साथ खुद भी किसान थे। पिछले कुछ दिनों से वो दिल्ली में थे और किसानों के समर्थन में आवाज उठा रहे थे। प्रदर्शनकारियों के लिए उन्होंने शिविर की भी व्यवस्था की थी और कंबल भी बांटे थे। किसान संगठनों के लोग उनसे इतने प्रभावित हुए कि, वे कहते हैं कि बाबा ने आत्महत्या नहीं की बल्कि किसानों के लिए शहादत दी है।''













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