नए साल पर शख्स को आया सरप्राइज कॉल, 9 साल से लापता पत्नी के मिलने की खबर सुन छलक आईं आंखें
हरियाणा के केहर सिंह की पत्नी 2013 लापता हो गई थीं। उसके लापता होने के नौ साल बाद कर्नाटक के आश्रय गृह में मिली हैं। जब आश्रय गृह के आरिफ ने केहर सिंह को नए साल की पूर्व संध्या पर कॉल किया तब वो अचंभित हो गए।

नया साल हर किसी के लिए नई उम्मीदों और आशाओं को लेकर आता है। वहीं हरियाणा के एक शख्स को इस नए साल पर इतनी बड़ी खुशी मिली, जिसके बारे वो नाउम्मीद हो चुके थे। ये शख्स हरियाणा के रोहतक के रहने वाले हैं जिनकी पत्नी नौ साल पहले कहीं लापता हो गई थी, जिनके मिलने की कॉल ने उनकी जिंदगी में नई उमंग भर दी है।
हरियाणा के इस शख्स को नए साल की पूर्व संध्या यानी शनिवार को रात को सेल्टर होम से सरप्राइज कर देने वाला कॉल आया, जिस पर उन्हें अपनी लंबे समय से खोई हुई पत्नी के मिलने की खबर मिली। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार रोहतक के 55 वर्षीय केहर सिंह को थानाल होम से
जब कॉल आया तो उन्हें कुछ पल के लिए यकीन ही नहीं हो रहा था कि उनकी खोईं हुई पत्नी दर्शिनी इतने साल बाद मिल जाएगी।
2013 में केहर सिंह की पत्नी बिना किसी कारण के अचानक लापता हो गई थी। उनके पति ने कई सालों तक तलाश की लेकिन उन्हें वो नहीं मिली। थानाल होम के प्रमुख मोहम्मद मुस्तफा ने बताया कि "चार साल पहले, कुशलनगर पुलिस ने हमें बताया कि एक अर्धनग्न महिला सड़कों पर घूम रही है,और हमसे उनकी देखभाल करने का अनुरोध किया गया।
मुस्तफा ने बताया कि हमने जाकर उन्हें देखा तो उनकी मानसिक स्थिति वास्तव में बहुत खराब थी। हमने उसे आश्रय प्रदान किया और काउंसलिंग के दौरान, वह अपने अतीत के बारे में केवल हरियाणा को ही याद कर सकी। दर्शिनी को यह याद नहीं था कि वह 2013 और 2018 के बीच कैसे बची थी या वो कर्नाटक पहुंच गईं।
एनजीओ की देखभाल में वर्षों से उसकी हालत में सुधार हुआ और करीब छह महीने पहले उसे अपने गृहनगर रोहतक की याद आई। इसके बाद सेल्टर होम ने लापता होने की संभावित रिपोर्ट के बारे में हरियाणा पुलिस से संपर्क किया और उन्हें पता चला कि नौ साल पहले ऐसी एक शिकायत दर्ज की गई थी। जिसके बाद 50 वर्षीय दर्शिनी के पति का पता मिलने के बाद उनसे मुस्तफा ने संपर्क किया।
केहर सिंह अपनी पत्नी से मिलने के बाद अपने आंसू नहीं रोक सके। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी जब खोईं तब भी वो मानसिक रूप से बीमार थी। वह लापता हो गई और हमने पुलिस शिकायत दर्ज की। मैंने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब में उसकी तलाश की और आखिरकार फिर मैंने हार मान ली। मुस्तफा का फोन मेरे जीवन का सबसे बड़ा तोहफा था।












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