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Haryana: हरियाणा में 125 करोड़ रुपए नहर जल शुल्क बकाया, खट्टर सरकार ले सकती है बड़ा निर्णय

हरियाणा में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली सरकार किसानों को बड़ी सौगात देने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदेश के किसानों पर कुल 125 करोड़ रुपए नहर जल शुल्क लंबित है। जिसे अब सरकार माफ करने पर विचार कर सकती है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए विधानसभा के सदन में पेश किए जा रहे बजट अनुमान में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर औपचारिक रूप से बकाया आबियाना माफ करने के साथ-साथ नहर के पानी के लिए शुल्क लगाने की प्रथा को रोकने की घोषणा कर सकते हैं।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा में 2012-13 से 2022-23 के बीच अधिकारियों ने रबी और खरीफ सीजन के दौरान आबियाना लगाने के लिए लगभग 22-24 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का आकलन किया। बकाया राशि 2012-13 में ₹72 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 125 करोड़ रुपए हो चुकी है।

Haryana CM Khattar canal irrigation charges

वित्तीय वर्ष 2018-19 और 2022-23 के बीच, राज्य सरकार ने किसानों से करीब 222 करोड़ रुपए की वसूली की गई थी। इसे पहले 2012-13 से 2017-18 के बीच छह साल की अवधि के दौरान 166 करोड़ की वसूली हुई।

अगर हर साल में की गई वसूली का तुलना करें ते कुल कलेक्शन में 10 करोड़ रुपये से अधिक की कमी आई है। अधिकारियों का कहना है कि आबियाना का भुगतान न करने पर सरचार्ज का कोई प्रावधान नहीं है।

सीएजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए अधिकारियों ने कहा कि 2002-06 के दौरान बकाया 193 करोड़ रुपए के मुकाबले केवल 24 करोड़ एकत्र किए। जबकि दिसंबर 2006 में 169 करोड़ का राजस्व वसूल नहीं किया जा सका।

राजस्व प्रशासन के उद्देश्य से, राज्य को क्रमशः एक डिवीजनल कमिश्नर और डिप्टी कमिश्नर (डीसी) या कलेक्टर के प्रभार के तहत छह डिवीजनों और 22 जिलों में विभाजित किया गया है।

हरियाणा में इस सिंचाई शुल्क को वूसलने के लिए जिल कलेट्टर अपने जिले में तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों और अन्य कर्मचारियों के के जरिए वसूली प्रक्रिया नियंत्रित करता है। किसानों से नहर सिंचाई जल शुल्क की वसूली गांव के लंबरदारों (मुखिया) के माध्यम से की जाती है, जिन्हें लंबरदारी शुल्क का भुगतान किया जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा में कुछ क्षेत्र ऐसे हैं, जहां किसान नहर सिंचाई योजना के तहत भुगतान करने में आगे हैं। जिन जिलों में आबियाना शुल्क किसान भरते में उनमें कैथल, सिरसा, भिवानी, चरखी दादरी, झज्जर, हिसार और नूंह सबसे आगे है। इन जिलों के करीब 2,000 गांवों के किसान सिंचाई शुल्क का भुगतान करते रहते हैं।

वहीं अब रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर सरकार किसानों का बकाया नहर जल सिंचाई शुल्क, जिसे "अबियाना" कहा जाता है, 125 करोड़ तक माफ कर सकती है। सूत्रों के हवाले से कहा गया कि वित्त विभाग ने सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग द्वारा रखे गये प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

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