हरियाणाः जींद के कंडेला में किसानों की महापंचायत, टिकैत-चढूनी की हुंकार, हजारों लोग पहुंचे
farmers protest | Kisan mahapanchayat in Jind Haryana, जींद। कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों के आंदोलन के 70वें दिन हरियाणा के जींद जिले में महापंचायत हो रही है। यह महापंचायत कंडेला में हो रही है, जिसमें सैकड़ों गांवों के किसान एकत्रित हुए हैं। महापंचायत के लिए राजीव गांधी स्टेडियम में 7 एकड़ भूमि पर तैयारियां की गईं, जो कि पिछले 3 दिन से चल रही थीं। मंगलवार को इसका मंच तैयार किया गया। किसान संगठन के एक पदाधिकारी ने बताया कि, ट्रैफिक-पार्किंग, खाने की जिम्मेदारी 2 हजार वॉलंटियर को सौंपी गई। यहां प्रदेश के तपा, बारहा, खापों, टोल प्लाजा पर धरने पर बैठे किसानों को निमंत्रण दिया गया। महापंचायत में 50 हजार से ज्यादा किसानों को जुटाने का आह्वान किया गया।
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कंडेला से 19 साल बाद किसानों की हुंकार
बता दिया जाए कि, गांव कंडेला में किसान आंदोलन 19 साल पहले हुआ था। आज फिर से यहां ऐसा ही आंदोलन देखने को मिल रहा है। महापंचायत के लिए संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य नेता राकेश टिकैत, बलबीर सिंह राजेवाल, रतन सिंह मान, गुरनाम सिंह चढ़ूनी जैसे नेता पहुंचे हैं। जबकि, महापंचायत की अध्यक्षता कंडेला खाप के प्रधान एवं सर्वजातीय खाप के संयोजक टेकराम कंडेला कर रहे हैं। महापंचायत-स्थल के नजदीक 3 एकड़ और मेन रोड के पास 2 एकड़ में दो जगह पार्किंग बनाई हैं।

राकेश टिकैत, बलबीर राजेवाल व गुरनाम सिंह चढ़ूनी पहुंचे
किसानों को ज्यादा उम्मीदें राकेश टिकैत, बलबीर राजेवाल व गुरनाम सिंह चढ़ूनी से हैं। इसके अलावा प्रदेश के अलग-अलग जिलों में 10 टीमें गाड़ियों में जाकर निमंत्रण दे रही हैं। यहां जुटने वाले खाप, तपा, बारहा के प्रधानों के लिए 100 कुर्सी लगवाई गई हैं। मंगलवार शाम को बैठक कर 2 हजार युवाओं की अलग-अलग ड्यूटियां लगाई गई। कार्यक्रम में कलाकार अमित ढुल, ईश्वर छात्तर, राममेहर महला अन्य को बुलाया गया है। एक वृद्ध किसान ने कहा कि, इसमें हरियाणा प्रदेश के गांव-गांव के किसान आ रहे हैं। बाहर के किसान भी आने की संभावना है।

50 हजार लोगों के लिए खाने की व्यवस्था
इतना ही नहीं, यहां 50 हजार लोगों के लिए पकवान बनाए गए हैं। खाद्य सामग्री तैयार करने वाली महिलाओं ने कहा- किसान भाइयों के लिए यहां चाय, पकोड़े, बाजरे की रोटी, सरसो का साग, आलू, मटर की सब्जी तैयार की है। दूध, दही, लस्सी गांव से मंगवाई गई हैं। खाने का आयोजन कंडेला खाप के चबूतरे पर किया है। कंडेला में 2002 में गोलीकांड के दौरान 9 किसानों की मौत हो गई थी। तब यहां बड़ा आंदोलन हुआ था।












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