IAS Rani Nagar: चार साल से ड्यूटी से नदारद, अब जबरन रिटायरमेंट पर क्यों उलझ गए UPSC और हरियाणा?
IAS Rani Nagar Haryana: हरियाणा कैडर की 2014 बैच की IAS अधिकारी रानी नागर को लेकर एक बार फिर केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। रानी नागर बीते चार वर्षों से सेवा से अनुपस्थित चल रही हैं, जिसके बाद हरियाणा सरकार ने उन्हें जबरन सेवानिवृत्त (कंपलसरी रिटायरमेंट) करने का प्रस्ताव भेजा था। मगर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने इस पर सहमति नहीं दी। अब यह मामला नौकरशाही बनाम व्यवस्था की साख का सवाल बन चुका है।
UPSC ने नहीं मानी सरकार की बात, ग्रेड डाउन की सिफारिश
UPSC ने हरियाणा सरकार के कंपलसरी रिटायरमेंट प्रस्ताव को खारिज करते हुए महज दो साल के लिए रानी नागर का ग्रेड डाउन करने की सिफारिश की है। आयोग ने यह निर्णय 30 मई 2024 को सुनाया, लेकिन इसके पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। इस पर हरियाणा सरकार ने भी नाराजगी जताते हुए 20 जनवरी 2025 को दोबारा प्रस्ताव केंद्र को भेज दिया।

मंत्रालय ने लौटाया प्रस्ताव, दो बड़ी खामियां बताईं
केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय ने हरियाणा सरकार का दोबारा भेजा गया प्रस्ताव 30 जनवरी 2025 को वापस कर दिया। मंत्रालय ने साफ तौर पर कहा कि सरकार ने UPSC की असहमति पर कोई डिटेल्ड कारण नहीं दिया और न ही संबंधित अफसर यानी रानी नागर के प्रतिवेदन पर विचार की कोई जानकारी दी गई।
क्या सरकार अब रुख सख्त करेगी?
मंत्रालय की टिप्पणी के बाद हरियाणा सरकार अब कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर मजबूत तैयारी में जुट गई है। सरकार ने रानी नागर को अप्रैल से जून 2025 के बीच चार बार ईमेल और पंजीकृत डाक से UPSC का प्रस्ताव भेजा है। अब उनके जवाबों के आधार पर मंत्रालय को संशोधित प्रस्ताव भेजा जाएगा।
सेवा में रहते हुए विवादों में रहीं रानी नागर
रानी नागर को 11 मार्च 2020 को अभिलेखागार विभाग में अतिरिक्त सचिव और निदेशक पद की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन उन्होंने 27 अक्टूबर 2020 के बाद से ड्यूटी पर आना बंद कर दिया। इसके बाद सरकार की ओर से कई नोटिस जारी किए गए, जिनका कोई जवाब नहीं मिला।
मई 2020 में उन्होंने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा भेजा, जिसे सरकार ने स्वीकार नहीं किया। दो साल बाद मई 2022 में उन्होंने फिर स्वास्थ्य कारणों से राष्ट्रपति को इस्तीफा भेजा, लेकिन यह भी नामंजूर कर दिया गया।
आत्मरक्षा और उत्पीड़न की शिकायतों से सुर्खियों में आईं
रानी नागर का प्रशासनिक सफर विवादों और संघर्षों से भरा रहा है। वर्ष 2018 में उन्होंने पशुपालन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था। वहीं, सिरसा में SDM रहते हुए उन्होंने एक ऑटो चालक से अपनी जान को खतरा बताया।
इसके अलावा उन्होंने चंडीगढ़ में यूटी गेस्ट हाउस में रहने के दौरान खाने में लोहे की कील मिलने और पुलिस से सुरक्षा न मिलने की शिकायत की थी। उन्होंने ट्विटर और वीडियो संदेशों के जरिए अपनी जान को खतरा बताया था। इसी डर के कारण मई 2020 में इस्तीफा देकर अपनी बहन के साथ यूपी लौट गईं।
क्या सेवा समाप्ति तक पहुंचेगा मामला?
रानी नागर का मामला अब सिर्फ एक अनुपस्थित IAS अफसर से ज्यादा बन चुका है। यह उस व्यवस्था की परीक्षा भी है जो नियमों के पालन, सेवा अनुशासन और कर्मचारियों की सुरक्षा के बीच संतुलन साधने की कोशिश में है। UPSC की सिफारिश और सरकार की जिद के बीच अब देखना होगा कि क्या यह मामला किसी निर्णायक मोड़ पर पहुंचेगा या फिर लंबी कानूनी लड़ाई की ओर बढ़ेगा।












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