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राज्यसभा चुनाव: कौन हैं कुलदीप बिश्नोई, जिन्होंने बिगाड़ दिया कांग्रेस का बना बनाया खेल

नई दिल्ली, 11 जून: चार राज्यों की 16 विधानसभा सीटों पर हुई वोटिंग के नतीजे आ चुके हैं। इसमें सबसे ज्यादा दिलचस्प मुकाबला हरियाणा में हुआ। वहां पर राज्यसभा की दो सीटों पर वोटिंग हुई। माना जा रहा था कि एक पर कांग्रेस और एक पर बीजेपी की जीत पक्की है, लेकिन अंतिम वक्त में बड़ा उलटफेर हुआ और कांग्रेस की जगह निर्दलीय प्रत्याशी कार्तिकेय शर्मा जीत गए। आइए जानते हैं कौन है वो विधायक जिनकी वजह से हरियाणा में कांग्रेस का पूरा खेल पलट गया।

ऐसे शुरू हुई बगावत

ऐसे शुरू हुई बगावत

हरियाणा से कांग्रेस ने अजय माकन को उतारा था। कांग्रेस को पहले से ही क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा था, इस वजह से उसने अपने विधायकों को जयपुर के एक रिजॉर्ट में ठहरवाया, लेकिन इसमें एक विधायक नहीं गए, वो थे कुलदीप बिश्नोई। दरअसल बिश्नोई ने हरियाणा पीसीसी चीफ पद के लिए दावेदारी ठोकी थी, लेकिन पार्टी ने उनकी जगह उदयभान को जिम्मेदारी दे दी। जिससे बिश्नोई नाराज हो गए।

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    पार्टी से निकाला गया

    पार्टी से निकाला गया

    बिश्नोई ने हार नहीं मानी, उन्होंने राहुल गांधी से मुलाकात का वक्त मांगा, लेकिन ये मुलाकात नहीं हो पाई। जिससे उन्होंने बागी तेवर अपना लिए। जब पार्टी अपने विधायकों को इकट्ठा कर रही थी, तो उन्होंने उनके साथ रिजॉर्ट जाने से इनकार कर दिया। उस दौरान उन्होंने कहा था कि वो अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर वोट डालेंगे। कांग्रेस के मुताबिक बिश्नोई ने अगर साथ दिया होता तो कार्तिकेय चुनाव ना जीतते। इसी वजह से उनको पार्टी के निकाल दिया गया है।

    कई बार बदली 'पार्टी'

    कई बार बदली 'पार्टी'

    22 सितंबर 1968 को जन्मे कुलदीप बिश्नोई पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के बेटे हैं। 2005 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जीती, लेकिन भजनलाल को सीएम नहीं बनाया। जिससे नाराज होकर उनके बेटे कुलदीप ने 22 दिसंबर 2007 को हरियाणा जनहित कांग्रेस नाम से पार्टी बनाई। 10 साल तक उन्होंने पार्टी को चलाया, लेकिन 2016 में उसका कांग्रेस में विलय कर दिया। विलय से पहले 2011 से लेकर 2014 तक उन्होंने अपनी पार्टी का गठबंधन बीजेपी से किया था।

    11 साल सीएम थे भजनलाल

    11 साल सीएम थे भजनलाल

    बिश्नोई के पिता भजनलाल करीब 11 साल तक हरियाणा के सीएम रहे। उनके गांधी परिवार से काफी करीबी रिश्ते थे। उनकी राह पर चलकर कुलदीप भी गांधी परिवार और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के खास बने। उनके राजनीतिक रसूक का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि आदमपुर से कभी भी भजनलाल के परिवार के सदस्य नहीं हारे हैं।

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